PETA इंडिया के हस्तक्षेप के बाद सूअर के बच्चे को ज़िंदा दफ़न कर बलि देने के मामले में FIR दर्ज।

Posted on by Surjeet Singh

यह जानकारी मिलने के बाद कि सीतापुर के गोड़ियाना, मन्नी चौराहा क्षेत्र में कुछ लोगों ने परंपरा के चलते एक सूअर के बच्चे को ज़िंदा दफ़न कर उसकी बलि दी, PETA इंडिया ने बदायूं के पशु अधिकार कार्यकर्ता श्री विकेंद्र शर्मा के सहयोग से कोतवाली पुलिस स्टेशन में अभियुक्तों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज करवाई है।

इस भयावह घटना का वीडियो सामने आया था जिसमे दो लोग एक डरे सहमे सूअर के बच्चे को बलि के लिए ज़िंदा दफ़न करते हुए दिखाई दे रहे थे, इसके उपरांत PETA इंडिया ने पुलिस अधीक्षक श्री अंकुर अग्रवाल, आईपीएस; सीतापुर के ज़िलाधिकारी डॉ. राजगणपति आर., आईएएस; तथा कोतवाली पुलिस स्टेशन के एसएचओ श्री अनुप कुमार के साथ बातचीत कर इस मामले में FIR दर्ज करवाई। यह FIR भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 325 और पशु क्रूरता निवारण (PCA) अधिनियम, 1960 की धारा 11(1) के तहत दर्ज की गई है।

BNS, 2023 की धारा 325 किसी भी पशु को घायल करने या उसकी हत्या करने को संज्ञेय अपराध मानती है और इसके लिए पाँच वर्ष तक के कारावास, जुर्माना, या दोनों का प्रावधान करती है। PCA अधिनियम, 1960 की धारा 11 “क्रूरता” को परिभाषित करती है और किसी भी पशु को अनावश्यक दर्द या कष्ट पहुँचाने को दंडनीय अपराध बनाती है।

PETA इंडिया सीतापुर के ज़िलाधिकारी डॉ. राजगणपति आर., आईएएस और पुलिस अधीक्षक श्री अंकुर अग्रवाल, आईपीएस की सराहना करता है जिन्होंने FIR दर्ज करने के निर्देश दिए और यह संदेश दिया कि पशुओं के प्रति क्रूरता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पशु बलि न केवल पशुओं के लिए क्रूर है, बल्कि समाज के लिए भी खतरा है। यह हमें हिंसा के प्रति असंवेदनशील बनाती है और प्रगति में बाधा डालने वाली पुरानी मान्यताओं को मजबूत करती है। जिस तरह मानव बलि को आज हत्या माना जाता है, उसी तरह, ऐसे समय में जब भारत अपनी AI अवसंरचना को आगे बढ़ा रहा है, पशु बलि जैसी पुरातन प्रथाओं का अंत होना चाहिए। यह हमारे सामाजिक विकास के लिए आवश्यक है।

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि पशुओं का वध केवल लाइसेंस प्राप्त बूचड़खानों में ही किया जा सकता है और नगर निकायों को इस आदेश का पालन सुनिश्चित करना होगा। पशु क्रूरता निवारण (बूचड़खाना) नियम, 2001 और खाद्य सुरक्षा एवं मानक (खाद्य व्यवसायों का लाइसेंस और पंजीकरण) विनियम, 2011 के तहत, भोजन के लिए पशुओं का वध केवल ऐसे लाइसेंस प्राप्त बूचड़खानों में किया जा सकता है, जहाँ प्रजाति-विशेष के अनुसार बेहोश करने (स्टनिंग) की उचित व्यवस्था हो।

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