चेन्नई में सामुदायिक बिल्लियों को कथित रूप से ज़हर दिए जाने के मामले में FIR दर्ज

Posted on by Sudhakarrao Karnal

चेन्नई के जाफरखानपेट स्थित ब्रमावती स्ट्रीट में सामुदायिक बिल्लियों की संदिग्ध रूप से ज़हर दिए जाने के कारण मौत की सूचना मिलने के बाद, PETA इंडिया ने MGR नगर पुलिस स्टेशन के साथ मिलकर त्वरित पुलिस हस्तक्षेप और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। PETA इंडिया के हस्तक्षेप और लगातार किए गए फॉलो-अप के बाद, पुलिस ने सामुदायिक बिल्लियों को कथित रूप से ज़हर देने के मामले में एक व्यक्ति के खिलाफ FIR दर्ज की।

स्थानीय देखभालकर्ता के अनुसार, इलाके में सामुदायिक बिल्लियों को कई महीनों की अवधि के दौरान बार-बार ज़हर दिया गया था।

स्थानीय देखभालकर्ता की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए MGR नगर पुलिस स्टेशन ने भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 325 के तहत FIR दर्ज की। PETA इंडिया ने MGR नगर पुलिस से FIR में पशु क्रूरता निवारण (PCA) अधिनियम, 1960 की धारा 11(1) भी शामिल करने का आग्रह किया है।

BNS, 2023 की धारा 325 किसी पशु को मारने, ज़हर देने, अपंग करने या उसे बेकार कर देने जैसे कृत्यों को संज्ञेय अपराध मानती है और इसमें पांच वर्ष तक की कैद, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। PCA अधिनियम, 1960 की धारा 11 “क्रूरता” को परिभाषित करती है और किसी पशु को अनावश्यक पीड़ा या कष्ट पहुंचाने को दंडनीय अपराध बनाती है।

PETA इंडिया की सिफारिश है कि पशुओं के साथ दुर्व्यवहार करने वाले लोगों की मनोचिकित्सकीय जांच कराई जाए और उन्हें परामर्श दिया जाए, क्योंकि पशुओं के साथ क्रूरता मनोवैज्ञानिक समस्याओं का संकेत हो सकती है। शोध में यह भी पाया गया है कि पशुओं के साथ क्रूरता करने वाले कुछ लोग बार-बार अपराध कर सकते हैं और अन्य पशुओं तथा मनुष्यों को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। Forensic Research & Criminology International Journal में प्रकाशित एक अध्ययन में कहा गया है कि पशुओं के साथ क्रूरता करने वाले लोग हत्या, बलात्कार, डकैती, हमला, उत्पीड़न, धमकी और नशीली दवाओं के दुरुपयोग सहित अन्य अपराध करने की तीन गुना अधिक संभावना रखते थे।

PETA इंडिया लंबे समय से PCA अधिनियम, 1960 को मजबूत करने के लिए अभियान चला रहा है। इस कानून में पुराने और अपर्याप्त दंड हैं, जैसे पहली बार दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति के लिए अधिकतम केवल 50 रुपये का जुर्माना। हालांकि, BNS, 2023, जिसने अब IPC का स्थान ले लिया है, अधिक कठोर दंड का प्रावधान करती है। PCA अधिनियम में संशोधन के संबंध में केंद्र सरकार को भेजे गए प्रस्ताव में PETA इंडिया ने पशुओं के साथ क्रूरता के लिए दंड में उल्लेखनीय वृद्धि करने की सिफारिश की है।

सामुदायिक बिल्लियों को अक्सर क्रूरता का शिकार होना पड़ता है या वे वाहनों की चपेट में आ जाती हैं। उन्हें अक्सर भूख, बीमारी या चोट का भी सामना करना पड़ता है। हर वर्ष कई बिल्लियां पशु आश्रयस्थलों में पहुंच जाती हैं, जहां अच्छे घर न मिलने के कारण वे पिंजरों या केनेल में लंबे समय तक रहती हैं। इसका सरल समाधान है—नसबंदी और सड़कों या आश्रयस्थलों से गोद लेना। एक मादा कुत्ते की नसबंदी छह वर्षों में 67,000 जन्मों को रोक सकती है, जबकि एक मादा बिल्ली की नसबंदी सात वर्षों में 4,20,000 जन्मों को रोक सकती है।

पशुओं के साथ होने वाली क्रूरता की हमेशा शिकायत करें

पशुओं पर क्रूरता करने वालों के खिलाफ कड़ी सज़ा की मांग करें