मुंबई पुलिस ने लड़ाई में इस्तेमाल किए जा रहे दो मेढ़ों को बचाया और PETA इंडिया की शिकायत पर FIR दर्ज की

Posted on by Surjeet Singh

PETA इंडिया की शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करते हुए मुंबई पुलिस ने बांद्रा टर्मिनस के पास अवैध मेढ़ा-लड़ाई के मामले में निर्मल नगर थाने में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 291 और 3(5); पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 11(1)(a), 11(1)(m), 11(1)(n); तथा महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम, 1959 की धारा 119 के अंतर्गत प्राथमिकी (FIR) दर्ज की।

3 अगस्त को पुलिस ने मेढ़ों को रखने वाले व्यक्ति का पता लगाकर लड़ाई में इस्तेमाल किए गए दोनों मेढ़ों को अपने कब्ज़े में लिया। इसके बाद इन पशुओं को परेल स्थित बाई साकरबाई दिनशॉ पेटिट पशु चिकित्सालय भेजा गया, जहाँ उनका पशु-चिकित्सकीय परीक्षण और उपचार किया गया तथा न्यायालय द्वारा अंतरिम अभिरक्षा का निर्णय होने तक सुरक्षित देखभाल सुनिश्चित की गई।

एफआईआर और जब्ती के बाद, PETA इंडिया ने इन पशुओं की अंतरिम अभिरक्षा के लिए आवेदन दायर किया। बांद्रा की 32वीं न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMFC) न्यायालय ने पशु क्रूरता निवारण (प्रकरण संपत्ति पशुओं की देखभाल एवं संधारण) नियम, 2017  के तहत – जो पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 के अंतर्गत अधिसूचित है – PETA इंडिया को दोनों मेढ़ों की अंतरिम अभिरक्षा प्रदान की। इस मामले में श्री जय गुप्ता, अधिवक्ता द्वारा विस्तार से यह तर्क दिया गया कि मेढ़ों को पुनर्वास हेतु किसी प्रतिष्ठित अभयारण्य भेजा जाना चाहिए, क्योंकि यदि उन्हें आरोपियों को लौटाया गया तो वे दोबारा क्रूरता का शिकार होंगे।

पशुओं को जबरन लड़वाना क्रूर, हिंसक और अवैध है। PETA इंडिया निर्मल नगर पुलिस स्टेशन और माननीय न्यायिक मजिस्ट्रेट श्रीमती एस. एस. पारखी की आभारी है कि उन्होंने मेढ़ों की पीड़ा को पहचाना और यह स्पष्ट संदेश दिया कि पशुओं के साथ क्रूरता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

मेढ़ों को आपस में लड़ाना एक हिंसक और क्रूर प्रथा है, जिसमें दो नर भेड़ों को जबरन आमने-सामने भिड़ाया जाता है। इस दौरान उन्हें बार-बार धकेला और उकसाया जाता है, जब तक कि उनमें से किसी एक को विजेता घोषित न कर दिया जाए। ऐसी अमानवीय प्रथा में पशु गहरी शारीरिक और मानसिक पीड़ा झेलते हैं – जैसे हड्डियों का टूटना, गहरे ज़ख्म और लगातार तनाव।

पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 स्पष्ट रूप से कहता है कि पशुओं को आपस में लड़वाना अपराध है। वर्ष 2014 के एक ऐतिहासिक निर्णय में भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं – PETA इंडिया और जीव-जन्तु कल्याण बोर्ड ऑफ इंडिया – के पक्ष में फैसला सुनाया था और यह स्थापित किया था कि बैल की लड़ाई, कुत्तों को आपस में लड़ाना और केवल मनोरंजन के लिए किसी भी प्रकार की पशु-लड़ाई आयोजित नहीं की जा सकतीं और इन्हें समाप्त किया जाना चाहिए।

पशु क्रूरता देखने पर क्या करें