सुप्रीम कोर्ट के सामुदायिक पशुओं को हटाने के आदेश के विरोध में, ‘नेशनल डे ऑफ एक्शन’ के अवसर पर कुत्ते और गाय के मुखौटे पहने स्कूली बच्चे PETA इंडिया के प्रदर्शन का नेतृत्व करेंगे

Posted on by Surjeet Singh

मुंबई- सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्देश जिसमें राजमार्गों से गायों और भैंसों तथा कॉलेजों, बस स्टॉप आदि से सामुदायिक कुत्तों को हटाने का आदेश दिया गया है, के उपरांत ‘नेशनल डे ऑफ एक्शन’ के अवसर पर लोरेटो हाउस स्कूल, कोलकाता तथा द मॉडर्न स्कूल, गिरगांव मुंबई के छात्रों ने PETA इंडिया के साथ मिलकर सामुदायिक कुत्तों और गायों के मुखौटे एवं पोशाक पहने प्रदर्शन में भाग लिया। उनके हाथ में ‘कुत्ते और गाय भी मुंबईकर एवं कोलकाता निवासी हैं’ के संदेश लिखे बोर्ड थे। इस प्रदर्शन के माध्यम से यह समस्त छात्र दयालुता को बढ़ावा देने और सुप्रीम कोर्ट से पशुओं को हटाने के उनके निर्देश को वापस लेने की अपील करी। समुदाय को यह संदेश देने के लिए कि सामुदायिक कुत्तों को इस समाज से पर्याप्त प्यार और देखभाल मिलती है और वे भी हमारे समुदाय का अभिन्न हिस्सा हैं, बच्चे चमकीले रंगों के ‘सेव देसी डॉग्स’ बैंडाना भी वितरित किए और स्थानीय कुत्तों के गले में भी बांधें। इसी दौरान, PETA इंडिया राहगीरों को स्वादिष्ट पौधों पर आधारित (वीगन) दूध भी वितरित किया।

लाखों पशुओं को उजाड़ना और कैद करना असंभव, गैरकानूनी और क्रूर है। कुत्तों की संख्या कम करने का एकमात्र समाधान, जिसे विज्ञान भी समर्थन देता है, नसबंदी, टीकाकरण और करुणा है। और चूंकि डेयरियों में नर बछड़ों को अक्सर इसलिए छोड़ दिया जाता है क्योंकि वे दूध नहीं दे सकते, और मादा पशु को उसका दूध उत्पादन कम होने पर त्याग दिया जाता है इसलिए PETA इंडिया बेघर पशुओं की समस्या को कम करने के दिशा में पहला कदम उठाने हेतु अवैध डेयरियों को बंद करने की भी मांग कर रहा है।

द मॉडर्न स्कूल की प्रिंसिपल डॉ. स्वाति शिराळकर एवं लोरेटो हाउस स्कूल की प्रिंसिपल श्रीमति प्रतिभा बागची  ने यह संदेश दिया:

 “हम अपने छात्रों को सिखाते हैं कि दया ही शक्ति है। आज वे अपने दोस्तों, पशुओं के समर्थन में खड़े हैं, जो इस समाज और इस दुनिया में हमारे साथी हैं”

लोरेटो हाउस स्कूल कोलकाता से PETA इंडिया के युवा समर्थक छात्र 

भारत में 6 करोड़ से अधिक कुत्ते और बिल्लियाँ सड़कों पर जीवन यापन करते हैं, 88 लाख पहले से ही भीड़भाड़ वाले शेल्टरों में बदतर स्थिति में हैं, और 50 लाख से अधिक मवेशी बेघर हैं, जिनमें से अधिकांश को डेयरी उद्योग तब छोड़ देता है जब वे लाभदायक नहीं रहते। जो शेल्टर अभी बनें ही नहीं हैं, उनमें इन पशुओं को बंद करने का विचार या बस डिपो और रेलवे स्टेशनों के चारों ओर दीवारें बनाकर कुत्तों को बाहर रखने की कोशिश न केवल अव्यवहारिक है बल्कि एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) नियम, 2023 के तहत अवैध भी है, जो सामुदायिक कुत्तों के विस्थापन पर रोक लगाता है। इसी बीच, PETA इंडिया डेयरी क्रूरता को कम करने के लिए वीगन जीवनशैली अपनाने और न्यूनतम कदम के रूप में अवैध डेयरियों को बंद करने को प्रोत्साहित करता है।

PETA इंडिया राज्य सरकारों से यह भी अपील करता है कि वे बिना पंजीकरण वाली पालतू-पशुओं की बिक्री करने वाली दुकानों और प्रजनकों को बंद करें, जो पशुओं को वस्तुओं की तरह उन खरीदारों को बेचते हैं जो अक्सर बाद में उन्हें छोड़ देते हैं, जिससे आश्रयघरों में पशुओं की संख्या और बढ़ जाती है। इसके बजाय, PETA जनता से आग्रह करता है कि वे आश्रयों या सड़कों पर रहने वाले ज़रूरतमंद कुत्तों और बिल्लियों को गोद लें, अपने पालतू पशुओं  की नसबंदी कराएं, और सामुदायिक पशुओं के साथ दयालुता से व्यवहार करें।

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