PETA इंडिया की शिकायत पर हजारीबाग ईस्ट फॉरेस्ट डिवीजन ने जंजीरों में बंधे व घायल बंदर को बचाया

Posted on by Surjeet Singh

एक स्थानीय निवासी की शिकायत पर कि एक रीसस मकाक को अवैध और क्रूर तरीके से कैनरी हिल, हजारीबाग में बंद शटर से जंजीर में बांधा गया है, PETA इंडिया ने हजारीबाग ईस्ट फॉरेस्ट डिवीजन के साथ मिलकर तत्काल कार्रवाई की और बंदर को बचाया। बताया गया कि मकाक को लगातार चार दिनों तक उसी स्थान पर बिना भोजन और पानी के जंजीर से बांधकर रखा गया था, जबकि आसपास किसी ने यह पुष्टि नहीं की कि इस अवैध कैद के लिए कौन जिम्मेदार था। जंजीर से पशु को चोटें भी आई थीं, जिसके बाद वन विभाग ने उसे पशु-चिकित्सा देखभाल के अधीन रखा। स्वस्थ घोषित होने के बाद बंदर को उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया।

भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MOEFCC) ने अपने पत्र संख्या F. No. WL-8/91/2024-WL, दिनांक 09 सितम्बर 2024, में स्पष्ट किया है कि रीसस मकाक को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची IV के परिशिष्ट II में संरक्षित किया गया है।

वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 49M के तहत यह प्रावधान है कि यदि कोई व्यक्ति अनुसूची IV में सूचीबद्ध किसी भी जीवित प्रजाति को अपने पास रखता है, तो उसे उस पशु का पूरा विवरण संबंधित राज्य के प्रधान वन्यजीव प्रतिपालक (Chief Wildlife Warden) को देना अनिवार्य है। इस प्रावधान को और प्रभावी बनाने के लिए पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MOEFCC) ने हाल ही में लिविंग एनिमल स्पीशीज़ (रिपोर्टिंग एंड रजिस्ट्रेशन) नियम, 2024 लागू किए हैं, जिन्हें 28 फरवरी 2024 को राजपत्र में अधिसूचित किया गया। इन नियमों के अनुसार, अनुसूची IV में शामिल किसी भी प्रजाति को अपने पास रखने वाला व्यक्ति छह महीने के भीतर – या उस प्रजाति के अधिग्रहण की तिथि से 30 दिनों के भीतर – उसकी जानकारी सरकार को देगा और PARIVESH 2.0 पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण कराना होगा।

रीसस मकाक वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची IV के परिशिष्ट II के अंतर्गत संरक्षित हैं। अतः बिना PARIVESH पोर्टल पंजीकरण के उन्हें कैद में रखना या उनसे प्रदर्शन करवाना दंडनीय अपराध है, जिसके लिए अधिकतम तीन वर्ष तक की कारावास, 1 लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों दंड हो सकते हैं।

PETA इंडिया हजारीबाग ईस्ट फॉरेस्ट डिवीजन, विशेषकर श्री विकास कुमार उज्जवल, IFS, डिवीजनल फॉरेस्ट ऑफिसर, हजारीबाग ईस्ट, का आभारी है, जिन्होंने अवैध रूप से कैद मकाक को बचाने और उसके पुनर्वास को सुनिश्चित करने के लिए त्वरित कार्रवाई की। हम दयालु नागरिकों से अपील करते हैं कि वे सतर्क रहें और वन्यजीव या अन्य पशुओं के साथ किसी भी तरह की क्रूरता की घटनाओं की सूचना तुरंत वन विभाग या पुलिस को दें।

हिन्दू धर्म में पूजनीय होने के साथ-साथ रीसस मकाक स्थानीय पारिस्थितिक तंत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, क्योंकि ये मुख्यतः फल खाने के कारण बीज फैलाव में मदद करते हैं। इनकी अनुपस्थिति जंगलों के लिए हानिकारक हो सकती है।

पशुओं पर क्रूरता होते देखें तो तुरंत रिपोर्ट करें