सांगली में PETA इंडिया के हस्तक्षेप के बाद मादा कुत्ते के यौन शोषण के मामले में FIR दर्ज

Posted on by Surjeet Singh

राजारामनगर गांव में एक पशु संरक्षक से यह जानकारी मिलने के बाद कि उसके मादा कुत्ते के साथ कथित रूप से यौन शोषण हुआ है, PETA इंडिया ने इस्लामपुर पुलिस स्टेशन के साथ मिलकर यह सुनिश्चित किया कि इस मामले में आरोपी के खिलाफ तुरंत प्राथमिकी सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज की जाए। वीडियो साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 325 तथा पशु क्रूरता निवारण (PCA) अधिनियम, 1960 की धारा 11(1)(a) के तहत FIR दर्ज की गई।

वीडिओ में, आरोपी उत्तम पवार को “चिकी” नाम की मादा कुत्ते का यौन शोषण करते हुए देखा गया। पड़ोसियों ने मादा कुत्ते के संरक्षक को बताया कि आरोपी पिछले लगभग एक महीने से, जब संरक्षक काम पर रहते थे, हर रात कुत्ते को बहला-फुसला कर अपने घर बुलाकर उसका यौन-शोषण कर रहा था। 6 जून को एक जागरूक पड़ोसी ने चुपके से आरोपी की इस हरकत को खिड़की से वीडियो रिकॉर्ड किया। फुटेज में आरोपी कुत्ते को भोजन देते हुए दिखाई देता है, जिसके बाद वह अपने कपड़े उतार देता है और फिर उस मादा कुत्ते का यौन शोषण करता है।

2021 में, फेडरेशन ऑफ इंडियन एनिमल प्रोटेक्शन ऑर्गनाइजेशन्स की एक रिपोर्ट में बताया गया कि पिछले दशक में लगभग 5,00,000 पशु, जिनमें गायें और कुत्ते शामिल हैं, अपराधों के शिकार हुए और कई के साथ गंभीर क्रूरता की घटनाएँ हुईं। इससे पहले वॉइस ऑफ स्ट्रे डॉग्स की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि पशुओं के प्रति यौन हिंसा के मामले अक्सर कम रिपोर्ट होते हैं, लेकिन उनकी दर मानव अपराधों के समान हो सकती है।

पशुओं के प्रति क्रूरता की घटनाएं गहरे मानसिक विकार का संकेत देती हैं। मनोविज्ञान और अपराध विज्ञान में किए गए शोध यह दर्शाते हैं कि जो लोग पशुओं के प्रति क्रूरता करते हैं, वे अक्सर यहीं नहीं रुकते, कई आगे चलकर मनुष्यों को भी नुकसान पहुँचाते हैं। अमेरिका के फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (FBI) ने पाया है कि पशुओं के प्रति क्रूरता का इतिहास उसके सीरियल बलात्कारियों और हत्यारों के रिकॉर्ड में बार-बार दिखाई देने वाले लक्षणों में से एक है।

PETA इंडिया यह भी बताता है कि कई हिंसक अपराधियों का पशुओं के प्रति क्रूरता का इतिहास रहा है। ‘जर्नल ऑफ इमोशनल एब्यूज’ में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि सुरक्षित आश्रय में शरण लेने वाली 71% ऐसी महिलाएं जिनके पास साथी पशु थे, ने पुष्टि की कि उनके साथी ने उनके पशुओं को धमकाया, घायल किया या मार दिया। ‘फॉरेंसिक रिसर्च एंड क्रिमिनोलॉजी इंटरनेशनल जर्नल’ के अनुसार, “जो लोग पशुओं के प्रति क्रूरता करते हैं, उनके अन्य अपराध करने की संभावना तीन गुना अधिक होती है, जिनमें हत्या, बलात्कार, डकैती, हमला, उत्पीड़न, धमकी और नशीले पदार्थों का दुरुपयोग शामिल है। पशुओं पर प्रति क्रूरता करने के प्रमुख कारणों में क्रोध, मनोरंजन, नियंत्रण, भय, नापसंदगी, प्रतिशोध, नकल और यौन आनंद शामिल हैं।“ भारत में, केरल की कानून छात्रा जिशा के बलात्कार और हत्या के दोषी अमीरुल इस्लाम का भी कुत्तों और बकरियों के साथ बलात्कार और हत्या का इतिहास रहा है।

PETA इंडिया लंबे समय से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से आग्रह कर रहा है कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) में संशोधन कर पशुओं के प्रति यौन शोषण को स्पष्ट रूप से दंडनीय बनाया जाए। पहले IPC, 1860 की धारा 377 के तहत पशुओं के प्रति यौन अपराधों को दंडित किया जाता था, लेकिन वर्तमान BNS में इसके लिए कोई समान प्रावधान नहीं है। भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 377 के तहत पशु के साथ बलात्कार को गैर-जमानती अपराध माना जाता था और इसमें ‘आजीवन कारावास, या किसी भी प्रकार के कारावास जिसकी अवधि दस वर्ष तक बढ़ाई जा सकती है तथा जुर्माने का भी प्रावधान था’ का दंड निर्धारित था।

पशुओं को मजबूत कानूनी सुरक्षा प्रदान करना हमारे देश के सभी जीवों की रक्षा के लिए आवश्यक है, क्योंकि पशुओं के प्रति क्रूरता और मनुष्यों के प्रति हिंसा के बीच एक स्थापित संबंध पाया गया है।

पशुओं के यौन शोषण को रोकने में मदद करें।

पशुओं पर क्रूरता की रिपोर्ट अवश्य करें