PETA इंडिया की शिकायत के बाद धार में अवैध बैलगाड़ी दौड़ रोकी गई
धार के धर्मपुरी में आयोजित होने वाली बैलगाड़ी दौड़ के एक प्रस्तावित कार्यक्रम का पोस्टर मिलने के बाद, PETA इंडिया ने इस आयोजन को रोकने के लिए धर्मपुरी पुलिस थाना में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद, आयोजकों ने 22 जनवरी 2026 को होने वाली बैलगाड़ी दौड़ कार्यक्रम को 21 जनवरी को रद्द कर दिया।
बैलगाड़ी दौड़ में पशुओं को अत्यधिक शारीरिक दबाव और पीड़ा झेलनी पड़ती है। प्रतिभागी बैलों को अस्वाभाविक गति से दौड़ने के लिए मजबूर करते हैं और उन्हें नंगे हाथों तथा हथियारों से मारते हैं, जिससे थकावट होती है और कई बार जानलेवा चोटें भी लग सकती हैं। इस प्रकार की दौड़ से मनुष्यों को भी गंभीर खतरा होता है, क्योंकि दौड़ते हुए बैल रास्ते में आने वाले लोगों को चोट पहुँचा सकते हैं।
काम के लिए इस्तेमाल होने वाले बैलों को पहले से ही भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, और उन्हें जबरन मारपीट कर दौड़ने के लिए मजबूर करना न केवल घृणित बल्कि अवैध भी है। PETA इंडिया इस आयोजन को रोकने और बैलों को पीड़ा व शोषण से बचाने के लिए सही समय पर कार्यवाई करने हेतु धार पुलिस, विशेष रूप से धर्मपुरी पुलिस थाना के थाना प्रभारी श्री संतोष यादव जी की सराहना करता है।
अपनी शिकायत में PETA इंडिया ने बताया कि इस प्रकार की दौड़ें पशु क्रूरता निवारण अधिनियम (पीसीए अधिनियम), 1960 के तहत प्रतिबंधित हैं। इसके अतिरिक्त, ऐसी दौड़ें भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 के कई प्रावधानों का भी उल्लंघन करती हैं।
पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 में पशुओं को अन्य पशुओं से लड़ने के लिए उकसाने को भी विशेष रूप से अपराध घोषित किया गया है। 7 मई 2014 को दिए गए ऐतिहासिक निर्णय एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ़ इंडिया बनाम ए. नागराजा एवं अन्य (सिविल अपील संख्या 5387/2014) में माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि पशु दौड़ जैसी गतिविधियाँ भी पशु लड़ाई की श्रेणी में आती हैं, क्योंकि इनमें पशुओं को प्रतिस्पर्धात्मक और हानिकारक परिस्थितियों में धकेला जाता है, जो लड़ाई के लिए उकसाने के समान है।
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