कुत्ते ‘आवारा’ नहीं, दिल्लीवाले हैं — PETA इंडिया का नया बिलबोर्ड अभियान नागरिकों को याद दिलाता है कि यह शहर उनका भी है

Posted on by Surjeet Singh

NCR में सामुदायिक कुत्तों और उनकी देखभाल करने वालों के साथ हो रही क्रूरता की घटनाओं को देखते हुए, PETA इंडिया ने राजधानी में बिलबोर्ड लगाए हैं। इन बिलबोर्ड्स के ज़रिये नागरिकों से अपील की गई है कि वे इन कुत्तों की रक्षा करें और उनके साथ करुणा से पेश आएं — क्योंकि यह भी असली दिल्लीवाले हैं।

सामुदायिक कुत्ते स्वभाव से ही बुद्धिमान और संवेदनशील होते हैं और वे भी इस शहर में ठीक हमारी तरह जीवन की जद्दोजहद कर रहे हैं। वे भी हमारे अन्य पड़ोसियों जितनी ही करुणा और सम्मान के पात्र हैं। PETA इंडिया नागरिकों से अपील करता है कि वे समाज के इन अहम सदस्यों की रक्षा करें और किसी भी प्रकार की क्रूरता की घटना तुरंत PETA इंडिया, अन्य पशु संरक्षण संगठनों या पुलिस को रिपोर्ट करें।

यह बिलबोर्ड नई दिल्ली में पटियाला हाउस थाने के बाहर मेन तिलक मार्ग पर लगाया गया है और जल्द ही दिल्ली में ऑटो रिक्शा की हुड्स, बसों और मेट्रो स्टेशनों पर भी प्रदर्शित होगा।

PETA इंडिया प्राधिकरणों से यह भी अपील करता है कि वे पशु जन्म नियंत्रण (ABC) नियम, 2023 के तहत नसबंदी कार्यक्रमों को प्रभावी रूप से लागू करें, बिना पंजीकरण वाली पालतू पशु दुकानों और ब्रीडरों को बंद करें और जनता को शहर के भीड़भाड़ वाले पशु आश्रयों से पशु गोद लेने के लिए प्रोत्साहित करें।

हर बार जब कोई व्यक्ति ब्रीडर या पालतू पशु की दुकान से कुत्ता खरीदता है, तो वह एक बेघर पशु के घर पाने का अवसर छीन लेता है। इसलिए, PETA इंडिया पशु-अभिभावकों से आग्रह करता है कि वे अपने साथी पशुओं की नसबंदी करवाएं, ताकि पहले से जन्म ले चुके बच्चों को सुरक्षित और आरामदायक घर मिल सके।

गोद लेना है करुणा, ख़रीदना है क्रूरता!