PETA इंडिया का सांताक्रूज़ में H&M के स्टोर के बाहर ऊन के इस्तेमाल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन

Posted on by Shreya Manocha

PETA इंडिया के तीन समर्थक पेड़-पौधों से बनी ऊन के कपड़े पहनकर, शरीर पर खून और चोट के निशान के साथ एक “मृत भेड़” के मॉडल को गोद में लिए नज़र आए। उनके हाथों में पोस्टरों पर लिखा था “ऊन के लिए भेड़ों को मारा-पीटा जाता है, इसे न खरीदें” और “भेड़ें दर्द सहती हैं : H&M, ऊन बेचना बंद करो!” इस प्रदर्शन का मकसद ऊन उद्योग में भेड़ों पर होने वाले अत्याचारों के प्रति लोगों को जागरूक करना और H&M ग्रुप से अपने स्टोर्स में ऊन के कपड़े बेचना बंद करने की मांग करना है।

ऊन उद्योग में भेड़ों के साथ बेहद क्रूरता की जाती है। उन्हें लातों और घूसों से पीटा जाता है और सिर्फ ऊन पैदा करने वाली मशीन समझकर इस्तेमाल किया जाता है।   

हाल ही में H&M की सप्लाई चेन से जुड़े दक्षिण अफ्रीका के एक ‘NATIVA-प्रमाणित’ फ़ार्म की जांच में सामने आया कि वहां कर्मचारी डर से कांपती भेड़ों को लात-घूंसों से मारते हैं, उन्हें टांगों से पकड़कर घसीटते हैं और बेदर्दी से उनकी ऊन उतारते हैं, जिससे उनके शरीर पर गहरे ज़ख्म बन जाते हैं। भेड़ें बेहद संवेदनशील और सामाजिक जीव होती हैं, जो आपस में गहरा लगाव महसूस करती हैं और इंसानों की तरह डर तथा दर्द को भी समझ सकती हैं। इसके बावजूद, खुद को “नैतिक और अहिंसक” बताने वाले फ़ार्मों में भी भेड़ों के साथ इसी तरह का हिंसक बर्ताव किया जा रहा है।


इस साल की शुरुआत से ही PETA और उसके समर्थकों ने दुनिया भर में H&M पर लगातार दबाव बनाए रखा है। अगस्त महीने में बोस्टन, लंदन और स्टॉकहोम में कंपनी के स्टोर्स के बाहर हुए प्रदर्शनों के दौरान समर्थक एक नकली मेमने और “कटे हुए भेड़ के सिर” के पुतले को गोद में लिए नज़र आए थे, साथ ही उनके हाथों में पोस्टर थे जिन पर H&M से ऊन का इस्तेमाल बंद करने का आग्रह किया गया था। वहीं पिछले हफ्ते PETA के तीन समर्थकों ने H&M के लंदन फैशन वीक शो में खलल डाला और “H&M: ऊन का कारोबार बेहद क्रूर है, इसे बंद करो!” लिखे पोस्टरों के साथ सीधे रनवे पर आ गए। अमेरिका में भी इसी अभियान के तहत तीन समर्थकों ने न्यू यॉर्क फैशन वीक के रनवे पर आकर ऊन के व्यापार का कड़ा विरोध किया। ये तमाम प्रदर्शन NATIVA द्वारा प्रमाणित एक फ़ार्म से सामने आई नई फुटेज के बाद हुए हैं, जो कि H&M ग्रुप की सप्लाई चेन में इस्तेमाल होने वाला एक ऊन प्रमाणीकरण (सर्टिफिकेशन) है।

PETA अब तक 8 देशों के 150 से अधिक ऊन फ़ार्मों की क्रूरता को बेनकाब करने वाली 17 रिपोर्ट जारी कर चुकी है। इन रिपोर्टों से साफ है कि पशुओं को नुकसान से बचाने का इकलौता तरीका ‘वीगन’ कपड़े चुनना ही है।

ऑर्गेनिक कॉटन (कपास), लिनन या फूलों से बनी ऊन जैसे विकल्प न केवल पूरी तरह अहिंसक और पर्यावरण के अनुकूल हैं, बल्कि ऊन उद्योग से होने वाले नुकसान को भी रोकते हैं।

H&M से ऊन की बिक्री बंद करने और भेड़ों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार को रोकने की मांग करें