कश्मीर में ईद की कुर्बानी हेतु बेचे जा रहे सात ऊँटों को बचाया गया
ईद से पहले, कुर्बानी के लिए सात ऊँटों को बेचे जाने का एक वीडियो फेसबुक पर सामने आने के बाद सेव ऐनिमल्स वैल्यू एनवायरनमेंट (SAVE) की देविंदर कौर मदान ने पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ ऐनिमल्स (PETA) इंडिया और स्थानीय प्रशासन को इसकी जानकारी दी, जिसके बाद इन पशुओं को बचाया जा सका। PETA इंडिया ने SAVE, ध्यान फाउंडेशन के अश्विनी गुरु जी और सुनालिका जम्वाल, और बारामुला ज़िला प्रशासन के साथ मिलकर तुरंत कार्रवाई करते हुए पशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की। सभी सात ऊँटों को सफलतापूर्वक अवैध कुर्बानी से बचा लिया गया है और अब उन्हें आजीवन देखभाल और पुनर्वास के लिए ध्यान फाउंडेशन को देखरेख हेतु सौंप दिया गया है।
प्रशासन की दया और तत्पर कार्रवाई से सात मासूम ऊँटों की ज़िंदगियाँ बच गईं। अब न तो वो कभी कुर्बानी का दर्द सहेंगे और न ही क्रूरता का शिकार बनेंगे। PETA इंडिया को उम्मीद है कि यह घटना समाज को यह सोचने पर मजबूर करेगी कि हर पशु जीने का हक़दार है, और हमें उन्हें खाने या कुर्बान करने की जगह उनकी रक्षा करनी चाहिए। हम बारामुला ज़िला प्रशासन के इस साहसिक कदम की दिल से सराहना करते हैं, जिसने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि पशुओं पर ज़ुल्म बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
खाद्य सुरक्षा और मानक (खाद्य उत्पाद मानक और खाद्य योजक) विनियम, 2011 के अनुसार केवल भेड़, सूअर, मवेशी, बकरी, मुर्गी, मछली और खरगोश को ही मांस हेतु वध की अनुमति है। ऊँटों की कुर्बानी देने की अनुमति नहीं है। इसके अलावा पशु क्रूरता निवारण (वधशाला) नियम, 2001 और खाद्य सुरक्षा और मानक (खाद्य व्यवसायों का लाइसेंसिंग और पंजीकरण) विनियम, 2011 के तहत मांस के लिए पशुओं का वध केवल पंजीकृत या लाइसेंस प्राप्त वधशालाओं में ही किया जा सकता है, जहाँ प्रजाति-विशेष के अनुरूप पशुओं को वध से पहले अचेत करने की विधियाँ उपलब्ध हों।
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