PETA इंडिया की शिकायत के बाद ‘न्यू मोमोता सर्कस एवं जादू’ से एक कुत्ते और एक खच्चर को बचाया गया
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22 December 2025
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डिगबोई, असम – ‘न्यू मोमोता सर्कस एवं जादू’ जो पिछले सप्ताह तक असम के डिगबोई में डेरा डाले हुए थे, वहाँ से रेस्क्यू किए गया कुत्ता एवं खच्चर दोनों अब अपने नए अभयारण्य (सैंक्चुरी) में सुरक्षित पहुँच गए हैं। इन पशुओं को असम के पशुपालन एवं पशु चिकित्सा विभाग द्वारा बचाया गया था। यह बचाव ‘पीपुल फॉर द एथीकाल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स’ (PETA इंडिया) द्वारा राज्य पशु कल्याण बोर्ड के सदस्य सचिव और पशुपालन एवं पशु चिकित्सा विभाग के निदेशक डॉ. जयंत कुमार गोस्वामी को दी गई शिकायत के बाद किया गया।
पशुओं को प्रदर्शन हेतु इस्तेमाल करने से पहले उनका ‘परफॉर्मिंग एनिमल्स (रजिस्ट्रेशन) नियम, 2001’ के तहत रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य होता है लेकिन यह सर्कस बिना परफॉर्मिंग एनिमल्स सर्टिफिकेट (PARC) के पशुओं से मंच पर प्रदर्शन करवा रहा था। करतब करने हेतु, कुत्ते को 25–30 फीट की ऊँचाई से जाल में कूदने के लिए मजबूर किया जा रहा था जबकि खच्चर के साथ जबरदस्ती मारपीट करके दर्शकों को उसके दाँत दिखाने के लिए उसका मुँह जबरन खोला गया।
सर्कस में रखे गए पशुओं और उनके बचाव के दौरान की तस्वीरें मांगे जाने पर उपलब्ध कारवाई जाएंगी।
PETA इंडिया के सीनियर पॉलिसी और लीगल एडवाइज़र, विक्रम चंद्रवंशी ने कहा:- “पशुओं से खतरनाक करतब करवाना मनोरंजन नहीं, बल्कि क्रूरता है। इसके बजाय दर्शकों को आकर्षित करने के लिए रोबोटिक पशुओं का इस्तेमाल किया जा सकता है। PETA इंडिया, कुत्ते और खच्चर को बचाने के लिए असम राज्य पशु कल्याण बोर्ड के सदस्य सचिव डॉ. जयंत कुमार गोस्वामी द्वारा की गई तत्काल कार्रवाई की सराहना करता है, जिसके चलते इन निर्दोष पशुओं को अंततः एक सम्मानजनक जीवन मिल सका।”
AWBI द्वारा किए गए कई निरीक्षणों और PETA इंडिया द्वारा किए गए अनगिनत जांचों से यह प्रमाणित होता है कि सर्कस में पशुओं के साथ क्रूर व्यवहार होता है। वैध PARC वाले सर्कस में भी, जब पशुओं का प्रदर्शन नहीं हो रहा होता, तब उन्हें जंजीरों से बंधा पाया गया या वह छोटे व गंदे पिंजड़ों में कैद मिले। सर्कस में रहने वाले पशुओं को पर्याप्त पशु चिकित्सकीय देखभाल, भोजन, पानी और आश्रय नहीं मिलता, और उन्हें यातनाएं देकर करतब दिखाने के लिए मजबूर किया जाता है। सर्कस में कई पशु स्टेरियोटाइप व्यवहार करते मिले जो अत्यधिक तनाव के संकेत होते हैं।
PETA इंडिया, जो इस सिद्धांत के तहत काम करता है कि “पशु हमारे मनोरंजन करने और किसी भी तरह से हमारे दुर्व्यवहार करने के लिए नहीं हैं”, प्रजातिवाद (speciesism) का विरोध करता है, प्रजातिवाद एक मानव-प्रधान सोच है और जिसके तहत इंसान खुद को सर्वोपरि मानकर, अपनी जरूरतों के अनुसार अन्य प्रजातियों के साथ अलग-अलग व्यवहार एवं शोषण करता है। अधिक जानकारी के लिए कृपया PETAIndia.comपर जाएँ और X, Facebook, एवं Instagram. पर PETA को फ़ॉलो करें।
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