महादेवी (माधुरी) की सच्ची कहानी: ज़ंजीरों से आज़ादी तक 33 साल का संघर्ष
33 वर्षों तक महादेवी (माधुरी) एक ही कंक्रीट के स्लैब पर खड़ी रही और एक ही रास्ते पर चलती रही – ज़ंजीरों में जकड़ी हुई, अंकुश (लोहे की नुकीली छड़) जैसे हथियारों से नियंत्रित की जाती रही और कभी-कभी तेज़ शोर-शराबे वाली शोभा यात्राओं में उसकी कमर पर कसकर रस्सियाँ बांधकर घुमाया जाता।
जब हम स्कूल, कॉलेज, या शादी-ब्याह जैसे जीवन के पड़ाव पार कर रहे थे और आज़ादी से जीवन जी रहे थे, तब वह कोल्हापुर के नंदनी गाँव स्थित स्वस्तिश्री जिनसेन भट्टारक पट्टाचार्य महास्वामी संस्थान (जैन मठ) में अकेलेपन में कैद थी — और अपने ही जैसे अन्य हाथियों से कभी मिल भी नहीं पाई।
- अब महादेवी वनतारा के राधे कृष्ण मंदिर हाथी कल्याण ट्रस्ट में स्वतंत्र है – अब वह जान सकती है कि हाथी होना वास्तव में क्या होता है – ज़मीन को अपने पैरों के नीचे महसूस करना, बिना ज़ंजीरों के चलना, घूमना-फिरना, दोस्त बनाना और मानसिक व शारीरिक रूप से ठीक होना।
ऐसे बीता उसका जीवन:
2. उसे अंकुश जैसे क्रूर हथियारों से नियंत्रित किया जाता था और गाँव में उससे भीख मंगवाई जाती थी।
3. 2017 में, वर्षों की अकेली, क्रूर और निराशाजनक ज़िंदगी से परेशान होकर, महादेवी ने जैन मठ के प्रमुख पुजारी पर घातक हमला कर दिया। ऐसे मामले असामान्य नहीं हैं — जो हाथी अमानवीय और अप्राकृतिक परिस्थितियों में रखे जाते हैं, वे अक्सर मानसिक आघात और हताशा के चलते हिंसक प्रतिक्रिया देते हैं।
4. इसके बावजूद, महादेवी का इस्तेमाल बच्चों को सूंड में लपेटकर पैसे कमाने के लिए किया गया।
5. स्वामीजी की मृत्यु के बाद, मठ के ट्रस्टियों और पूर्व सांसद श्री राजू शेट्टी ने वन विभाग से आग्रह किया कि महादेवी को ज़ू में भेज दिया जाए!
6. 2020 में श्री राजू शेट्टी ने PETA इंडिया के प्रतिनिधियों से मुलाक़ात की और हाथी महादेवी के पुनर्वास का समर्थन किया।
7. 2012 से 2023 के बीच जैन मठ ने महादेवी को कम से कम 13 बार राज्य की सीमाओं को पार कराते हुए ग़ैरकानूनी रूप से शोभा यात्राओं में ले जाया। तब तक मठ को यह समझ आ चुका था कि उसे किराये पर देकर पैसे कमाए जा सकते हैं – और उसकी पीड़ा को भुनाया गया।
8. 2022-2023 में उसे मुहर्रम की शोभा यात्रा में शामिल कराने के लिए तेलंगाना ले जाया गया।
9. 30 जुलाई 2023 को तेलंगाना वन विभाग ने वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धारा 48A का उल्लंघन करने पर महादेवी को महाराष्ट्र से तेलंगाना ले जाने के ग़ैरकानूनी परिवहन के लिए जब्त कर लिया। उसकी कस्टडी महाराष्ट्र वन विभाग को सौंप दी गई। तब से महादेवी मठ की नहीं, सरकार की जब्त संपत्ति रही है।
10. 20 जून 2024 को महाराष्ट्र के मुख्य वन्यजीव वार्डन ने माननीय सुप्रीम कोर्ट की हाई पावर्ड कमिटी को हाथी महादेवी के पुनर्वास की सिफारिश की।
11. ज़ंजीरों में जीवन बिताने के कारण महादेवी को ग्रेड 4 गठिया, पैर सड़ जाना, अत्यधिक बढ़े हुए नाखून और थकी हुई एड़ियाँ जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएँ हो गई थीं।
12. महादेवी के पुनर्वास के आदेश के खिलाफ जैन मठ ने बॉम्बे हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में अपील की, लेकिन दोनों अदालतों ने उसे वनतारा के राधे कृष्ण मंदिर हाथी कल्याण ट्रस्ट में भेजने के निर्णय को बरकरार रखा।
13. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद, महादेवी को जैन मठ से निकालते समय गुंडों ने PETA इंडिया और पुनर्वास केंद्र के कर्मचारियों पर सैकड़ों पत्थर बरसाए। PETA इंडिया के एक कर्मचारी को पत्थर लगने से पसलियों में गंभीर चोट आई।
14. 30 जुलाई 2025 को, 33 वर्षों तक अकेले और शोभा यात्राओं में शामिल होने के बाद, हाथिनी महादेवी जामनगर स्थित वनतारा के राधे कृष्ण मंदिर हाथी कल्याण ट्रस्ट (RKTEWT) पहुँची। अब महादेवी ज़ंजीरों और हथियारों से मुक्त होकर अन्य हाथियों के साथ रह सकेगी। उसे विश्वस्तरीय पशु चिकित्सकों द्वारा विशेष उपचार मिलेगा – जिसमें गठिया के इलाज के लिए हाइड्रोथेरेपी जैसी सुविधाएँ शामिल हैं।
View this post on Instagram
15. PETA इंडिया और फेडरेशन ऑफ इंडियन एनिमल प्रोटेक्शन ऑर्गनाइज़ेशन्स (FIAPO) ने जैन मठ को एक-एक यांत्रिक हाथी प्रदान करने की पेशकश की है, ताकि जीवित हाथियों की जगह मंदिर के अनुष्ठानों में करुणामूलक विकल्प के रूप में इनका उपयोग किया जा सके। ये संगठन सभी मंदिरों से अपील करते हैं कि वे पशुओं की भलाई और इंसानों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जीवित हाथियों की जगह मानवीय यांत्रिक हाथियों को अपनाएं।
PETA इंडिया की महादेवी जैसी और भी हाथियों की मदद करने के प्रयासों में साथ दें – आज ही सदस्य बनें।














