PETA इंडिया की शिकायत के बाद, मथुरा में नन्हे कुत्ते को पीट-पीटकर मारने वाले आरोपी व्यक्ति के खिलाफ FIR दर्ज
मथुरा के सदर बाजार स्थित खटीक मोहल्ला में कुत्ते के छोटे से बच्चे की हत्या के परेशान करने वाले मामले की जानकारी मिलने के बाद, पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स इंडिया (PETA इंडिया) ने मथुरा पुलिस के साथ मिलकर यह सुनिश्चित किया कि आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की जाए। यह घटना कथित तौर पर 4 मार्च (होली) की शाम को मथुरा के सदर बाजार के खटीक मोहल्ला में हुई, जहां इलाके के निवासी अन्नी नामक व्यक्ति ने कुत्ते के छोटे से बच्चे को मोटे बांस/लकड़ी की लाठी से पीट-पीटकर उसकी जान ले ली।
स्थानीय निवासियों से मिली जानकारी के अनुसार, आरोपी ने बिना किसी उकसावे के उस बच्चे पर हमला किया और उस छोटे से असहाय बच्चे पर कई बार जोर-जोर से वार किया। आरोपी तब तक कुत्ते को पीटता रहा जब तक कि गंभीर चोटों के कारण उसकी मौत नहीं हो गई। इस घटना को इलाके के कई निवासियों ने देखा, जिन्होंने बीच-बचाव कर हमले को रोकने की कोशिश की, लेकिन आरोपी घटना को अंजाम देने के बाद मौके से फरार हो गया।
मामले की जानकारी तुरंत पुलिस को दी गई और अब सदर बाजार पुलिस स्टेशन द्वारा भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 325 तथा पशु क्रूरता निवारण अधिनियम (PCA Act), 1960 की धारा 11(1)(l) के तहत FIR दर्ज की गई है।
भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 325 के तहत किसी पशु को मारना, जहर देना, घायल करना या उसे बेकार बना देना संज्ञेय अपराध है, जिसके लिए पाँच साल तक की सजा, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 11(1)(l) के तहत किसी भी पशु को विकृत करना या मारना संज्ञेय अपराध है।
PETA इंडिया की सिफारिश है कि पशु उत्पीड़न करने वाले लोगों का मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन कराया जाए और उन्हें काउंसलिंग दी जाए, क्योंकि पशुओं के साथ क्रूरता करना गहरी मानसिक समस्या का संकेत होता है। शोध बताते हैं कि जो लोग पशुओं के साथ क्रूरता करते हैं, वे अक्सर बार-बार ऐसे अपराध करते हैं और आगे चलकर अन्य पशुओं, यहां तक कि इंसानों को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। Forensic Research & Criminology International Journal में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, “जो लोग पशुओं के प्रति क्रूरता करते हैं, उनके द्वारा हत्या, बलात्कार, डकैती, हमला, उत्पीड़न, धमकी और नशीले पदार्थों के दुरुपयोग जैसे अन्य अपराध करने की संभावना तीन गुना अधिक होती है।”
