तेलंगाना में PETA इंडिया, SAFI और श्रीमती मेनका गांधी की मध्यस्थता के बाद 30 सामुदायिक कुत्तों की हत्या के मामले में FIR दर्ज

Posted on by Surjeet Singh

जानकारी मिलने के बाद कि धरमपुरी नगरपालिका ने कामगारों को सामुदायिक कुत्तों को घातक पदार्थ वाले इंजेक्शन देने के लिए नियुक्त किया था, जिससे उनकी दर्दनाक मौत हुई, PETA इंडिया और Stray Animal Foundation India (SAFI) ने पूर्व केंद्रीय कैबिनेट मंत्री श्रीमती मेनका संजय गांधी की मध्यस्थता से धरमपुरी पुलिस स्टेशन में प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज कराने में सफलता हासिल की। 

घटनाओं को टाइमस्टैम्प वाले वीडियो फुटेज में रिकॉर्ड किया गया, जिसमें स्पष्ट रूप से दिख रहा है कि आरोपी व्यक्तियों ने पशुओं में घातक पदार्थ का इंजेक्शन लगाया। इंजेक्शन के थोड़ी देर बाद ही कुत्तों की मौत हो जाती है। उसी वीडियो में आरोपी यह स्वीकार करता है कि उसे इन क्रूर और अवैध कार्यों को करने के लिए नियुक्त किया गया था। इसके अलावा, फुटेज में आरोपी शवों को निस्तारण के लिए वाहन में लोड करते भी दिखाई दे रहे हैं।

PETA इंडिया ने FIR दर्ज कराने में मदद के लिए तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक (DGP), श्री बी शिवधर रेड्डी, IPS; जिलाधिकारी एवं कलेक्टर, जगतियाल, श्री बी. सत्य प्रसाद, IAS; धरमपुरी पुलिस स्टेशन के सर्किल इंस्पेक्टर, श्री रामनारसिंह रेड्डी; और धरमपुरी पुलिस स्टेशन के SHO, श्री महेश, के साथ नजदीकी सहयोग किया। FIR भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 325 के तहत दर्ज की गई, जो SAFI फाउंडेशन के क्रूरता निवारण प्रबंधक श्री अदुलापुरम गौतम द्वारा दायर शिकायत पर आधारित है। इसके अलावा धरमपुरी पुलिस स्टेशन में एक और शिकायत भी दर्ज कराई गई है, जिसमें Prevention of Cruelty to Animals (PCA) Act, 1960 की धारा 11(1)(l) को शामिल करने का अनुरोध किया गया है। यह धारा किसी भी पशु (जिसमे सामुदायिक पशु भी शामिल हैं) को हृदय में स्ट्राइकनाइन इंजेक्शन लगाकर या किसी अन्य अनावश्यक क्रूर तरीके से घायल या मारने को संज्ञानात्मक अपराध मानती है।

Animal Birth Control (ABC) Rules, 2023 की धारा 11(19) केवल सामुदायिक कुत्तों को नसबंदी के उद्देश्य से पकड़ने की अनुमति देती है और सामुदायिक पशुओं को उनके मूल स्थान से काही और स्थानांतरित करना या मारना अवैध है। यह स्पष्ट करता है: “कुत्तों को [नसबंदी के बाद] उसी स्थान या क्षेत्र में छोड़ दिया जाएगा जहाँ से उन्हें पकड़ा गया था।” माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने 22 अगस्त 2025 के आदेश में ABC नियमों को बरकरार रखते हुए यह दोहराया कि कुत्तों को ABC Rules, 2023 में निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करते हुए उनके क्षेत्र में वापस छोड़ा जाएगा। 

सामुदायिक कुत्तों को अक्सर क्रूरता का सामना करना पड़ता है, या वे कारों की चपेट में आते हैं और आम तौर पर भूख, बीमारी या चोट से पीड़ित होते हैं। हर साल कई कुत्ते पशु आश्रयों में जाकर रह जाते हैं , जहाँ पर्याप्त अच्छे घरों के अभाव में वे पिंजरों या केनेल्स में जीवन यापन करते हैं। इसका सरल समाधान है: नसबंदी। एक मादा कुत्ते की नसबंदी छह वर्षों में 67,000 कुत्तों को जन्म लेने से रोक सकती है, और एक मादा बिल्ली की नसबंदी सात वर्षों में 420,000 जन्मों को रोक सकती है।

PETA इंडिया अनुशंसा करता है कि पशुओं के प्रति क्रूरता करने वाले व्यक्तियों का मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन किया जाए और उन्हें काउंसलिंग प्रदान की जाए, क्योंकि पशुओं का शोषण गहरे मानसिक विकार का संकेत देता है। शोध दिखाता है कि जो लोग पशुओं पर क्रूरता करते हैं, वे अक्सर आगे चलकर बार बार पराध करते हैं और अन्य पशुओं और इंसानों को भी नुकसान पहुंचाते हैं। Forensic Research & Criminology International Journal में प्रकाशित एक अध्ययन में कहा गया है: “जो लोग पशुओं पर के क्रूरता में लिप्त होते हैं, उनमें अन्य के मुकाबले अपराध करने की संभावना [तीन] गुना अधिक होती है, जिनमें हत्या, बलात्कार, डकैती, हमला, उत्पीड़न, धमकी और नशीली/मादक द्रव्यों का दुरुपयोग शामिल है।”

PETA इंडिया लंबे समय से PCA Act, 1960 को मजबूत करने के लिए अभियान चला रहा है, जिसमें अब भी पुराने और अपर्याप्त दंड शामिल हैं, जैसे कि पहली पशुओं पर क्रूरता का दोषी पाए जाने वाले अपराधियों के लिए अधिकतम केवल ₹50 का जुर्माना होता है (हालांकि BNS, 2023 में कठोर दंड निर्धारित हैं)। केंद्रीय सरकार को भेजी गई PCA अधिनियम में संशोधन की प्रस्तावना में PETA इंडिया ने पशुओं पर क्रूरता के लिए दंड को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाने की सिफारिश की है।

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