गुजरात हाई कोर्ट ने वन्यजीवों और छोटे जीवों की सुरक्षा के लिए घातक ग्लू ट्रैप्स पर प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया है।

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04 May 2026

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हाल ही में जारी एक आदेश में, माननीय गुजरात हाई कोर्ट ने रिट याचिका (PIL) संख्या 28/2024 में, जिसमें PETA इंडिया एक पक्षकार है, गुजरात के मुख्य सचिव से यह जवाब मांगा है कि भारत सरकार के संबंधित मंत्रालय द्वारा 16.11.2020 को जारी सर्कुलर के मद्देनज़र ग्लू ट्रैप्स के उपयोग पर सख्त प्रतिबंध लागू करने के लिए क्या कार्रवाई की गई है। PETA इंडिया ने राज्य में ग्लू ट्रैप्स की व्यापक बिक्री के सबूत प्रस्तुत किए थे, जो चूहों, पक्षियों, छिपकलियों, बिल्ली के बच्चों और अन्य छोटे जीवों को अत्यधिक पीड़ा और नुकसान पहुंचाते हैं।

अदालत ने माना कि गुजरात स्टेट एनिमल वेलफेयर बोर्ड (SAWB) द्वारा जारी सर्कुलर अकेले ही निर्माण, बिक्री और उपयोग पर प्रभावी प्रतिबंध लागू करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं, जो कि पशु क्रूरता निवारण अधिनियम (PCA), 1960 की धारा 11 के अनुरूप होना चाहिए, और इसके लिए आगे कार्रवाई आवश्यक है। अब अदालत ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि 16 नवंबर 2020 को एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया द्वारा जारी प्रतिबंध लागू करने संबंधी सर्कुलर के तहत उनके कार्यालय ने क्या कदम उठाए हैं, इसका विवरण दें।

2020 से ग्लू ट्रैप्स पर प्रतिबंध होने के बावजूद, मार्च 2026 में PETA इंडिया द्वारा अहमदाबाद, गांधीनगर और आनंद में रिटेल दुकानों और ऑनलाइन मार्केटप्लेस का सर्वे करने पर पाया गया कि ये ट्रैप्स अब भी खुलेआम और आसानी से उपलब्ध हैं। इन्हें अलग-अलग नामों से बेचा जाता है, लेकिन इनका उद्देश्य एक ही होता है चिपचिपे पदार्थ के जरिए छोटे जीवों को फंसाकर immobilize करना। दुकानदारों ने बिल देने से इनकार किया, जिससे यह संकेत मिलता है कि उन्हें इनके अवैध होने की जानकारी थी, फिर भी बिक्री जारी रही।

ग्लू ट्रैप्स का उपयोग, जो जीवों को अनावश्यक पीड़ा देता है, PCA अधिनियम, 1960 की धारा 11 का उल्लंघन है। यह वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 का भी उल्लंघन है, जो संरक्षित प्रजातियों के “शिकार” पर रोक लगाता है। इन ट्रैप्स में फंसे चूहे, पक्षी और अन्य जीव भूख, प्यास या मौसम के प्रभाव से कई दिनों तक तड़पने के बाद मर जाते हैं। कई जीवों की नाक और मुंह चिपक जाने से उनका दम घुट जाता है, जबकि कुछ आज़ाद होने की कोशिश में अपने ही पैर चबा लेते हैं और खून बहने से मर जाते हैं। जो जीवित मिलते हैं, उन्हें अक्सर ट्रैप समेत फेंक दिया जाता है या उन्हें पीटकर या डुबोकर मार दिया जाता है।

इस मुद्दे पर भारतीय रिटेल सेक्टर ने भी पहल दिखाई है। Amazon India, Flipkart, Meesho, Snapdeal और Jiomart जैसे प्रमुख ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स, तथा Wellness Forever और Rajmandir Hypermarket जैसे बड़े रिटेलर्स ने अपने प्लेटफॉर्म से ग्लू ट्रैप्स हटा दिए हैं। इंग्लैंड, वेल्स, स्कॉटलैंड, न्यूज़ीलैंड, नॉर्वे, जर्मनी, नीदरलैंड, आइसलैंड और आयरलैंड सहित कई देशों में इन पर प्रतिबंध या कड़े नियंत्रण हैं।

PETA इंडिया के अनुसार, चूहों की संख्या नियंत्रित करने का सबसे अच्छा तरीका है जगह को उनके लिए आकर्षक या सुलभ न बनने देना, खाने के स्रोत खत्म करें, सतह और फर्श साफ रखें, भोजन को मजबूत कंटेनरों में रखें, कूड़ेदान को बंद रखें, और अमोनिया में भीगे कपड़े या रुई का उपयोग करें (जिसकी गंध उन्हें पसंद नहीं होती)। कुछ दिनों बाद, उनके प्रवेश के रास्तों को फोम सीलेंट, स्टील वूल या मेटल शीट से बंद कर दें। मानवीय केज ट्रैप्स का उपयोग कर उन्हें पकड़ा जा सकता है, लेकिन उन्हें ऐसी जगह छोड़ा जाना चाहिए जहां उन्हें पर्याप्त भोजन, पानी और आश्रय मिल सके।

PETA इंडिया जो इस सिद्धांत के तहत काम कर्ता है कि “पशु हमारे मनोरंजन या किसी भी अन्य प्रकार के शोषण के लिए नहीं हैं”, प्रजातिवाद, यानी मानव-श्रेष्ठता की सोच, का विरोध करता है। अधिक जानकारी के लिए कृपया हमारी वेबसाईट PETAIndia.com पर जाएं या XFacebook, और Instagram पर हमें फॉलो करें।

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