PETA इंडिया के हस्तक्षेप के बाद, जमशेदपुर में जीवित मुर्गों को चीरकर दी जाने वाली क्रूर बलि को रोका गया

Posted on by Surjeet Singh

जनवरी माह में प्रतिवर्ष लाल भट्टा में होने वाली ग्राम पूजा के दौरान बलि की भयानक प्रथा की सूचना मिलने के बाद, PETA इंडिया ने पूर्वी सिंहभूम पुलिस के सहयोग से इस रोकने के लिए कार्यवाई की। इस तरह की बलि प्रथा में भीड़ द्वारा जीवित मुर्गों को हवा में उछालकर उन्हें बेरहमी से चीर कर कर फाड़ दिया जाता है। PETA इंडिया ने पूर्वी सिंहभूम जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ मिलकर सुनिश्चित किया कि उत्सव के आयोजकों को एक नोटिस जारी किया जाय। इस नोटिस में उन्हें पशु बलि सहित पशुओं के प्रति किसी भी प्रकार की क्रूरता को न करने का निर्देश दिया गया। स्थिति पर नज़र रखने तथा किसी भी उल्लंघन को रोकने के लिए आयोजन स्थल पर पुलिसबल को भी तैनात किया गया था।

PETA इंडिया की वरिष्ठ क्रूरता प्रतिक्रिया समन्वयक, सिंचना सुब्रमण्यन ने कहा- PETA इंडिया, पूर्वी सिंहभूम पुलिस, विशेष रूप से पूर्वी सिंहभूम के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) श्री पीयूष पांडे, IPS की सराहना करता है, जिन्होंने इस अवैध बलि को तत्काल रूप से रोकने की कार्यवाई की। PETA

कई व्यक्तियों द्वारा सामान्य इरादे से मुर्गों को अवैध रूप से मारना भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 3(5) के तहत दंडनीय अपराध है। BNS की धारा 325 के अंतर्गत, शरारतपूर्ण तरीके से मुर्गों को मारने पर पांच साल तक की कैद, जुर्माना अथवा दोनों की सजा हो सकती है।

अपनी शिकायत में, PETA इंडिया ने यह भी बताया कि पशु क्रूरता निवारण (वधशाला) नियम, 2011 के द्वारा, भोजन के लिए पशुओं का वध केवल पंजीकृत अथवा लाइसेंस प्राप्त बूचड़खाने में ही किया जा सकता है। पंजीकृत बूचड़खानों के अलावा पशुओं के वध या बलि के लिए कोई अन्य जगह का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता क्यूंकि वहां पशुओं को प्रजाति-विशिष्ट स्टनिंग (बेहोश करने की) सुविधाएं नहीं होती जो कि कानूनन उन्हें अनावश्यक दर्द और पीड़ा से बचाने के लिए अनिवार्य होती हैं।

जिस प्रकार मानव बलि को अब हत्या के रूप में पहचाना जाता है और उसकी निंदा की जाती है, उसी प्रकार पशु बलि की यह पुरानी प्रथा भी समाप्त होनी चाहिए।

पशु बलि पर रोक लगाने की मांग करें

पशुओं के प्रति क्रूरता की शिकायत कैसे करें