PETA इंडिया और SAFI के हस्तक्षेप के बाद IIT हैदराबाद में सामुदायिक कुत्ते की हत्या के मामले में FIR दर्ज
IIT हैदराबाद परिसर में एक सामुदायिक कुत्ते की हत्या किए जाने की जानकारी मिलने के बाद, कथित तौर पर एक सुरक्षा गार्ड द्वारा की गई इस घटना के मामले में PETA इंडिया और स्ट्रे एनिमल फाउंडेशन इंडिया (SAFI) ने संगारेड्डी ग्रामीण पुलिस स्टेशन में प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज कराने में मदद की।
27 सितंबर को IIT हैदराबाद के एक सुरक्षा गार्ड ने एक सामुदायिक कुत्ते को बुरी तरह पीटा, जिससे उसे गंभीर चोटें आईं। असहनीय दर्द झेलने के बाद दो दिन बाद उस कुत्ते की मौत हो गई। इस घटना के संबंध में 30 सितंबर को शिकायत दर्ज कराई गई। इसके बाद 1 अक्टूबर को संगारेड्डी ग्रामीण पुलिस स्टेशन में अज्ञात आरोपी के खिलाफ FIR (संख्या 571/2026) दर्ज की गई। PETA इंडिया ने FIR दर्ज कराने की प्रक्रिया में संगारेड्डी ग्रामीण सर्कल के सर्कल इंस्पेक्टर श्री मोहम्मद नईमुद्दीन और संगारेड्डी ग्रामीण पुलिस स्टेशन की स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) श्री अरवा हरिका के साथ मिलकर काम किया। उसी दिन कुत्ते का पोस्टमॉर्टम भी किया गया। SAFI फाउंडेशन के पशु क्रूरता रोकथाम प्रबंधक श्री अदुलापुरम गौतम की शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 325 के तहत FIR दर्ज की गई।
BNS, 2023 की धारा 325 के तहत किसी पशु की हत्या करना, उसे ज़हर देना, अपंग बनाना या उसे बेकार कर देना एक संज्ञेय अपराध है। इस अपराध के लिए पांच साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों की सज़ा हो सकती है। पशु क्रूरता निवारण अधिनियम (PCA Act), 1960 की धारा 11 में पशु क्रूरता को परिभाषित किया गया है और किसी पशु को अनावश्यक दर्द या तकलीफ पहुंचाना दंडनीय अपराध माना गया है।
PETA इंडिया की सिफारिश है कि पशुओं के साथ दुर्व्यवहार करने वाले लोगों की मनोचिकित्सकीय जांच कराई जाए और उन्हें काउंसलिंग दी जाए, क्योंकि पशु पर क्रूरता गंभीर मनोवैज्ञानिक समस्या का संकेत हो सकती है। शोध से पता चलता है कि पशुओं के प्रति क्रूरता करने वाले लोग अक्सर बार-बार ऐसे अपराध करते हैं और आगे चलकर दूसरे पशुओं के साथ-साथ इंसानों को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। Forensic Research & Criminology International Journal में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, “पशुओं के प्रति क्रूरता करने वाले लोगों में हत्या, बलात्कार, लूटपाट, हमला, उत्पीड़न, धमकी देने और नशीले पदार्थों के दुरुपयोग सहित अन्य अपराध करने की संभावना तीन गुना अधिक पाई गई।”
PETA इंडिया लंबे समय से पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 को मजबूत बनाने की मांग करता रहा है। इस कानून में सज़ा के प्रावधान पुराने और अपर्याप्त हैं। उदाहरण के लिए, पहली बार दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति पर अधिकतम केवल 50 रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है, हालांकि BNS, 2023 में अधिक कड़ी सज़ा का प्रावधान है। इस अधिनियम में संशोधन के संबंध में केंद्र सरकार को भेजे गए प्रस्ताव में PETA इंडिया ने पशु क्रूरता के मामलों में सज़ा को काफी बढ़ाने की सिफारिश की है।
