विश्व खाद्य दिवस से पहले इंसानी माँस हेतु व्यक्ति को जिंदा ‘भूना’ गया
लखनऊ – बुधवार को, वर्ल्ड फ़ूड डे (16 अक्टूबर) से पहले, लखनऊ में PETA इंडिया और आश्रय फाउंडेशन का एक समर्थक, जो “खून से सना” और “झुलसा हुआ” होगा, को एक चारकोल ग्रिल पर “भूना” गया। इस चौंकाने वाले दृश्य ने यह संदेश दिया कि सभी पशु, जिनमें इंसान भी शामिल हैं, मांस से बने होते हैं, हम सभी दर्द और भावनाओं को महसूस करने की क्षमता रखते हैं, और मांस खाना यानि संवेदनशील जीवों के शव खाना है, वह पशु जो अपनी ज़िंदगी को महत्व देते थे और मरना नहीं चाहते थे।
जिस तरह हम में से अधिकतर लोग कभी इंसान का माँस जाने की कल्पना भी नहीं कर सकते, उसी तरह किसी को मुर्गे का माँस खाने की भी ज़रूरत भी नहीं है। PETA इंडिया उन राहगीरों से अपील कर रही है जो इंसानी माँस की कल्पना से विचलित हैं कि वे किसी पशु का मांस खाने के बजाय पोषण से भरपूर और स्वादिष्ट वीगन भोजन का विकल्प चुनें।
वीगन भोजन पशुओं को भारी पीड़ा से बचाता है। जैसा कि PETA इंडिया ने अपनी जाँच वीडियो “ग्लास वॉल्स” में दिखाया है, अंडों के लिए इस्तेमाल की जाने वाली मुर्गियों को इतनी छोटी पिंजरों में बंद किया जाता है कि वे पंख तक नहीं फैला पातीं। गायों और भैंसों को बूचड़खानों में ले जाने के लिए इतने अधिक संख्या में वाहनों में ठूंसा जाता है कि परिवहन के दौरान उनकी हड्डियां टूट जाती हैं, और फिर उन्हें घसीटते हुए वध स्थान तक ले जाया जाता है। सूअरों को जिंदा रहते दिल में छुरा घोंपा जाता है, वे दर्द से बिलखते हैं और चीखते रहते हैं। मछलियों को पानी से निकाल कर नावों पर तड़फ तड़फ कर दम घुटने से मरने के लिए छोड़ दिया जाता है या जीवित अवस्था में चीर दिया जाता है।
अंडा उद्योग में, नवजात नर चूजे अंडे नहीं दे सकते इसलिए उन्हें पीसकर, जलाकर या ज़िंदा ज़मीन में दफन कर मार दिया जाता है। उसी तरह दुग्ध उद्योग में, नर बछड़ों को अक्सर छोड़ दिया जाता है, भूखा मारा जाता है, या मार दिया जाता है क्योंकि वे दूध नहीं दे सकते। इसके अलावा, भोजन के लिए पशुओं को पालना जल प्रदूषण और भूमि क्षरण के प्रमुख कारणों में से एक है। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि जलवायु संकट के सबसे बुरे प्रभावों से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर वीगन भोजन अपनाना आवश्यक है।
वीगन जीवनशैली अपनाने वाला हर कीयक्ति प्रति वर्ष लगभग 200 पशुओं की जान बचाता है। इसके अलावा, वीगन भोजन करने वाले लोगों में हृदय रोग, मधुमेह और कैंसर जैसी बीमारियों का ख़तरा कम हो जाता है। भोजन के लिए पशुओं को पालना जल प्रदूषण और भूमि उपयोग का एक मुख्य कारण भी है। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में यह निष्कर्ष निकाला गया है कि जलवायु संकट के सबसे गंभीर प्रभावों से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर वीगन आहार अपनाना ज़रूरी है। PETA इंडिया उन लोगों के लिए एक निःशुल्क वीगन स्टार्टर किट उपलब्ध कराता है जो यह बदलाव अपनाने के लिए तैयार हैं।

