त्रिची में कुत्ते के छोटे बच्चों को मारने और नुकसान पहुँचाने वाली महिला के खिलाफ एफआईआर दर्ज
कुत्ते के दो छोटे बच्चों की हत्या और उसी महिला द्वारा पाँच अन्य बच्चों को कथित रूप से गायब किए जाने की घटना से जुड़े वीडियो और जानकारी मिलने के बाद, PETA इंडिया ने पीपल फॉर एनिमल्स (PFA) त्रिची और त्रिची पुलिस के साथ मिलकर कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की। यह घटना 4 मार्च को त्रिची के कंबरासमपेट्टई इलाके में हुई, जहाँ आरोपी महिला ने सामुदायिक कुत्ते के दो बच्चों को दीवार पर पटककर जानबूझकर मार डाला। यह भी आरोप है कि उसने अन्य छोटे बच्चों को प्लास्टिक बैग में भरकर गायब कर दिया। वे अब भी लापता हैं। स्थानीय कार्यकर्ता और स्वयंसेवक उनकी तलाश कर रहे हैं।
PETA इंडिया ने जियापुरम पुलिस स्टेशन के प्रभारी इंस्पेक्टर श्री गुणसेकरन और सब-इंस्पेक्टर राजकुमार एम की सराहना की, जिन्होंने एफआईआर दर्ज की।
PETA इंडिया के हस्तक्षेप और PFA त्रिची के सदस्यों द्वारा दी गई शिकायत के परिणामस्वरूप, जियापुरम पुलिस स्टेशन ने 6 मार्च को भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 325 और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 11(1)(a) के तहत आरोपी महिला के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज की। बताया गया है कि आरोपी को गिरफ्तार कर मजिस्ट्रेट अदालत में पेश किया गया, जहाँ उसे जमानत नहीं दी गई और 18 मार्च तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। जांच जारी है और लापता बच्चों को ढूंढने के प्रयास किए जा रहे हैं।
PFA त्रिची की सदस्य एडवोकेट अर्चना गांधी, अजय बरथ, विध्या थंगावेलु, रामकुमार, प्रिया, अंबरासी, सदेश परमेश्वरन, एस. कृष्णन और हेमनाथ रुध्रेश ने पुलिस के साथ मिलकर जमीनी स्तर पर काम किया ताकि कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।
भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 325 के तहत किसी भी पशु को घायल करना या मारना एक संज्ञेय अपराध है, जिसके लिए पाँच साल तक की सजा, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। वहीं, पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 11(1)(a) के तहत किसी भी पशु (जिसमें सामुदायिक कुत्ते भी शामिल हैं) को नुकसान पहुँचाना या मारना दंडनीय अपराध है।
PETA इंडिया यह भी बताता है कि कई हिंसक अपराधियों का जानवरों के प्रति क्रूरता का इतिहास रहा है। Forensic Research and Criminology International Journal में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, “जो लोग पशुओं पर क्रूरता करते हैं, उनके द्वारा हत्या, बलात्कार, लूट, हमला, उत्पीड़न, धमकी और नशे से जुड़े अन्य अपराध करने की संभावना तीन गुना अधिक होती है।” इसके पीछे गुस्सा, मनोरंजन, नियंत्रण, डर, नफरत, बदला, नकल और यौन संतुष्टि जैसे कारण हो सकते हैं।
