गायिका श्रेया घोषाल, PETA इंडिया और CUPA ने श्री तरलाबालु जगद्गुरु बृहन्मठ, सिरीगेरे को मेकेनिकल हाथी उपहार स्वरूप दिया ! भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विधायक श्री बी. वाय. विजयेंद्र द्वारा अनावरण

Posted on by Surjeet Singh

सुप्रसिद्ध गायिका श्रेया घोषाल, PETA इंडिया और कम्पैशन अनलिमिटेड प्लस एक्शन (CUPA) द्वारा उपहार स्वरूप दिए गए एक विशालकाय आकार के मेकेनिकल हाथी जिसका नाम शिव कुंजर है, का आधिकारिक रूप से श्री तरलाबालु जगद्गुरु बृहन्मठ में उद्घाटन किया गया। इस मेकेनिकल हाथी का अनावरण भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और शिकारपुरा के विधायक श्री बी. वाय. विजयेंद्र ने किया। इस अवसर पर सांसद डॉ. प्रभा मल्लिकार्जुन, हरिहर के विधायक श्री बी. पी. हरीश, पूर्व सांसद श्री जी. एम. सिद्देश्वर और कुवेम्पु विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. शरथ अनंतमूर्ति भी उपस्थित रहे। उद्घाटन समारोह के बाद एक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया।

यह नया यांत्रिक हाथी, शिव कुंजरा, मंदिरों को PETA इंडिया द्वारा दान किया गया चौदहवाँ ऐतिहासिक रोबोट है, और कर्नाटक में यह छठा है।

पूर्व में इस मठ के पास भवानी और गौरी नामक दो जीवित हाथी थे, जिनका निधन स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण हो गया था। मठ द्वारा आगे कभी भी जीवित हाथियों को न पालने या किराए पर न लेने का जो संवेदनशील निर्णय लिया गया, उसके सम्मानस्वरूप यह मेकेनिकल हाथी उपहार स्वरूप दिया गया। यह भेंट श्रृमद उज्जयिनी सद्धर्म सिंहासनाधीश श्री तरलाबालु जगद्गुरु श्री 1108 लिंगैक्य श्री शिवकुमार शिवाचार्य महास्वामीजी की 34वीं श्रद्धांजलि के अवसर पर दी गई। शिव कुंजर का उपयोग मंदिर में आयोजनों को सुरक्षित और क्रूरता-मुक्त तरीके से संपन्न करने में किया जाएगा, जिससे असली हाथी जंगल में अपने परिवारों के साथ रह सकें। PETA इंडिया ने कर्नाटक में अब तक पाँच मेकेनिकल हाथी दान किए हैं, जिनमें मुझराई विभाग द्वारा प्रशासित येदियूर श्री सिद्धलिंगेश्वर स्वामी मंदिर में दिए गए हाथी सहित चार CUPA के सहयोग से दान दिए गए हैं।

“PETA इंडिया और CUPA के साथ मिलकर शिव कुंजर को श्री तरलाबालु जगद्गुरु बृहन्मठ को मेकेनिकल हाथी भेंट कर मुझे अत्यंत खुशी हो रही है। इस तरह की पहल भक्ति और पशुओं के जीवन के बीच बेहतर सामंजस्य लाती है। मैं ऐसा भविष्य देखती हूँ जहाँ हाथी ज़ंजीरों में बंधे न होकर स्वतंत्र रूप से विचरण करें, और दूसरी ओर हमारी परंपराएं करुणा समग्र समझ के साथ आगे बढ़ें।”- श्रेया घोषाल 

इस अवसर पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और शिकारपुरा के विधायक श्री बी. वाय. विजयेंद्र ने कहा: “श्री तरलाबालु जगद्गुरु बृहन्मठ में इस यांत्रिक हाथी का उद्घाटन एक ऐतिहासिक क्षण है, जो परंपरा और करुणा को एक साथ जोड़ता है। कर्नाटक हमेशा से प्रगतिशील मूल्यों की भूमि रहा है, और यह कदम सुनिश्चित करता है कि हमारी सांस्कृतिक परंपराएं जीवित रहें, साथ ही जंगल में रहने वाले हाथियों की रक्षा भी हो। मैं मठ, गायिका श्रेया घोषाल, PETA इंडिया और CUPA को इस प्रेरणादायक उदाहरण के लिए बधाई देता हूँ, जो दर्शाता है कि भक्ति और दया दोनों एक साथ किए जा सकते हैं। ”

 

