PETA इंडिया के हस्तक्षेप के बाद बेमेतरा में बकरे की बलि के मामले में FIR दर्ज
छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के संदी गांव में सिद्धि माता मंदिर के पास होली के अवसर पर होने वाली वार्षिक मंदिर बलि के दौरान एक बकरी की हत्या का वीडियो सामने आने के बाद, जो कथित तौर पर 05 मार्च का है, पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स इंडिया (PETA इंडिया) ने स्थानीय कार्यकर्ता हरीश चौहान की मदद से बेमेतरा पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज करवाई। वीडियो में दिखाया गया है कि एक बकरी का दिनदहाड़े चाकुओं से सिर काटकर वध किया गया जिससे उसे भय और दर्द का सामना करना पड़ा होगा ।
हरीश चौहान द्वारा दी गई शिकायत के बाद PETA इंडिया ने बेमेतरा पुलिस के साथ कॉर्डिनेट करके यह सुनिश्चित किया कि FIR तुरंत दर्ज की जाए। यह FIR भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 325 और धारा 3(5) तथा पशु क्रूरता निवारण अधिनियम (PCA Act), 1960 की धारा 11(1)(a) के तहत दर्ज की गई है।
भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 325 के तहत किसी भी पशु को घायल करना या मारना संज्ञेय अपराध माना जाता है और इसके लिए पाँच वर्ष तक के कारावास, जुर्माने या दोनों का प्रावधान है। कई लोगों द्वारा साझा मंशा के साथ अवैध रूप से पशुओं को मारना भी BNS 2023 की धारा 3(5) के तहत दंडनीय अपराध है। पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 11 “क्रूरता” को परिभाषित करती है और किसी भी पशु को अनावश्यक दर्द या पीड़ा पहुँचाना दंडनीय अपराध बनाती है।
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि पशुओं का वध केवल लाइसेंस प्राप्त बूचड़खानों में ही किया जा सकता है और नगरपालिका अधिकारियों को इस आदेश का पालन सुनिश्चित करना चाहिए। पशु क्रूरता निवारण (स्लॉटर हाउस) नियम, 2001 और खाद्य सुरक्षा एवं मानक (खाद्य व्यवसायों का लाइसेंस और पंजीकरण) विनियम, 2011 के अनुसार, भोजन के लिए पशुओं का वध केवल लाइसेंस प्राप्त बूचड़खानों में ही किया जा सकता है, जहाँ प्रजाति-विशिष्ट बेहोश करने वाले उपकरण उपलब्ध हों।
पशु बलि न केवल पशुओं पर क्रूरता है बल्कि समाज के लिए भी खतरनाक है। यह हमें हिंसा के प्रति असंवेदनशील बनाती है और ऐसी पुरानी मान्यताओं को मजबूत करती है जो प्रगति में बाधा बनती हैं। जिस तरह आज मानव बलि को हत्या माना जाता है, उसी तरह जब भारत AI के दौर में तेजी से आगे बढ़ रहा है, तब पशु बलि जैसी पुरानी प्रथा को समाप्त होना चाहिए। यह हमारे समाज के विकास के लिए आवश्यक है।
