जीव दया फाउंडेशन और PETA इंडिया के हस्तक्षेप के बाद अलीगढ़ में पशु के पिछले पैर तोड़ने के आरोप में दो के खिलाफ मामला दर्ज

Posted on by Surjeet Singh

एक मादा कुत्ते के पर दो ग्रामीणों द्वारा किए गए क्रूर हमले और उसके दोनों पिछले पैरों में फ्रैक्चर होने की सूचना और वीडियो मिलने के बाद, पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स इंडिया (PETA इंडिया) ने जीव दया फाउंडेशन अलीगढ़ की संस्थापक आशा सिसौदिया, जो कुत्ते की स्थानीय देखभाल करने वाली हैं, और गभाना पुलिस स्टेशन के अधिकारियों के साथ मिलकर यह सुनिश्चित किया कि कानून के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत एक प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज की जाए।

यह घटना 13 मई को अलीगढ़ के पिफलौथ गाँव में हुई थी। रिपोर्टों के अनुसार, गाँव के दो निवासियों ने सामुदायिक मादा कुत्ते पर हमला किया, जिससे उसे फ्रैक्चर हो गए। आरोपियों ने अन्य ग्रामीणों को इस हमले के बारे में बताया, जिसके बाद कुत्ते की देखभालकर्ता ने उसे खोजना शुरू किया। कुत्ते को अंततः डीडीपीएस स्कूल के पास घायल पड़ा पाया गया और उसे तुरंत इलाज के लिए एक निजी पशु चिकित्सा सुविधा में ले जाया गया, जहाँ उसकी सर्जरी हुई। PETA इंडिया के समन्वय से, श्रीमती सिसौदिया ने गभाना पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद बबलू जाटव और पप्पू जाटव के खिलाफ कुत्ते को अपंग करने के आरोप में FIR दर्ज की गई। बाद में एक सरकारी पशु चिकित्सक ने पशु की चिकित्सकीय जाँच की । कुत्ता वर्तमान में ठीक हो रहा है और उसे ऑपरेशन के बाद की देखभाल मिल रही है।

हाल ही में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 325 और पशु क्रूरता निवारण (PCA) अधिनियम, 1960 की धारा 11 के तहत एक FIR दर्ज की गई थी। BNS, 2023 की धारा 325 किसी भी पशु की हत्या, जहर देने, अपंग करने या उसे बेकार करने से संबंधित शरारत को एक संज्ञेय अपराध मानती है और इसमें पाँच साल तक की कारावास, या जुर्माना, या दोनों का दंड निर्धारित है।

PETA इंडिया की सिफारिश है कि पशुओं के साथ दुर्व्यवहार करने वालों का मनोचिकित्सकीय मूल्यांकन किया जाए और उन्हें परामर्श प्रदान किया जाए, क्योंकि पशुओं के साथ क्रूरता करना गहरे मनोवैज्ञानिक विकार का संकेत हो सकता है। शोध से पता चलता है कि पशुओं के प्रति क्रूरता करने वाले लोग अक्सर बार-बार अपराध करने वाले होते हैं और बाद में अन्य पशुओं तथा मनुष्यों को भी नुकसान पहुंचाने लगते हैं। फॉरेंसिक रिसर्च एंड क्रिमिनोलॉजी इंटरनेशनल जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में कहा गया है, “जो लोग पशुओं के प्रति क्रूरता करते हैं, उनके द्वारा हत्या, बलात्कार, डकैती, हमला, उत्पीड़न, धमकी और मादक पदार्थों के दुरुपयोग सहित अन्य अपराध करने की संभावना [तीन] गुना अधिक होती है।”

PETA इंडिया मबे समय से PCA अधिनियम, 1960 को मजबूत करने के लिए अभियान चला रहा है, जिसमें पुराने, अपर्याप्त दंड शामिल हैं, जैसे कि पहली बार दोषी पाए जाने वाले अपराधियों के लिए अधिकतम केवल 50 रुपये का जुर्माना (हालांकि BNS, 2023 में कड़े दंड निर्धारित हैं)। केंद्रीय सरकार को PCA अधिनियम में संशोधन के संबंध में भेजे गए एक प्रस्ताव में, PETA इंडिया ने पशुओं के प्रति क्रूरता के लिए दंड में उल्लेखनीय वृद्धि की सिफारिश की है।

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