PETA इंडिया की शिकायत पर कोलाबा में अवैध घोड़ा गाड़ी के खिलाफ FIR दर्ज

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08 May 2025

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Hiraj Laljani; [email protected]

मुंबई – एक सतर्क नागरिक द्वारा अवैध रूप से संचालित घोड़ा गाड़ी की तस्वीरें सामने लाने के बाद पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (PETA) इंडिया ने तुरंत कार्रवाई की। संगठन की शिकायत पर कोलाबा पुलिस ने गाड़ी के चालक और संभावित मालिक — जिनका विवरण वाहन के पीछे दर्ज था — के खिलाफ FIR दर्ज की है। ऐसी घोड़ा गाड़ियों के संचालन पर माननीय बॉम्बे हाईकोर्ट ने 8 जून 2015 को एनिमल्स एंड बर्ड्स चैरिटेबल ट्रस्ट बनाम MCGM एवं अन्य (जनहित याचिका संख्या 36/2011) के आदेश में स्पष्ट रूप से प्रतिबंध लगा दिया था। PETA इंडिया इस मामले में हस्तक्षेपकर्ता है। संबंधित घोड़ा गाड़ी को कोलाबा स्थित मैडम कामा रोड पर चलते हुए देखा गया था।

घटना के फ़ोटो मांगे जाने पर उपलब्ध कराए जाएंगे।

इस मामले में की गई कार्रवाई के तहत, पुलिस ने पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 3 और 11 तथा भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 223 के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है। फिलहाल पुलिस गाड़ी के मालिक और संबंधित घोड़े की पहचान और तलाश कर रही है। घोड़ा मिलते ही उसे कानून के प्रावधानों और जनहित याचिका संख्या 36/2011 में माननीय बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुसार ज़ब्त किया जाएगा।

 

PETA इंडिया की लीड क्रूएल्टी रिस्पॉन्स कॉर्डिनेटर सलोनी सकारिया ने कहा, “PETA इंडिया कोलाबा पुलिस स्टेशन द्वारा माननीय बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में की गई कार्रवाई की सराहना करता है। यह कदम यह स्पष्ट संदेश देता है कि घोड़ा गाड़ियों के अवैध उपयोग को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हम मुंबई पुलिस से आग्रह करते हैं कि शहर में कहीं भी अवैध रूप से संचालित घोड़ा गाड़ियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए और साथ ही बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) से अपील करते हैं कि वह बिना लाइसेंस वाले अस्तबलों में घोड़ों को रखे जाने पर तुरंत रोक लगाए।”

PETA इंडिया ने अपनी शिकायत में यह बताया कि माननीय बॉम्बे हाईकोर्ट ने 8 जून 2015 को दिए गए अपने आदेश में न सिर्फ मुंबई में घोड़ा-चालित विक्टोरिया गाड़ियों के इस्तेमाल पर रोक लगाई थी, बल्कि यह भी कहा था कि शहर में घोड़ों को रखना भी अवैध है, क्योंकि मुंबई महानगरपालिका अधिनियम, 1888 के तहत कोई लाइसेंसप्राप्त अस्तबल मौजूद नहीं है। इस आदेश के तहत कोर्ट ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (MCGM) को ऐसे सभी अस्तबल बंद करने का निर्देश दिया था और मुंबई पुलिस से कहा था कि वह इस प्रतिबंध को सख्ती से लागू करे और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई करे।

जुलाई 2017 में माननीय बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार द्वारा घोड़ा-चालित विक्टोरिया गाड़ियों के मालिकों और चालकों के लिए प्रस्तुत पुनर्वास योजना को स्वीकार किया, जिसके अंतर्गत घोड़ों को मुंबई की सड़कों से हटाने और चालकों को उनके आजीविका के साधन के रूप में मुआवज़ा और/या वेंडर लाइसेंस प्रदान करने का मार्ग प्रशस्त हुआ। यह कदम न केवल घोड़ों को शोषण और यातना से मुक्त करने की दिशा में एक बड़ी जीत था, बल्कि चालकों के लिए भी करुणामूलक समाधान लेकर आया। मई 2018 में, PETA इंडिया ने महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्य सचिव को पत्र लिखकर आग्रह किया कि यह योजना तुरंत प्रभाव से लागू की जाए और राज्य सरकार द्वारा स्वीकृत फंड बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) को समय पर प्रदान किया जाए ताकि यह प्रक्रिया बाधित न हो। इस सकारात्मक पहल के परिणामस्वरूप कई विक्टोरिया गाड़ी चालक पशु-मुक्त विकल्पों की ओर अग्रसर हुए और उन्होंने हेरिटेज-शैली की मोटर चालित ई-गाड़ियों को अपनाना शुरू कर दिया।

PETA इंडिया जो इस धारणा में विश्वास रखता है कि “पशु मनुष्यों द्वारा दुर्व्यवहार सहने या मनोरंजन के लिए नहीं है”, प्रजातिवाद का विरोध करता है क्योंकि यह एक ऐसी विचारधारा है जिसमें मनुष्य इस संसार में स्वयं को सर्वोपरि मानकर अपनी अलग अलग जरूरतों के अनुसार अन्य प्रजातियों का शोषण करना अपना अधिकार समझता है। अधिक जानकारी के लिए कृपया हमारी वेबसाईट PETAIndia.com पर जाएँ और XFacebook, व Instagram पर हमें फॉलो करें।

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