PETA इंडिया की शिकायत के बाद गुरुग्राम वन विभाग ने तोतों की अवैध बिक्री के मामले में एक व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज किया और पक्षियों को बचाया

Posted on by Surjeet Singh

एक जागरूक नागरिक से गुरुग्राम के सेक्टर 28 में एलेक्ज़ेंड्राइन तोतों की अवैध बिक्री की सूचना मिलने के बाद, पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स इंडिया (PETA इंडिया) ने गुरुग्राम वन विभाग के साथ मिलकर कार्यवाही करते हुए इन पक्षियों को बचाया और आरोपी के खिलाफ प्रारंभिक अपराध रिपोर्ट (POR) दर्ज करवाई।

एलेक्ज़ेंड्राइन तोते, जो वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची II के तहत संरक्षित प्रजाति हैं, उनमें से आठ तोतों को छोटे और भीड़भाड़ वाले पिंजरों में कैद करके रखा गया था। इसके अलावा, उसी व्यक्ति द्वारा पास के कूड़े के ढेर में फेंके गए छह अन्य तोते मृत अवस्था में मिले।

रेस्क्यू किए आठों तोतों की स्वास्थ्य जांच के उपरांत अगले दिन उन्हें खुले आसमान में छोड़ दिया गया। गुरुग्राम वन विभाग ने, उक्त अभियुक्त के खिलाफ ‘वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972’ की धारा 9, 39 और 51 के तहत प्रारंभिक अपराध रिपोर्ट (POR) दर्ज की है। इस संरक्षित प्रजाति को खरीदना, बेचना या अपने पास रखना अपराध है, जिसके लिए 1 लाख रुपये तक का जुर्माना, तीन साल तक की जेल या दोनों सज़ा हो सकती है।

PETA इंडिया हरियाणा वन विभाग के गुरुग्राम वन मंडल, विशेष रूप से रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर श्री कृष्ण यादव जी का आभार व्यक्त करता है, जिन्होंने तत्काल कार्यवाही करते हुए इन तोतों को कैद की ज़िंदगी से तुरंत मुक्त कराया। PETA इंडिया सभी लोगों से अपील करता है कि यदि उन्हें पशुओं के साथ किसी भी तरह की क्रूरता की जानकारी मिले तो वे स्थानीय पशु संरक्षण संगठन और पुलिस को सूचित करें, और यदि मामला वन्यजीवों से जुड़ा हो तो वन विभाग को जानकारी दें।

अवैध पक्षी व्यापार में, असंख्य पक्षियों को उनके परिवारों से छीन लिया जाता है और उन्हें उनसब चीजों से वंचित कर दिया जाता है जो उनके लिए प्राकृतिक रूप से आवश्यक होती है ताकि उन्हें पालतू पशु के रूप में बेचा जा सके या उन्हें नकली भविष्य बताने वालों (फॉर्च्यून-टेलर्स) के रूप में इस्तेमाल किया जा सके। नन्हें पक्षियों को अक्सर घोंसलों से चुरा लिया जाता है, और अन्य पक्षी जाल में फंसने पर घबरा जाते हैं, जिससे वे खुद को छुड़ाने की कोशिश में गंभीर रूप से घायल हो सकते हैं या मर सकते हैं। पकड़े गए पक्षियों को छोटे पिंजरों व बक्सों में ठूंस दिया जाता है, और अनुमान है कि उनमें से लगभग 60% परिवहन के दौरान पंखों और पैरों के टूटने, प्यास या भय से मर जाते हैं। जो जीवित रहते हैं, उन्हें जिंदगी भर दुखभरी कैद का सामना करना पड़ता है, जिसमें कुपोषण, अकेलापन, अवसाद और तनाव शामिल हैं।. 

जब भी किसी पशु पर क्रूरता होते देखें तो यह करें

Help Ban the Caging of Bird