दार्जिलिंग: PETA इंडिया के हस्तक्षेप के बाद कुत्ते के बच्चे को पीट-पीटकर और पैरों से कुचलकर मारने के मामले में एफआईआर दर्ज

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16 October 2025

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दार्जिलिंग- कुरसेओंग, दार्जिलिंग में एक रिसॉर्ट में काम करने वाले एक दंपति द्वारा कुत्ते के नन्हें बच्चे को बेरहमी से पीट-पीटकर और पैरों से कुचलकर मार डालने की घटना की सूचना मिलने के बाद, PETA इंडिया ने कुरसेओंग पुलिस स्टेशन और मृत कुत्ते के संरक्षक (जो स्वयं उस रिसॉर्ट के मालिक भी हैं) के साथ मिलकर यह सुनिश्चित किया कि इस क्रूर कृत्य के खिलाफ कानून की सख्त धाराओं के तहत प्राथमिकी रिपोर्ट (FIR) दर्ज की जाए।

यह घटना 9 सितंबर को किरण रिवरसाइड रिट्रीट, जोगीघाट, सिटोंग में घटी थी। आरोपी दंपति के खिलाफ हाल ही में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 325 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। उन पर आरोप है कि उन्होंने नन्हें कुत्ते की हत्या की, रिसॉर्ट से पैसे चुराए और फिर फरार हो गए। पुलिस फिलहाल फरार आरोपियों की तलाश कर रही है। BNS, 2023 की धारा 325 के अनुसार किसी भी पशु को विकलांग करना या मार डालना एक दंडनीय अपराध (संज्ञेय अपराध) है, जिसमें पांच वर्ष तक की जेल, जुर्माना, या दोनों का प्रावधान है।

PETA इंडिया की क्रूरता प्रतिक्रिया समन्वयक इशानी राठी कहती हैं- “जो लोग पशुओं के साथ क्रूरता करते हैं, वे अक्सर आगे चलकर इंसानों को भी नुकसान पहुँचाते हैं। सभी की सुरक्षा के लिए यह ज़रूरी है कि जनता इस तरह की पशुओं पर हो रही क्रूरता की घटनाओं की रिपोर्ट पुलिस में करे। हम कुरसेओंग पुलिस स्टेशन की सराहना करते हैं कि उन्होंने एफआईआर दर्ज कर यह स्पष्ट संदेश दिया है कि पशुओं के साथ की जाने वाली क्रूरता किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”

PETA इंडिया का सुझाव है कि पशुओं के साथ क्रूरता करने वालों का मानसिक स्वास्थ्य मूल्यांकन कराया जाए और उन्हें काउंसलिंग दी जाए, क्योंकि ऐसे कृत्य गंभीर मानसिक असंतुलन का संकेत होते हैं। शोध से पता चलता है कि जो लोग पशुओं पर अत्याचार करते हैं, वे अक्सर आदतन अपराधी होते हैं और आगे चलकर अन्य पशुओं और यहां तक कि इंसानों को भी नुकसान पहुँचाते हैं। Forensic Research & Criminology International Journal में प्रकाशित एक अध्ययन में कहा गया है कि “जो व्यक्ति पशुओं के साथ क्रूरता करते हैं, उनके द्वारा हत्या, बलात्कार, डकैती, मारपीट, उत्पीड़न, धमकी, और नशे से जुड़े अपराधों को अंजाम देने की संभावना तीन गुना अधिक होती है।”

PETA इंडिया – जो इस सिद्धांत के तहत काम करता है कि “पशु किसी भी तरह से हमारा दुर्व्यवहार सहने के लिए नहीं है” प्रजातिवादी विचारधारा का विरोध करता है क्यूंकि इस विचारधारा के तहत मानुष इस संसार में स्वयं को सर्वोपरि मानकर अपने जरूरत के अनुसार अन्य प्रजातियों का शोषण करना अपना अधिकार समझता है। अधिक जानकारी के लिए कृपया PETAIndia.com पर जाएं या हमें XFacebook, एवं Instagram पर फॉलो करें।

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