‘विश्व पर्यावरण दिवस’ से पहले रायपुर में एक जोड़े ने पृथ्वी जैसे रंगों में रंगकर जनता से वीगन भोजन अपनाने की अपील की

Posted on by Shreya Manocha

‘विश्व पर्यावरण दिवस’ से ठीक पहले, PETA इंडिया और वीगन्स ऑफ छत्तीसगढ़ (VOC) के दो समर्थकों – एक पुरुष और एक महिला – ने अपने पूरे शरीर को नीला और हरा रंग लगाकर धरती जैसा रूप धारण किया और रायपुर की सड़कों पर निकलकर जनता को यह याद दिलाया कि भोजन के लिए किया जाने वाला पशु-पालन प्रदूषण और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के सबसे बड़े कारणों में से एक है। दोनों समर्थकों के पास “जलवायु परिवर्तन से लड़ना है तो भोजन बदलना होगा – वीगन बनिए!” जैसे संदेश वाले पोस्टर थे और उन्होंने पर्यावरण की रक्षा करना चाहने वाले लोगों को स्वादिष्ट वीगन भोजन अपनाने के लिए प्रेरित किया।

भोजन के लिए पशु-पालन के चलते भारी मात्रा में भूमि, ऊर्जा और पानी की खपत होती है और यह बड़ी मात्रा में ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन का कारण बनता है, जो पर्यावरणीय विनाश की प्रमुख वजह है। हम जनता से अपील करते हैं कि वे अपने लिए, पशुओं के लिए और इस ग्रह के लिए वीगन भोजन अपनाएं।

मांस, अंडा और दूध के लिए पशुओं का पालन पर्यावरण को गंभीर रूप से नुकसान पहुँचाता है। इससे वायु और जल प्रदूषण बढ़ता है, समुद्री जीवन समाप्त होता है, जंगलों का विनाश होता है और कई प्रजातियाँ विलुप्त होने की कगार पर पहुँच जाती हैं। यह उद्योग दुनिया के एक-तिहाई ताज़ा जल संसाधनों का उपयोग करता है। कुछ अनुमानों के अनुसार, पशु-पालन और उनसे जुड़े उत्पादों के कारण जितनी ग्रीनहाउस गैसें उत्सर्जित होती हैं, वह विश्व की सभी परिवहन प्रणालियों से अधिक होती हैं। ‘ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय’ के शोधकर्ताओं ने पाया है कि जो व्यक्ति वीगन बनता है, वह अपने भोजन से जुड़े कार्बन फुटप्रिन्ट को लगभग 73% तक घटा सकता है। इस प्रकार, पर्यावरण की रक्षा के लिए वीगन जीवनशैली अपनाना संभवतः सबसे प्रभावी उपाय है।

वीगन भोजन अपनाने से पशुओं को अत्यंत पीड़ा से बचाया जा सकता है। जैसा कि PETA इंडिया की वीडियो जांच ग्लास वॉल्स में सामने आया है, अंडा उद्योग में मुर्गियों को इतने छोटे पिंजरों में कैद किया जाता है कि वे अपने पंख भी नहीं फैला सकतीं। डेयरी और मांस उद्योग में गायों और भैंसों को वाहनों में इस कदर ठूंस-ठूंस कर भरा जाता है कि बूचड़खानों पहुँचने से पहले ही उनकी हड्डियाँ टूट जाती हैं। सुअरों के होश में रहते हुए उनके दिल में चाकू घोंप दिया जाता है जिस दौरान वे तड़पते हुए चिल्लाते हैं। मछलियों को समुद्र से निकालकर नावों के डेक पर फेंक दिया जाता है, जहाँ वे दम घुटने से मरती हैं या जीवित रहते हुए ही उन्हें काट दिया जाता है। अंडा उद्योग में नवजात नर चूजों को, जो अंडे नहीं दे सकते, अन्य अनचाहे चूजों के साथ पीसकर, जलाकर या ज़िंदा दफन कर बेरहमी से मार दिया जाता है। इसी तरह डेयरी उद्योग में नर बछड़ों को जो दूध नहीं दे सकते अक्सर जन्म के तुरंत बाद उनकी माताओं से अलग कर दिया जाता है और उन्हें या तो भूखा मरने के लिए छोड़ दिया जाता है या मार दिया जाता है।

 

हर वीगन व्यक्ति हर साल लगभग 200 पशुओं की जान बचाता है। इसके साथ ही, जो लोग वीगन भोजन अपनाते हैं, उनमें हृदय रोग, मधुमेह और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा भी कम हो जाता है। भोजन के लिए पशुओं का पालन जल प्रदूषण और ज़मीन के अत्यधिक उपयोग का एक प्रमुख कारण है। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार, जलवायु संकट के सबसे बुरे प्रभावों से बचने के लिए वैश्विक स्तर पर वीगन जीवनशैली अपनाना ज़रूरी है। जो लोग बदलाव के लिए तैयार हैं, उनके लिए PETA इंडिया नि:शुल्क वीगन स्टार्टर किट उपलब्ध कराता है।

पृथ्वी को बचाएं, वीगन बनने की प्रतिज्ञा लें!