श्री तरलाबालु जगद्गुरु श्री 1108 डॉ. शिवमूर्ति शिवाचार्य महास्वामीजी ने कहा: “श्रीमद उज्जयिनी सद्धर्म सिंहासनाधीश्वर श्री तरलाबालु जगद्गुरु श्री 1108 लिंगैक्य श्री शिवकुमार शिवाचार्य महास्वामीजी की 34वीं वर्ष की श्रद्धांजलि के उपलक्ष्य में, श्री तरलाबालु जगद्गुरु बृहन्मठ की ओर से, मैं इस मेकेनिकल हाथी ‘शिव कुंजर’ का हमारे पवित्र आयोजनों में स्वागत करते हुए स्वयं को सम्मानित महसूस कर रहा हूँ। यह उपहार हमें हमारी समृद्ध परंपराओं को बनाए रखते हुए हाथियों के प्रति करुणा दिखाने का अवसर देता है। हमारा विश्वास हमें यह सीख देता है कि सच्ची भक्ति दया में निहित होती है, और शिव कुंजर के नेतृत्व में हमारी शोभायात्राएं सच्चे भक्ति और दया की भावना को प्रतिबिंबित करेंगी।”

 

हाथी अत्यंत बुद्धिमान, सक्रिय और सामाजिक वन्य पशु होते हैं। लेकिन बंदी बनाए जाने पर उन्हें जुलूसों व अन्य गतिविधियों में इस्तेमाल करने के लिए पीटा जाता है और हथियारों के डर और मारपीट से प्रशिक्षित किया जाता है। मंदिरों और अन्य स्थानों पर कैद में रखे गए कई हाथी कंक्रीट पर घंटों जंजीर में बंधे रहने के कारण दर्दनाक पाँव और पैर की बीमारियों से ग्रस्त रहते हैं। अधिकांश को पर्याप्त भोजन, पानी, पशु-चिकित्सीय देखभाल और प्राकृतिक जीवन का कोई अनुभव नहीं मिल पाता। इन अमानवीय परिस्थितियों में, कई हाथी बेहद तनावग्रस्त हो जाते हैं और कभी-कभी अपने महावत या अन्य इंसानों पर हमला कर देते हैं। हेरिटेज एनिमल टास्क फोर्स द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार, केरल में 15 वर्षों की अवधि में कैद में रखे गए हाथियों ने 526 लोगों की जान ली। लगभग 40 वर्षों से बंदी बनाए गए हाथी थिचिकोट्टुकावु रामचंद्रन, जो केरल के त्योहारों में सबसे अधिक इस्तेमाल किए जाने वाले हाथियों में से एक है, के द्वारा 13 व्यक्तियों की मौत की रिपोर्ट है जिनमें छह महावत, चार महिलाएं और तीन अन्य हाथी शामिल हैं।

PETA इंडिया ने 2023 की शुरुआत में मंदिरों में जीवित हाथियों के स्थान पर यांत्रिक हाथियों के उपयोग की करुणामय पहल शुरू की। अब दक्षिण भारत के मंदिरों में कम से कम उन्नीस मेकेनिकल हाथियों का उपयोग किया जा रहा है। PETA इंडिया अब तक तेरह मेकेनिकल हाथियों के दान में सहयोग कर चुका है जो उन मंदिरों को दिए गए हैं जिन्होंने जीवित हाथी न पालने या न किराए पर लेने का संकल्प लिया है।

यांत्रिक हाथी लगभग 3 मीटर ऊँचे और 800 किलोग्राम वज़न वाले होते हैं। ये रबर, फाइबर, धातु, जाल, फोम और स्टील से बने होते हैं और पाँच मोटरों से चलते हैं। एक यांत्रिक हाथी दिखने, महसूस होने और उपयोग में एक असली हाथी की तरह ही होता है। यह सिर हिला सकता है, कान और आँखें चला सकता है, पूंछ लहरा सकता है, सूँड़ उठा सकता है और पानी भी छिड़क सकता है। इस पर चढ़ा जा सकता है और पीठ पर सीट भी लगाई जा सकती है। इसे बिजली से चालू कर आसानी से चलाया जा सकता है। यह पहियों के आधार पर चलता है, जिससे इसे गलियों में ले जाया जा सकता है और शोभायात्राओं व रस्मों में प्रयोग किया जा सकता है।

श्री तरलाबालु जगद्गुरु बृहन्मठ, सिरीगेरे एक सदियों पुराना आध्यात्मिक और सामाजिक संस्थान है, जिसकी जड़ें बसवन्ना और श्री मरुलासिद्ध की शिक्षाओं में निहित हैं। परमहंस श्री 1108 डॉ. शिवमूर्ति शिवाचार्य महास्वामीजी के नेतृत्व में यह मठ करुणा, समानता और शिक्षा जैसे प्रगतिशील मूल्यों के लिए प्रसिद्ध है। यह मठ कर्नाटक भर में 275 से अधिक शैक्षणिक संस्थानों का संचालन करता है और लंबे समय से सामाजिक सुधारों और नैतिक आचरण का समर्थन करता आ रहा है।

हाथियों को प्रदर्शनों में इस्तेमाल न करें