PETA इंडिया की शिकायत के बाद धारवाड़ में अवैध मेढ़ा लड़ाई के मामले में प्राथमिकी दर्ज
धारवाड़ में नवलगुंड में फरवरी की शुरुआत में आयोजित होने वाली मेढ़ा लड़ाई के बारे में एक पोस्टर प्राप्त होने के बाद PETA इंडिया ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए धारवाड़ पुलिस को शिकायत भेजी और अनुरोध किया कि अवैध कार्यक्रम को होने से रोकने के लिए निवारक कार्रवाई की जाए। PETA इंडिया की शिकायत के बाद धारवाड़ पुलिस ने निवारक कदम उठाते हुए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 168 के तहत आयोजकों (जिनके कार्यक्रम 06, 07 और 08 फरवरी को होने की सूचना थी) को नोटिस जारी किया। पुलिस द्वारा आयोजकों के साथ प्रस्तावित अवैध कार्यक्रमों के संबंध में एक बैठक भी की गई। संबंधित कानूनों की जानकारी देने वाले पर्चे भी जनता में वितरित किए गए। हालांकि, इन निवारक कदमों के बावजूद मेढ़ा लड़ाई होने की सूचना मिली। इसके बाद PETA इंडिया द्वारा प्राथमिकी दर्ज करने की मांग करते हुए की गई अगली शिकायत पर नवलगुंड पुलिस थाने में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 291 तथा पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 11(1)(n) और 11(1)(m)(ii) के अंतर्गत प्राथमिकी दर्ज की गई।
PETA इंडिया अवैध और क्रूर मेढ़ा लड़ाई को रोकने के लिए त्वरित कार्रवाई करने तथा इस अपराध में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के लिए धारवाड़ पुलिस की सराहना करता है। इस प्रकार के आयोजन हिंसक और अवैध होते हैं। मेढ़ा लड़ाई में भयभीत पशुओं को उकसाकर खून-खराबे वाली लड़ाई में धकेला जाता है, जिससे अक्सर हड्डियाँ टूट जाती हैं, घाव हो जाते हैं और उन्हें अत्यधिक पीड़ा सहनी पड़ती है।
मेढ़ा लड़ाई में दो नर भेड़ों को एक-दूसरे के खिलाफ हिंसक और अक्सर खून-खराबे वाली भिड़ंत में उतारा जाता है। इन पशुओं को मारकर और उकसाकर तब तक लड़ाया जाता है जब तक किसी एक को विजेता घोषित नहीं कर दिया जाता। यह प्रथा उन्हें गंभीर शारीरिक और मानसिक नुकसान पहुँचाती है।
अपनी शिकायत में PETA इंडिया ने बताया कि पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 11(1)(n) के तहत पशुओं की लड़ाई के लिए किसी स्थान का आयोजन करना, उसे बनाए रखना, उपयोग करना या उसके प्रबंधन में शामिल होना एक संज्ञेय अपराध है। इसी अधिनियम की धारा 11(1)(m)(ii) के अनुसार किसी पशु को दूसरे पशु से लड़ने के लिए उकसाना भी अपराध है।
इसके अलावा PETA इंडिया ने यह भी रेखांकित किया कि कई व्यक्तियों द्वारा समान उद्देश्य से मिलकर पशुओं को लड़ाने के लिए उकसाना भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 3(5) के अंतर्गत दंडनीय अपराध है। साथ ही, भारतीय न्याय संहिता की धारा 325 के तहत किसी पशु को दुर्भावनापूर्वक मारना या गंभीर रूप से घायल करना जो ऐसी लड़ाइयों के दौरान अक्सर होता है, पाँच वर्ष तक के कारावास, जुर्माना या दोनों से दंडनीय है। ऐसे आयोजन पशुओं और आम जनता दोनों के लिए खतरा पैदा करते हैं और भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 3(5), 125, 291 और 325 के अंतर्गत भी अपराध माने जाते हैं।
