PETA इंडिया और श्रीमती मेनका गांधी के हस्तक्षेप के बाद घोड़ों के अवैध इस्तेमाल के मामलों में मुंबई पुलिस ने तीन FIR दर्ज की

Posted on by Erika Goyal

पशुओं की सुरक्षा के मद्देनजर, मुंबई पुलिस ने हाल ही में घोड़ों के अवैध उपयोग से जुड़े तीन अलग-अलग मामलों में FIR दर्ज की है। इनमें से एक मामला गमदेवी में बॉम्बे हाईकोर्ट के प्रतिबंध का उल्लंघन करते हुए एक घोड़ा-गाड़ी चालक के खिलाफ दर्ज किया गया है, जबकि दो अन्य FIR गोराई बीच पर अवैध रूप से आयोजित घुड़दौड़ के आयोजकों के खिलाफ की गई हैं। ये कार्रवाई PETA इंडिया और पूर्व केंद्रीय मंत्री श्रीमती मेनका गांधी के हस्तक्षेप के बाद की गई है।

एक सतर्क नागरिक से घोड़ा-गाड़ी के अवैध संचालन का वीडियो प्राप्त होने के बाद, पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (PETA) इंडिया ने तत्काल कार्रवाई की। संगठन की शिकायत पर गमदेवी पुलिस ने 31 मई को चालक और संभावित मालिक के खिलाफ FIR दर्ज की। माननीय बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा 8 जून 2015 को Animals and Birds Charitable Trust बनाम MCGM एवं अन्य (PIL संख्या 36/2011) मामले में दिए गए आदेश के तहत ऐसे घोड़ा-गाड़ी संचालन पर स्पष्ट रूप से प्रतिबंध लगाया गया है। PETA इंडिया इस मामले में हस्तक्षेपकर्ता (intervenor) के रूप में शामिल है। यह घोड़ा-गाड़ी गमदेवी स्थित NS पटकर मार्ग पर चलते हुए देखी गई थी।

यह FIR ‘पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960’ की धारा 3 और 11 तथा ‘भारतीय न्याय संहिता, 2023’ की धारा 223 के अंतर्गत दर्ज की गई है। फिलहाल पुलिस घोड़े और उसके मालिक की पहचान कर उनकी तलाश में जुटी है। घोड़े का पता चलने पर, उसे कानूनी प्रावधानों और माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा जनहित याचिका संख्या 36/2011 में जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार जब्त किया जाएगा। इसी सिलसिले में, कोलाबा पुलिस ने भी मई की शुरुआत में एक अन्य अवैध रूप से संचालित घोड़ा-गाड़ी के चालक और मालिक के खिलाफ FIR दर्ज की है।

इसी बीच एक अलग घटना में, 27 मई को गोराई बीच पर अवैध रूप से आयोजित की गई घुड़दौड़ को लेकर 31 मई को गोराई पुलिस ने संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ FIR दर्ज की। यह कार्रवाई श्रीमती मेनका गांधी और PETA इंडिया के त्वरित हस्तक्षेप के बाद संभव हो सकी। संबंधित FIR में पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 11 तथा भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 291 के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया है, जो न सिर्फ पशुओं के प्रति अमानवीय व्यवहार बल्कि जनसुरक्षा को खतरे में डालने वाली लापरवाही को भी दंडनीय अपराध मानते हैं।

गोराई बीच पर यह पहली घटना नहीं थी जहां पशु कल्याण को लेकर गंभीर लापरवाही देखने को मिली हो। 20 मार्च को आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान, आयोजकों ने मुंबई उपनगरीय जिला कलेक्टर द्वारा केवल बैलगाड़ी दौड़ की दी गई स्पष्ट अनुमति को दरकिनार करते हुए अवैध रूप से घोड़ा-गाड़ी दौड़ भी शामिल कर दी। दिशा-निर्देशों की इस खुली अवहेलना के बाद, PETA इंडिया द्वारा की गई शिकायत पर गोराई पुलिस ने अप्रैल में संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ FIR दर्ज की। यह कार्रवाई पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 3 और भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 223 के तहत की गई है।

PETA इंडिया, विशेष रूप से गमदेवी पुलिस स्टेशन और मुंबई पुलिस आयुक्त श्री देवेन्द्र भारती, IPS द्वारा गोराई पुलिस स्टेशन को माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय के निर्देशों को सख्ती से लागू करने हेतु दिए गए निर्देशों की सराहना करता है। इस कार्रवाई से यह स्पष्ट संदेश गया है कि रेसिंग या गाड़ी खींचने के लिए घोड़ों का अवैध उपयोग किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। हम मुंबई पुलिस से आग्रह करते हैं कि वे शहर में घोड़ा-गाड़ियों के किसी भी अवैध उपयोग के विरुद्ध लगातार कार्रवाई जारी रखें और बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) से भी अनुरोध करते हैं कि वह मुंबई में बिना लाइसेंस के अस्तबलों में अवैध रूप से रखे जा रहे घोड़ों के विरुद्ध त्वरित और ठोस कार्रवाई सुनिश्चित करे।

PETA इंडिया ने अपनी शिकायत में यह तथ्य उजागर किया कि माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय ने 8 जून 2015 को पारित अपने निर्णय में न केवल मुंबई में सवारी के लिए विक्टोरिया घोड़ा-गाड़ियों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया था, बल्कि यह भी स्पष्ट रूप से घोषित किया था कि मुंबई नगर निगम अधिनियम, 1888 के तहत लाइसेंस प्राप्त अस्तबलों की अनुपस्थिति को देखते हुए शहर में घोड़ों को रखना भी अवैध है। न्यायालय ने अपने निर्देश में बृहन्मुंबई महानगरपालिका (MCGM) को ऐसे सभी अस्तबलों को बंद करने का आदेश दिया था और मुंबई पुलिस को यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देशित किया था कि इस प्रतिबंध को लागू किया जाए तथा उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध उचित कार्रवाई की जाए।

जुलाई 2017 में, बॉम्बे उच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र सरकार द्वारा प्रस्तुत उस पुनर्वास योजना को स्वीकृति दी थी, जिसके तहत घोड़ा-गाड़ी मालिकों और चालकों को मुआवज़ा और/या विक्रेता लाइसेंस प्रदान किया जाना प्रस्तावित था, ताकि न केवल घोड़ों को मुंबई की सड़कों से हटाया जा सके, बल्कि चालकों की आजीविका भी सुरक्षित रह सके। मई 2018 में, PETA इंडिया ने महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्य सचिव को पत्र लिखकर आग्रह किया था कि इस योजना को शीघ्र लागू किया जाए और राज्य सरकार द्वारा स्वीकृत फंड बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) को समय पर उपलब्ध कराया जाए, ताकि कार्यान्वयन में कोई बाधा उत्पन्न न हो। इसके पश्चात, कई घोड़ा-गाड़ी चालकों ने धीरे-धीरे हेरिटेज स्टाइल मोटर चालित ई-कारों को अपनाना शुरू कर दिया।

 

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