आजमगढ़: PETA इंडिया की शिकायत के बाद कार्रवाई : संरक्षित पक्षियों का शिकार करने वाले व्यक्ति के खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर
एक सोशल मीडिया पोस्ट (जो अब हटा दी गई है) के जवाब में, जिसमें एक व्यक्ति द्वारा कई ब्लू रॉक डव्स और येलो-फुटेड ग्रीन पिजन्स जो वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची II के अंतर्गत संरक्षित प्रजातियाँ हैं तथा स्पॉटेड डव्स जो अधिनियम की अनुसूची IV के अंतर्गत आती हैं, का शिकार और हत्या किए जाने की बात सामने आई, PETA इंडिया ने आजमगढ़ वन प्रभाग और पुलिस अधिकारियों के साथ मिलकर प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज करवाई। आरोपी द्वारा इंस्टाग्राम पर साझा की गई तस्वीर में मृत पक्षियों को एक राइफल के बगल में रखा दिखाया गया था। इस मामले में न्याय हो इसके लिए PETA इंडिया ने आजमगढ़ पुलिस के साथ मिलकर एफआईआर में कुछ महत्वपूर्ण और सख्त धाराएं जुड़वाईं, जो 8 अगस्त को पहली बार रिपोर्ट दर्ज होने के समय शामिल नहीं की गई थीं। पुलिस के अनुसार, आरोपी वर्तमान में सरायमीर में नहीं रह रहा है, और उसे उसके परिवार के माध्यम से थाने में पेश होने के लिए समन भेजा गया है।
शुरुआत में, एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 9 और 51 के तहत वन उप-मंडल अधिकारी की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई थी। PETA इंडिया के हस्तक्षेप के बाद अब एफआईआर में कुछ अन्य कड़ी धाराएं जोड़ी गई हैं जैसे आर्म्स एक्ट, 1959 की धारा 27(1); भारतीय दंड संहिता (BNS), 2023 की धारा 325; और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 11(1)।
आर्म्स एक्ट, 1959 की धारा 27(1) अवैध रूप से हथियार बनाने और उपयोग करने पर कम से कम तीन वर्ष की कारावास की सजा (जो सात वर्ष तक बढ़ सकती है) और जुर्माने का प्रावधान करती है। वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 9 संरक्षित वन्य पशुओं के शिकार पर रोक लगाती है। धारा 51 अनुसूची II और IV की प्रजातियों के विरुद्ध अपराध को दंडनीय बनाती है जिसमें एक लाख रुपये तक का जुर्माना, तीन वर्ष तक की जेल, या दोनों हो सकते हैं। BNS, 2023 की धारा 325 किसी भी पशु को अपंग करने या मारने को संज्ञेय अपराध घोषित करती है, जिसमें पांच वर्ष तक की जेल, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 11(1) पशुओं के साथ क्रूर व्यवहार को दंडनीय अपराध मानती है, विशेष रूप से धारा 11(1)(l), जो किसी भी पशु को मारने या अपंग करने को संज्ञेय अपराध घोषित करती है।
जब किसी पशु का शिकार किया जाता है, तो वह पहले बुरी तरह से घायल होता है और फिर धीरे-धीरे अत्यधिक पीड़ा के साथ मर जाता है। हम वन मंडल अधिकारी, आजमगढ़ श्री जी डी मिश्रा और थाना प्रभारी, सरायमीर पुलिस स्टेशन श्री निहार नंदन का इस मामले में तत्परता से एफआईआर दर्ज करने और यह स्पष्ट संदेश देने के लिए धन्यवाद करते हैं कि पशुओं पर अत्याचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
