100 से अधिक वैज्ञानिकों ने पशुओं पर होने वाले क्रूर ‘फोर्स्ड स्विम टेस्ट’ पर प्रतिबंध लगाने की PETA इंडिया की मुहिम का समर्थन किया।
फोर्स्ड स्विम टेस्ट (जबरन तैराकी परीक्षण) की वैज्ञानिक रूप से अवैधता और उसमें पशुओं पर होने वाली क्रूरता के ठोस प्रमाणों पर विचार करने के बाद, चिकित्सा, फार्मेसी, अकादमिक और पशु-चिकित्सा विज्ञान से जुड़े 100 से अधिक विशेषज्ञों ने इस बेकार और अमानवीय परीक्षण पर प्रतिबंध लगाने की मांग करते हुए एक याचिका पर हस्ताक्षर किए हैं। अगस्त में, PETA इंडिया ने यह याचिका, मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के अधीन कार्य करने वाली वैधानिक संस्था—एनिमल्स पर प्रयोगों के नियंत्रण और पर्यवेक्षण समिति (CCSEA)को सौंपी।
फोर्स्ड स्विम टेस्ट (जबरन तैराकी परीक्षणों) में चूहों, हम्स्टर्स और अन्य छोटे जीवों को रसायनों की खुराक देकर उनपर परीक्षण किए जाते हैं। फिर उन्हें पानी से भरे ऐसे बीकर्स में डाला जाता है, जिनसे वे बाहर नहीं निकल सकते, और खुद को डूबने से बचने के लिए तैरने पर मजबूर किया जाता है, और यह सब इंसानों के तनाव (डिप्रेशन) को समझने में मदद करने के लिए किया जाता है। वैज्ञानिकों ने इस परीक्षण की कड़ी आलोचना की है, क्योंकि उनका कहना है कि पानी में तैरना या स्थिर रहना अवसाद या निराशा का संकेत नहीं है। यह तो बस जीवों की ऊर्जा बचाने और नई परिस्थितियों के अनुकूल ढलने का स्वाभाविक तरीका है। शोध यह भी बताता है कि एंटीडिप्रेसेंट दवाओं की प्रभावशीलता जानने के लिए यह परीक्षण उतना की भरोसेमंद है जितना कि सिक्का उछाल कर किसी निर्णय पर पहुंचना।.
छोटे-छोटे, डर से सहमे जीवों को अपनी जान बचाने के लिए तैरने पर मजबूर करना बेहद क्रूर है और इससे इंसानों के तनाव को समझने में ज़रा-सा भी लाभ नहीं मिलता। 100 से अधिक भारतीय वैज्ञानिकों के समर्थन के साथ, PETA इंडिया CCSEA से अपील कर रहा है कि वह दुनिया भर की अन्य नियामक संस्थाओं की तरह इस अवैज्ञानिक और अस्वीकार्य परीक्षण पर प्रतिबंध लगाए।
Earlier this year, after receiving a scientific critique from PETA India detailing the forced swim test, the Pharmacy Council of India directed all agencies under its purview to review and take necessary action on the continued use of the widely debunked experiment. The test is fully banned in New South Wales and has been restricted by the UK Home Office. Many of the world’s top pharmaceutical companies, including Pfizer, GSK, and Johnson & Johnson, and major research universities like Kings College London and the University of Adelaide, have pledged not to permit, conduct, or fund the forced swim test after hearing from PETA entities.
इस वर्ष की शुरुआत में, जब PETA इंडिया ने जबरन तैराकी परीक्षण (फोर्स्ड स्विम टेस्ट) पर एक विस्तृत वैज्ञानिक समीक्षा फ़ार्मेसी काउंसिल ऑफ़ इंडिया को भेजी, तो काउंसिल ने अपने अधीन आने वाली सभी संस्थाओं को निर्देश दिया कि वे इस व्यापक रूप से खारिज किए जा चुके परीक्षण के उपयोग की समीक्षा करें और आवश्यक कार्रवाई करें। यह परीक्षण न्यू साउथ वेल्स में पूरी तरह प्रतिबंधित है और यूके होम ऑफिस द्वारा भी इस पर रोक लगाई जा चुकी है। दुनिया की कई बड़ी दवा कंपनियाँ जैसे Pfizer, GSK और Johnson & Johnson और प्रमुख अनुसंधान विश्वविद्यालय, जिनमें किंग्स कॉलेज लंदन और यूनिवर्सिटी ऑफ़ अडिलेड शामिल हैं, PETA संगठनों द्वारा संपर्क किए जाने के बाद इस परीक्षण को न करने, न करवाने और न ही इसके लिए धन उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता जता चुके हैं।
