सिद्धिपेट: PETA इंडिया और SAFI हैदराबाद के हस्तक्षेप के बाद दांतों और हाथों से ही बकरी की बलि देने वाले व्यक्ति के खिलाफ FIR दर्ज
सिद्धिपेट ज़िले के नारायणरावपेट मंडल के जक्कापुर गांव में एक व्यक्ति द्वारा बकरी को दांतों से पकड़कर और हाथों से ही नोच-नोचकर बेरहमी से मारने की घटना का एक भयावह वीडियो सामने आने के बाद, PETA इंडिया और स्ट्रे एनिमल फाउंडेशन ऑफ इंडिया (SAFI), हैदराबाद के समन्वय से चिन्नाकोडुर पुलिस थाने में प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज कराई गई है। यह कृत्य खुलेआम, लोगों की मौजूदगी में किया गया और सोशल मीडिया पर प्रचार के उद्देश्य से रिकॉर्ड किया गया। बताया गया है कि यह घटना कथित रूप से एक पशु बलि अनुष्ठान के रूप में अंजाम दी गई।
FIR दर्ज कराने की प्रक्रिया में SAFI, हैदराबाद के क्रूरता निवारण प्रबंधक श्री अदुलापुरम गौतम द्वारा की गई औपचारिक शिकायत के बाद, PETA इंडिया ने सिद्धिपेट के पुलिस आयुक्त डॉ. बी अनुराधा, IPS के साथ समन्वय किया। वीडियो में दिख रहे मुख्य आरोपी के विरुद्ध FIR भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 325; तेलंगाना पशु एवं पक्षी बलि निषेध अधिनियम (TABSPA), 1950 की धारा 6; तथा पशु क्रूरता निवारण अधिनियम (PCA), 1960 की धारा 11(1)(a) और 11(1)(i) के अंतर्गत दर्ज की गई है।
BNS, 2023 की धारा 325 के तहत किसी भी पशु को घायल करना या मारना एक संज्ञेय अपराध है, जिसमें पांच वर्ष तक की सज़ा, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। TABSPA, 1950 की धारा 6 के अनुसार, कोई भी व्यक्ति यदि अपने कब्ज़े या नियंत्रण वाले स्थान पर बलि होने देता है, या किसी बलि में भाग लेता है, उसे अंजाम देता है या उसका संचालन करता है, तो वह दंडनीय अपराध करता है। PCA अधिनियम, 1960 की धारा 11 के तहत किसी भी पशु को अनावश्यक पीड़ा या कष्ट देना कानूनन अपराध है।
PETA इंडिया सिद्धिपेट की पुलिस आयुक्त डॉ. बी अनुराधा, IPS द्वारा तत्काल कार्रवाई करते हुए FIR दर्ज कराने के निर्देश देने के लिए उनका आभार व्यक्त करता है। यह स्पष्ट संदेश देता है कि पशुओं के प्रति क्रूरता किसी भी रूप में स्वीकार नहीं की जाएगी।
पशु बलि न केवल निर्दयता है, बल्कि समाज के लिए भी एक गंभीर खतरा है। यह हिंसा के प्रति सार्वजनिक संवेदनशीलता को खत्म करती है और ऐसी पुरानी सोच को बढ़ावा देती है जो सामाजिक प्रगति में बाधा डालती है। जिस प्रकार मानव बलि को अब हत्या माना जाता है, उसी प्रकार आज जब भारत अंतरिक्ष मिशनों में अग्रसर है, पशु बलि जैसी प्रथाओं का अंत होना ज़रूरी है।
सुप्रीम कोर्ट का निर्देश है कि पशुओं का वध केवल लाइसेंस प्राप्त बूचड़खानों में ही किया जा सकता है और स्थानीय प्रशासन को इसका पालन सुनिश्चित करना चाहिए। पशु क्रूरता निवारण (बूचड़खाना) नियम, 2001 और खाद्य सुरक्षा और मानक (खाद्य व्यवसायों का लाइसेंस और पंजीकरण) विनियम, 2011 के तहत केवल उन्हीं बूचड़खानों में वध की अनुमति है जो प्रजाति-विशेष को बेहोश करने वाले उपकरणों से लैस हों।
गुजरात, केरल, पुडुचेरी और राजस्थान जैसे राज्यों में मंदिरों या उनके परिसर में धार्मिक पशु बलि पर स्पष्ट प्रतिबंध है। वहीं, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना में किसी भी सार्वजनिक धार्मिक स्थल, सभा या जुलूस में पशु बलि पर रोक है।
