मुंबई में कबूतरों को दाना डालने के लिए PETA इंडिया द्वारा सुझाए गए मानवीय और लाभकारी समाधान
PETA इंडिया ने महाराष्ट्र के माननीय मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर उनके इस आश्वासन की सराहना की है कि कबूतरखानों को अचानक बंद करना कोई समाधान नहीं है, और मुंबई में कबूतरों को दाना डालने के मुद्दे पर व्यावहारिक रास्ता निकालने के उनके आग्रह का स्वागत किया है। अपने पत्र में, PETA इंडिया ने एक मानवीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त प्रणाली – Pigeon Control Advisory Service (PiCAS) मॉडल की सिफारिश की है, जिसे एक “विन-विन” (दोनों पक्षों के लिए लाभकारी) समाधान के रूप में देखा जा रहा है। यह मॉडल कबूतरों की आबादी को नियंत्रित करने में मदद करेगा, साथ ही साथ उन्हें दाना डालने की परंपरा और करुणा को भी बनाए रखेगा।
अपने पत्र में, PETA इंडिया ने बताया कि कबूतरों से संबंधित स्वास्थ्य संबंधी डर के आँकड़े बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए गए हैं। मुंबई के तीन सबसे बड़े नगर निगम अस्पतालों से प्राप्त एक RTI जवाब के अनुसार, 2024 में श्वसन रोगों के कुल मामलों में से केवल 0.3% मामलों का संबंध कबूतरों के संपर्क से था। अंतरराष्ट्रीय शोध से भी यह सिद्ध होता है कि कबूतरों से मनुष्यों में बीमारियाँ फैलने का जोखिम बहुत ही कम होता है, यहाँ तक कि उन लोगों में भी जो उनके निकट और नियमित संपर्क में रहते हैं। वास्तव में, कबूतर प्राकृतिक रूप से बर्ड फ्लू के प्रति प्रतिरोधक होते हैं और इस कारण वे जूनोटिक बीमारियों के बड़े स्रोत नहीं माने जाते।
PETA इंडिया ने अपनी संस्थापक इंग्रिड न्यूकिर्क का बयान भी प्रस्तुत किया, जो कि वॉशिंगटन डीसी सरकार में जूनोटिक रोग नियंत्रण की पूर्व प्रमुख रही हैं। उन्होंने भी यह पुष्टि की कि कबूतरों से सामान्य संपर्क के माध्यम से बीमारी फैलने की संभावना अत्यंत दुर्लभ है। मुंबई की अपनी हाल की यात्रा के दौरान, श्रीमती न्यूकिर्क ने कबूतरों को दाना डालने की परंपरा को जारी रखने के लिए एक भावनात्मक वीडियो अपील भी जारी की।
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चिंताओं को संबोधित करते हुए, लेकिन कबूतरों और परंपरा की रक्षा करते हुए, PETA इंडिया ने सरकार को तीन अन्य व्यावहारिक सुझाव भी दिए हैं: कबूतरखानों पर निर्धारित समय और निर्धारित स्थानों पर दाना डालने की अनुमति देना, इन स्थानों पर नियमित सफाई और स्वच्छता सुनिश्चित करना, और बहुभाषी सूचना बोर्डों के माध्यम से लोगों को सही तरीके से दाना डालने और कबूतरों से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों की सही जानकारी देना।
PETA इंडिया द्वारा सुझाया गया PiCAS मॉडल पहले ही कई यूरोपीय शहरों में सफलतापूर्वक लागू किया जा चुका है। यह मॉडल PETA इंडिया के अन्य उपायों के साथ-साथ डवकोट्स (कबूतरों के घर) का प्रयोग करता है, जहाँ अंडों को डमी अंडों से बदलकर मानवीय तरीके से आबादी को नियंत्रित किया जा सकता है। यह प्रणाली आसानी से लागू की जा सकती है और मुंबई को धीरे-धीरे, लेकिन मानवीय तरीके से, कबूतरों की संख्या को कम करने की सुविधा देती है, जबकि कबूतरों की भलाई, सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराएं भी बनी रहती हैं।
कबूतरों को दाना डालना एक मानवीय और अर्थपूर्ण परंपरा है, और ऐसे समाधान मौजूद हैं जो करुणा और व्यवहारिकता दोनों को साथ लेकर चलते हैं. PiCAS मॉडल, निर्धारित समय व अन्य उपायों के साथ मिलकर, मुंबई के लिए यह अवसर प्रदान करता है कि वह पूरे देश को यह दिखाए कि पशु कल्याण और सार्वजनिक स्वास्थ्य की चिंताओं को संतुलित किया जा सकता है वह भी बिना किसी समझौते के।
मुंबई के कबूतरखाने सौ वर्षों से भी अधिक पुराने सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व के स्थल हैं, जहाँ हजारों नागरिक जिनमें से कई वरिष्ठ नागरिक हैं कबूतरों को दाना डालकर आत्म संतुष्टि का अनुभव करते हैं। इन स्थलों पर पीढ़ियों से कबूतरों को भोजन मिलता रहा है और अब वे इस पर निर्भर हो चुके हैं। यदि इन पारंपरिक स्थलों को बंद किया गया या उन्हें अपराध बना दिया गया, तो यह न केवल निर्दयता होगी, बल्कि हमारे संविधान के अनुच्छेद 51A(g) के उस मूलभावना के भी खिलाफ होगा जिसमें सभी जीवों के प्रति करुणा रखने का कर्तव्य बताया गया है, साथ ही यह पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 के प्रावधानों का भी उल्लंघन होगा।
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