PETA इंडिया के विश्व स्तनपान सप्ताह अभियान में विशाल ‘शिशुओं’ ने गुजरात के राहगीरों से बड़े होने और डेयरी-मुक्त जीवन अपनाने की अपील की

Posted on by Surjeet Singh

विश्व स्तनपान सप्ताह (1 से 7 अगस्त) के अवसर पर पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स इंडिया (PETA इंडिया) और वीगन्स ऑफ गुजरात के दो समर्थक 2.5 मीटर ऊँची हवा भरकर फुलाने वाली शिशु पोशाक पहनकर अहमदाबाद में लोगों को ठंडी-ठंडी प्लांट-बेस्ड ‘मायल्क’ (मेवों या अन्य पौधों से बना दूध) के पैकेट वितरित करेंगे। उनके हाथों में ऐसे संदेश वाले बोर्ड होंगे, जिन पर लिखा होगा, “दूध बच्चों के लिए है, डेयरी छोड़िए।” यह कार्यक्रम स्वादिष्ट पौधों पर आधारित विकल्पों की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाने के साथ-साथ लोगों को यह याद दिलाएगा कि गाय हो या इंसान, सभी स्तनधारी माताएँ अपने बच्चों के लिए ही दूध बनाती हैं। शिशु काल (दूध पीना छोड़ने की उम्र)  के बाद किसी को भी दूध की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि पौधों से मिलने वाले अनेक पौष्टिक खाद्य पदार्थों से स्वस्थ जीवन जिया जा सकता है।

 

डेयरी उद्योग में गायों और भैंसों का जबरन गर्भाधान कराया जाता है (इस प्रक्रिया में कर्मचारी गाय के मलाशय में अपना हाथ डालते हैं और सांड के वीर्य वाली धातु की छड़ को उसकी योनि में डालते हैं)। जन्म के तुरंत बाद उनके नवजात बच्चों को उनसे छीन लिया जाता है। नर बछड़े आगे चलकर दूध नहीं देंगे इसलिए उन्हें बेकार मानकर त्याग दिया जाता है, भूखा मरने के लिए छोड़ दिया जाता है या उनके मांस और चमड़े के लिए बेच दिया जाता है। वहीं मादा बछड़ों को डेयरी में रख लिया जाता है और फिर आगे चलकर उनका भी वही हाल होता है जो उनकी माँ का होता है। उन्हें दूध पैदा करने की मशीन की तरह इस्तेमाल किया जाता है। जब उनका शरीर दूध देने लायक नहीं रह जाता तब उन्हें या तो छोड़ दिया जाता है या वध के लिए भेज दिया जाता है।

भारत अपनी करुणा और पौधों पर आधारित भोजन की समृद्ध परंपरा के लिए दुनिया भर में सम्मानित है। स्टैटिस्टा कंज़्यूमर इनसाइट्स के एक सर्वे के अनुसार, मांस-मुक्त भोजन अपनाने के मामले में भारत दुनिया में सबसे आगे है, और अब 9% भारतीय स्वयं को वीगन (पूरी तरह पौधों पर आधारित जीवनशैली अपनाने वाला) बताते हैं। स्वास्थ्य, पशु और पर्यावरण की रक्षा के लिए लगातार अधिक भारतीय वीगन जीवनशैली अपना रहे हैं। PETA इंडिया ऐसे भविष्य की कल्पना करता है, जहाँ गाय और भैंसें अपने बच्चों का पालन-पोषण स्वाभाविक रूप से कर सकें और हर व्यक्ति भारत की अहिंसा की परंपरा को दर्शाने वाले स्वादिष्ट प्लांट-बेस्ड खाद्य पदार्थों का आनंद ले।

दुनिया के सबसे बड़े खाद्य एवं पोषण विशेषज्ञों के संगठन, एकेडमी ऑफ न्यूट्रिशन एंड डाइटेटिक्स के अनुसार, वीगन जीवनशैली अपनाने वाले लोगों में इस्केमिक हृदय रोग, टाइप-2 मधुमेह, उच्च रक्तचाप, कुछ प्रकार के कैंसर और मोटापे जैसी स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम कम होता है। वहीं ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं का कहना है कि मांस और डेयरी छोड़ने से किसी व्यक्ति के भोजन से होने वाले कार्बन फुटप्रिंट में 73% तक कमी आ सकती है।

जो लोग दूध जैसा मलाईदार स्वाद पसंद करते हैं, उनके लिए मेवे, ओट्स, बीज, बाजरा, सोया, चावल या अन्य पौधों से बना मायल्क एक पौष्टिक और स्वादिष्ट विकल्प है।

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