PETA इंडिया के हस्तक्षेप के बाद, मिर्ज़ापुर में कुत्ते के छः नन्हें बच्चों को कुएँ में फेंककर मार देने के मामले में FIR दर्ज
सीसीटीवी फुटेज में रिकार्ड हुए एक भयावह मामले में, कुत्ते के छः नन्हें बच्चों को उनकी माँ के सामने एक-एक करके कुएँ में फेंककर बेरहमी से मार डाला गया। इस घटना के बाद PETA इंडिया द्वारा मिर्ज़ापुर पुलिस में कठोर कानूनी प्रावधानों के तहत एफआईआर दर्ज कराई गई।
25 जनवरी 2026 की रात, मिर्जापुर के चुनार क्षेत्र में एक व्यक्ति ने कथित रूप से कुत्ते के छः नन्हें बच्चों को उनकी माँ के सामने ही कुएँ में फेंक दिया। यह घटना आधी रात के आसपास हुई, जिसके परिणामस्वरूप उन बच्चों की मृत्यु हो गई। 1 फरवरी को चुनार थाने में शिकायत दर्ज कराई गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए PETA इंडिया ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के सहयोग से अपराधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। मिर्ज़ापुर के पुलिस अधीक्षक (SP) के हस्तक्षेप के बाद उप-अधीक्षक (DSP) चूनार को निर्देश दिए गए और इसके पश्चात चुनार थाने ने इस मामले में प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज की गई।
भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 325 और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम (PCA), 1960 की धारा 11 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। धारा 325, BNS 2023 के अनुसार किसी भी पशु को अपंग करना या उसकी हत्या करना संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है। इसके लिए पाँच वर्ष तक की कारावास, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। वहीं, PCA अधिनियम 1960 की धारा 11 उन सभी कृत्यों को अपराध मानती है जिनसे पशुओं को अनावश्यक पीड़ा या कष्ट होता है। इस धारा के तहत दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ जुर्माना और कारावास सहित दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
PETA इंडिया का सुझाव है कि पशुओं के साथ क्रूरता करने वालों का मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन किया जाए और उन्हें परामर्श (काउंसलिंग) दिया जाए, क्योंकि पशुओं को प्रताड़ित करना गहरी मानसिक अस्थिरता का संकेत है। अनुसंधान यह दर्शाता है कि जो लोग पशुओं के प्रति क्रूरता करते हैं, वे अक्सर बार-बार अपराध करते हैं और आगे चलकर अन्य पशुओं के साथ-साथ मनुष्यों को भी नुकसान पहुँचाने लगते हैं।फॉरेंसिक रिसर्च एंड क्रिमिनोलॉजी इंटरनेशनल जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में कहा गया, “जो लोग पशुओं पर क्रूरता करते हैं, उनमें हत्या, बलात्कार, लूट, हमला, उत्पीड़न, धमकी और नशीली दवाओं/मादक पदार्थों के दुरुपयोग जैसे अपराध करने की संभावना [तीन] गुना अधिक होती हैं।”
PETA इंडिया अनुसार सामुदायिक कुत्ते अक्सर क्रूरता का शिकार होते हैं, गाड़ियों से टकरा जाते हैं तथा भूख, बीमारी या चोट से पीड़ित रहते हैं। हर साल बड़ी संख्या में ऐसे कुत्ते पशु आश्रयों में पहुँच जाते हैं, जहाँ अच्छे घर न मिलने के कारण वे पिंजरों या केनेल में लंबे समय तक कैद रहते हैं। इसका समाधान सीधा है: नसबंदी और सड़कों या आश्रय घरों इन कुत्तों को गोद लेना। एक मादा कुत्ते की नसबंदी करने से छह वर्षों में लगभग 67,000 जन्म रोके जा सकते हैं, जबकि एक मादा बिल्ली की नसबंदी सात वर्षों में लगभग 4,20,000 जन्मों को रोक सकती है।
पशुओं के प्रति क्रूरता अक्सर हिंसक व्यवहार का चेतावनी संकेत होती है, और इस मामले में कुत्ते के छह बच्चों की जानबूझकर हत्या जीवन के प्रति बेहद चिंताजनक उपेक्षा को दर्शाती है। ऐसे कृत्यों को आगे होने वाले नुकसान से बचाने के लिए गंभीरता से लिया जाना चाहिए। सभी की सुरक्षा के लिए यह आवश्यक है कि आमजन इस तरह की पशु क्रूरता की घटनाओं की तुरंत पुलिस को सूचना दें।
