PETA इंडिया के हस्तक्षेप के बाद, रुड़की में अवैध रूप से स्थानांतरण के प्रयास के दौरान हमला कर सामुदायिक कुत्ते की हत्या करने के मामले में सात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज
राजेंद्र नगर क्षेत्र में कुत्तों को पकड़कर अवैध रूप से अन्यत्र ले जाने के प्रयास के दौरान पुरुषों के एक समूह द्वारा एक सामुदायिक कुत्ते को पीट-पीटकर मार डालने की भयावह घटना की जानकारी मिलने के बाद, PETA इंडिया ने स्थानीय पशु अधिकार कार्यकर्ताओं आरती शर्मा और आकाश भारद्वाज के साथ मिलकर यह सुनिश्चित किया कि इस मामले में तत्काल प्राथमिकी सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज की जाए।
यह घटना 20 मई को हुई। रिपोर्टों के अनुसार, पुरुषों के एक समूह ने इलाके से सामुदायिक कुत्तों को जबरन पकड़कर क्षेत्र से हटाने का प्रयास किया। चार कुत्तों को पकड़कर एक ई-रिक्शा में लाद दिया गया था और उन्हें ले जाया ही जा रहा था कि तभी स्थानीय देखभालकर्ताओं ने हस्तक्षेप किया। इनमें से एक कुत्ते की पकड़ने और दुर्व्यवहार के दौरान लगी चोटों के कारण मृत्यु हो गई। शेष तीन कुत्तों को अंततः बचा लिया गया और उनके देखभालकर्ताओं द्वारा सुरक्षित वापस लाया गया। वीडियो साक्ष्य और सुश्री शर्मा द्वारा प्रस्तुत शिकायत के आधार पर, गंगनाहर पुलिस थाने ने सात आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धारा 3(5) और 325 तथा पशुओं के प्रति क्रूरता निवारण (पीसीए) अधिनियम, 1960 की धारा 11(1)(l) के तहत एफआईआर दर्ज की। मृत कुत्ते के शव का पोस्टमॉर्टम कराया गया और मामले की जांच जारी है।
बीएनएस, 2023 की धारा 325 किसी भी पशु को विकलांग बनाने या उसकी हत्या करने को संज्ञेय अपराध की श्रेणी में रखती है और इसके लिए पाँच वर्ष तक के कारावास, या जुर्माना, या दोनों का प्रावधान करती है। कई व्यक्तियों द्वारा समान मंशा के तहत अवैध रूप से पशुओं की हत्या करना बीएनएस 2023 की धारा 3(5) के अंतर्गत दंडनीय अपराध है। पीसीए अधिनियम, 1960 की धारा 11(1)(l) किसी भी पशु को विकृत करने या किसी भी पशु (जिसमें सामुदायिक कुत्ते भी शामिल हैं) की हत्या करने को भी संज्ञेय और दंडनीय अपराध बनाती है।
पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) नियम, 2023 के नियम 11(19) के अनुसार सामुदायिक कुत्तों को केवल नसबंदी और टीकाकरण के उद्देश्य से ही पकड़ा जा सकता है तथा सामुदायिक पशुओं को अन्यत्र स्थानांतरित करना अवैध है। नियम में कहा गया है, “कुत्तों को [नसबंदी के बाद] उसी स्थान या इलाके में छोड़ा जाएगा, जहां से उन्हें पकड़ा गया था।” माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने 22 अगस्त 2025 के अपने आदेश में एबीसी नियमों को बरकरार रखते हुए पुनः स्पष्ट किया कि एबीसी नियम, 2023 के तहत निर्धारित आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन करने के बाद कुत्तों को उनके मूल क्षेत्र में वापस छोड़ा जाना चाहिए।
PETA इंडिया की सिफारिश है कि पशुओं के साथ दुर्व्यवहार करने वालों का मनोचिकित्सकीय मूल्यांकन किया जाए और उन्हें परामर्श प्रदान किया जाए, क्योंकि पशुओं के साथ क्रूरता करना गहरे मनोवैज्ञानिक विकार का संकेत हो सकता है। शोध से पता चलता है कि पशुओं के प्रति क्रूरता करने वाले लोग अक्सर बार-बार अपराध करने वाले होते हैं और बाद में अन्य पशुओं तथा मनुष्यों को भी नुकसान पहुंचाने लगते हैं। फॉरेंसिक रिसर्च एंड क्रिमिनोलॉजी इंटरनेशनल जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में कहा गया है, “जो लोग पशुओं के प्रति क्रूरता करते हैं, उनके द्वारा हत्या, बलात्कार, डकैती, हमला, उत्पीड़न, धमकी और मादक पदार्थों के दुरुपयोग सहित अन्य अपराध करने की संभावना [तीन] गुना अधिक होती है।”
सामुदायिक कुत्ते अक्सर क्रूरता का शिकार होते हैं या वाहनों की चपेट में आ जाते हैं तथा सामान्यतः भूख, बीमारी या चोट से पीड़ित रहते हैं। हर वर्ष, अनेक कुत्ते पशु आश्रय गृहों में पहुंच जाते हैं, जहां पर्याप्त अच्छे घर न मिलने के कारण वे पिंजरों या केनेल में लंबे समय तक पड़े रहते हैं। इसका समाधान सरल है: नसबंदी और सड़कों या आश्रय गृहों से गोद लेना। एक मादा कुत्ते की नसबंदी छह वर्षों में 67,000 जन्मों को रोक सकती है, और एक मादा बिल्ली की नसबंदी सात वर्षों में 4,20,000 जन्मों को रोक सकती है।
PETA इंडिया स्थानीय नगर निकायों से आग्रह करते हैं कि वे मानव-पशु संघर्ष को कम करने के लिए कानून के अनुसार मानवीय पशु जन्म नियंत्रण कार्यक्रम को शीघ्र लागू करें, और हम जनता से भी ऐसे पशु क्रूरता के मामलों की रिपोर्ट करने का आग्रह करते हैं।
सामुदायिक और साथी पशुओं की नसबंदी कराने का संकल्प लें
पशुओं पर क्रूरता की हमेशा रिपोर्ट करें
