स्वामी बाबा रामदेव पहली बार किसी शादी समारोह में प्रस्तुत किए गए मैकेनिकल हाथी को देखकर मंत्रमुग्ध
प्रसिद्ध योग गुरु स्वामी बाबा रामदेव हाल ही में बेंगलुरु में आयोजित एक विवाह समारोह में उपस्थित मैकेनिकल हाथी पद्मनाभम को देखकर मंत्रमुग्ध हो गए और उसकी सराहना की। यह पहली बार था जब किसी शादी में इस प्रकार के हाथी को इस्तेमाल किया गया। उन्होंने इसे “वास्तव में सुंदर, अनोखी एवं सोच समझकर बनाई गई मानव-निर्मित रचना बताया, जिसमें किसी भी जीव को कोई हानि नहीं पहुँचती और सभी रस्में सही ढंग से संपन्न होती हैं।”
PETA इंडिया ने वर-वधू, उर्वी और करण, नितिन अरोड़ा फोटोग्राफी तथा Wed FM इंडिया के साथ मिलकर काम किया। मैकेनिकल हाथी पद्मनाभम अपनी तरह का पहला असली जैसा दिखने वाला हाथी है, जिसे शादियों और मंदिर के जुलूसों में वास्तविक हाथियों की जगह इस्तेमाल करने के उद्देश्य से बनाया गया है।
उर्वी और करण ने अपनी शादी में मैकेनिकल हाथी का चयन करने पर कहा :
“हम अपने प्रेम का उत्सव सिर्फ एक‑दूसरे के लिए नहीं बल्कि सभी जीवित प्राणियों के लिए भी मना रहे हैं। इसलिए मैकेनिकल हाथी का उपयोग करना हमें सही विकल्प लगा। हमारी तरह हाथियों के भी परिवार होते हैं और वे अपने जंगल के घरों में साथ रहना चाहते हैं। यदि हमारा यह निर्णय किसी एक जोड़े को भी दयालु विकल्प चुनने के लिए प्रेरित कर सके, तो यह हमारे लिए बहुत मायने रखेगा।”
“मैं बहुत प्रसन्न हूँ कि हम अपनी बेटी की शादी में पशुओं के प्रति अपने प्रेम को प्रदर्शित कर सके और सकारात्मक बदलाव की प्रेरणा दे पाए।हमारे मेहमान इस असली जैसा दिखने वाले हाथी को देखकर बेहद खुश हुए और हमें आशा है कि यह अन्य परिवारों को भी अपने उत्सवों के लिए करुणामय विकल्प चुनने के लिए प्रेरित करेगा।” – दुल्हन के पिता दीपक हिरेमठ
“हमारे PETA इंडिया के साथ किए गए पॉडकास्ट ने पशुओं की पीड़ा और उन समाधानों को उजागर किया, जिनसे शादियाँ सभी के लिए आनंदमय बन सकती हैं। करुणामय शादियों का विचार लोगों को पसंद आया और इस शादी में मैकेनिकल हाथी का इस्तेमाल इस बात का प्रमाण है कि पशुओं के प्रति सम्मान और उत्सव साथ‑साथ चल सकते हैं।” – Wed FM इंडिया की संस्थापक शनाया अरोड़ा
“मेहमान,मैकेनिकल हाथी पद्मनाभम को देखकर बेहद उत्साहित और पूरी तरह चकित थे। कई लोगों को लगा कि यह एक असली हाथी है।यह एक मजबूत संदेश था कि नैतिक फैसले भी यादगार पल रच सकते हैं। मैकेनिकल हाथी, एक गरिमामय और ज़िम्मेदार विकल्प हैं, जिन्हें इस उद्योग को अपनाना चाहिए।” – नितिन अरोड़ा फ़ोटोग्राफ़ी के संस्थापक नितिन अरोड़ा
हाथी बुद्धिमान, सक्रिय और सामाजिक वन्यजीव हैं। किन्तु कैद में उन्हें शादियों और अन्य आयोजनों में इस्तेमाल करने के लिए मारपीट, हथियारों और बल प्रयोग के द्वारा प्रशिक्षित किया जाता है। मंदिरों, जुलूसों, पर्यटकों की सवारी और शादियों में उपयोग किए जाने वाले अधिकांश कैद हाथी लंबे समय तक कंक्रीट पर जंजीरों से बाँधे रहने के कारण गंभीर पैरों की समस्याओं और घावों से पीड़ित रहते हैं। उन्हें पर्याप्त भोजन, पानी, पशु चिकित्सा देखभाल और प्राकृतिक जीवन से वंचित रखा जाता है। इन अमानवीय परिस्थितियों में कई हाथी गहरी निराशा और हताशा से आक्रामक हो जाते हैं, और कभी‑कभी अपने महावतों या अन्य मनुष्यों एवं जानवरों को मार डालते हैं। हेरिटेज एनिमल टास्क फोर्स द्वारा संकलित आँकड़ों के अनुसार, केवल केरल में ही 15 वर्षों की अवधि में कैद हाथियों ने 526 लोगों की जान ली।
मैकेनिकल हाथी तीन मीटर ऊँचे होते हैं और उनका वज़न लगभग 500 किलोग्राम होता है। इन्हें केरल के स्थानीय कारीगरों ने बनाया है। रबर, फ़ाइबर, धातु, जाली, फोम और स्टील से निर्मित ये हाथी पाँच मोटरों पर चलते हैं। एक यांत्रिक हाथी दिखने और महसूस करने में असली हाथी जैसा होता है और उसका उपयोग भी उसी तरह किया जा सकता है। यह सिर हिला सकता है, कान और आँखें हिला सकता है, पूँछ झटका सकता है, सूँड़ उठा सकता है और यहाँ तक कि पानी भी छिड़क सकता है। दूल्हा इस पर चढ़ सकता है और इसकी पीठ पर सीट भी लगाई जा सकती है। इसे बिजली से आसानी से चलाया जा सकता है, बस प्लग इन करें और उपयोग करें। इन्हें सड़कों पर ले जाया जा सकता है और पहियों पर लगे होने के कारण इन्हें रस्मों और जुलूसों के लिए आसानी से घुमाया और धकेला जा सकता है।



