PETA इंडिया की शिकायत के बाद, गया वन मंडल ने चौदह तोतों को बचाया

Posted on by Surjeet Singh

गया – एक जागरूक व्यक्ति ने सूचना दी कि गया में केपी रोड पर चौदह रोज-रिंग्ड तोतों को छोटे-छोटे पिंजरों में कैद करके बदहाल परिस्थितियों में रखा गया था और उन्हें खुलेआम बेचा जा रहा था। PETA इंडिया ने गया वन मंडल के साथ मिलकर तत्काल कार्रवाई करते हुए इन पक्षियों को बचाया। जब अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे, तो उन्हें चौदह तोते मिले, जिन्हें वन विभाग द्वारा तुरंत जब्त कर लिया गया।

इस मामले में वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 9, 39 और 51 के तहत एक प्रारंभिक अपराध रिपोर्ट (POR) दर्ज की गई है। बचाव के बाद, इन पक्षियों को वन विभाग की सुविधा में स्वास्थ्य जांच, उपचार और अस्थायी पुनर्वास के लिए भेजा गया है । जैसे ही ये पक्षी पूरी तरह स्वस्थ हो जाएंगे, उन्हें उनके प्राकृतिक आवास यानी खुले आसमान में वापस छोड़ दिया जाएगा । रोज़-रिंग्ड तोते वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम की अनुसूची II के अंतर्गत संरक्षित प्रजाति हैं। इस प्रजाति को खरीदना, बेचना या अपने पास रखना एक अपराध है। ऐसा करने वाले पर ₹1 लाख तक का जुर्माना, तीन साल तक की जेल, या दोनों हो सकते हैं।

PETA इंडिया गया वन मंडल, और विशेष रूप से वन प्रमंडल पदाधिकारी श्री शशिकांत कुमार, IFS, के प्रति आभार व्यक्त करता है, जिन्होंने इन तोतों को भयावह स्थिति से तुरंत बचाया। PETA इंडिया सभी नागरिकों से अपील करता है कि यदि वे पशुओं के प्रति किसी भी प्रकार की क्रूरता होते देखें, तो तुरंत स्थानीय पशु सुरक्षा संगठन, पुलिस, या यदि वन्य पशु शामिल हों, तो संबंधित वन विभाग को इसकी सूचना दें।

पक्षियों की बिक्री के अवैध व्यापार में, अनगिनत पक्षियों को उनके परिवारों से अलग कर दिया जाता है और उन्हें वे सभी प्राकृतिक चीजें और स्वतंत्रता छीन ली जाती है जो उनके लिए आवश्यक होती हैं, ताकि उन्हें पालतू पशु के रूप में बेचा जा सके या झूठे भविष्यवक्ता के रूप में इस्तेमाल किया जा सके। नन्हें पक्षियों को अक्सर उनके घोंसलों से चुरा लिया जाता है, और ये पक्षी जाल या पिंजरों में फंसते समय डर से पागल हो जाते हैं, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आ सकती हैं या उनकी मृत्यु भी हो सकती है। पकड़े गए पक्षियों को छोटे पिंजरों में ठूंस-ठूंस कर रखा जाता है, और अनुमान है कि कैद किए गए पक्षियों के पंख टूटने, पैर टूटने, प्यास या भय के कारण 60% की रास्ते में ही मृत्यु हो जाती है। जो बच जाते हैं, उन्हें पिंजरे में एक कैदी के रूप में भूख, अकेलापन, अवसाद और तनाव का सामना करना पड़ता है।

जब भी किसी पशु पर क्रूरता होते देखें तो यह करें

पक्षियों को पिंजरों में कैद करने पर प्रतिबंध लगवाने में मदद करें