PETA इंडिया की शिकायत पर कुरनूल में वन्य पशुओं की हत्या को लेकर POR दर्ज, मुख्य आरोपी गिरफ्तार

Posted on by Shreya Manocha

आंध्र प्रदेश के कुरनूल ज़िले में वन्य पशुओं के प्रति क्रूरता से जुड़ी एक गंभीर घटना के सिलसिले में, PETA इंडिया की शिकायत पर कुरनूल वन प्रभाग ने POR दर्ज की है। यह कार्रवाई संगमित्रा एनिमल फाउंडेशन केमोहम्मद इदरीस के सहयोग से की गई, जिसमें YouTube पर साझा की गई एक भयावह वीडियो क्लिप के आधार पर कार्यवाही की गई। वीडियो में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम (WPA), 1972 के तहत संरक्षित दो साँपों और एक खरगोश की निर्मम हत्या दिखाई गई थी। मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है और वह वर्तमान में वन विभाग की हिरासत में है। मामले की विस्तृत जांच जारी है।

यह क्रूर घटना कुरनूल ज़िले के देवनकोंडा मंडल  स्थितपी कोटकोंडा गांव  में घटित हुई। उपलब्ध वीडियो फुटेज में दोरसैल वाइपर  साँपों को – जो कि WPA, 1972 की अनुसूची-I के अंतर्गत संरक्षित प्रजातियाँ हैं – खेतों में डंडों से बेरहमी से पीटते हुए दिखाया गया है। वहीं एक अन्य वीडियो क्लिप में एक भारतीय खरगोश (अनुसूची-II के अंतर्गत संरक्षित प्रजाति) को खेत में अवैध रूप से फँसाते हुए दिखाया गया है। कुछ ही देर बाद वही खरगोश निःसंचल अवस्था में नज़र आता है, जिससे स्पष्ट है कि उसकी भी हत्या कर दी गई।

वन विभाग द्वारा दर्ज की गई POR में WPA, 1972 की धाराएँ 2(5), 2(16)(a), (b), (c), 2(36), 2(37), 9, 39 और 50 शामिल हैं। ये सभी अपराध ग़ैर-जमानती श्रेणी में आते हैं और इन पर कम-से-कम तीन वर्ष की जेल, जिसे सात वर्ष तक बढ़ सकती है, तथा ₹25,000 या उससे अधिक का जुर्माने का प्रावधान है।

इस त्वरित और संवेदनशील कार्रवाई के लिए प्रभागीय वन अधिकारी श्रीमती पी. श्यामला, IFS (कुरनूल डिवीजन) और वन क्षेत्र अधिकारी सुश्री तेजस्वी पी. (अडोनी रेंज) की सराहना करते हैं, जिन्होंने यह सुनिश्चित किया कि वन्य पशुओं के प्रति क्रूरता पर तत्काल और सख्त प्रतिक्रिया दी जाए। यह कार्रवाई यह संदेश देती है कि पशुओं के साथ क्रूरता करने वालों को अब दंड का सामना करना ही पड़ेगा। यह समझना आवश्यक है कि असल में मनुष्य ही पशुओं के प्राकृतिक आवास में हस्तक्षेप कर रहे हैं – न कि पशु हमारे जीवन में दखल दे रहे हैं।

साँप और खरगोश जैसे वन्य पशु हमारे पर्यावरण को संतुलित बनाए रखने में बेहद अहम भूमिका निभाते हैं। साँप न केवल खुद शिकार करते हैं बल्कि कई दूसरे पशुओं का शिकार भी बनते हैं, जिससे वे खाद्य श्रृंखला का संतुलन बनाए रखते हैं। कुछ प्रजातियों की संख्या को नियंत्रित कर वे पौधों की रक्षा करते हैं। वहीं, खरगोश पौधों को खाकर और उनके बीजों को फैलाकर हरियाली बढ़ाने में मदद करते हैं। इन दोनों का अस्तित्व यह दर्शाता है कि किसी क्षेत्र का पारिस्थितिक तंत्र स्वस्थ है या नहीं – इसलिए इन्हें प्रकृति का संतुलन बनाए रखने वाले संकेतक भी माना जाता है।

PETA इंडिया यह सिफारिश करता है कि पशुओं पर अत्याचार करने वालों का मानसिक स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाए और उन्हें पेशेवर काउंसलिंग दी जाए, क्योंकि ऐसी हिंसक प्रवृत्तियाँ अक्सर गहरे मनोवैज्ञानिक असंतुलन का संकेत होती हैं। अनुसंधानों से यह भी स्पष्ट हुआ है कि जो लोग पशुओं के साथ हिंसा करते हैं, वे अक्सर आगे चलकर अन्य पशुओं और यहाँ तक कि इंसानों को भी नुकसान पहुँचाते हैं। फॉरेंसिक रिसर्च एंड क्रिमिनोलॉजी इंटरनेशनल जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में यह पाया गया कि “पशु क्रूरता में संलिप्त व्यक्ति हत्या, बलात्कार, डकैती, हमला, उत्पीड़न, धमकी, और मादक द्रव्यों के सेवन जैसे अन्य अपराधों में तीन गुना अधिक संलिप्त पाए जाते हैं।”

पशु क्रूरता के खिलाफ़ रिपोर्ट करें