आमेर के किले पर एक और हाथी के हमले में एक व्यक्ति के अस्पताल में भर्ती होने के बाद, PETA इंडिया ने शोषणकारी हाथी सवारी प्रथा को समाप्त करने की अपनी अपील फिर से दोहराई
राजस्थान के आमेर के किले में हाल ही में ‘दिलरुबा’ और ‘चंचल’ (क्रमशः हाथी सवारी संख्या 41 और 83) नामक दो हथिनियों के आपसी संघर्ष और हमले की घटना सामने आने के बाद, PETA इंडिया ने राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री भजन लाल शर्मा जी से आमेर के किले और हाथी गांव में हाथी सवारी पर प्रतिबंध लगाने और सभी हाथियों को अभयारण्यों में पुनर्वासित करने की अपील की है। इसके लिए शुरुआत उन हाथियों से करने का आग्रह किया है जो हिंसक घटनाओं में शामिल रहे हैं। हाल ही में सामने आई इस घटना में चंचल गिर पड़ी थी, जिससे वहाँ से गुजर रहे मोटरसाइकिल सवार व्यक्ति को चोट लगी और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया।
इसी तरह मई 2024 में PETA इंडिया ने आमेर के किले में पर्यटक सवारी के दौरान एक हाथी द्वारा दूसरे हाथी को धक्का देने की वीडियो फुटेज जारी की थी। फरवरी 2024 में गौरी नामक हथिनी ने एक पर्यटक को अपनी सूंड में लपेटकर ज़मीन पर पटक दिया, जिससे उस पर्यटक की टांग टूट गई। इससे पहले, अक्टूबर 2022 में उसी हथिनी ने आमेर के किले के ठीक बाहर एक स्थानीय दुकानदार पर हमला किया था, जिसके कारण उस दुकानदार को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था 2019 में, दो हाथियों (संख्या 44 और 74) के बीच झगड़ा हुआ था, जबकि वे दोनों पर्यटकों को ले जा रहे थे।
वन विभाग द्वारा 2016 में वन्य जीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के उल्लंघन के तहत दर्ज एफआईआर में बताया गया है कि आमेर के किले के कई हाथी, जिनमें दिलरुबा और गौरी भी शामिल हैं, राजस्थान में अवैध रूप से रखे गए हैं, और वर्तमान में जो उनके अभिभावक है उनको हाथियों का मालिकाना हक नहीं बल्कि केवल ‘अंतरिम हिरासत’ दी गई है। वास्तव में, सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त आंकड़े दिखाते हैं कि 2023 में आमेर के किले में सवारी के लिए इस्तेमाल होने वाले 79 हाथियों में से 38 हाथियों – लगभग 50% – के पास वैध स्वामित्व प्रमाण पत्र नहीं थे, जिससे राजस्थान अवैध वन्यजीव तस्करी का केंद्र बन गया है।
यह दुखद घटना, हाथियों के उस तनाव और पीड़ा की याद दिलाती है, जो उन्हें जबरन सवारी देने के लिए मजबूर किए जाने हेतु दी जाती हैं। ये बुद्धिमान और सामाजिक पशु स्पष्ट रूप से यह संदेश दे रहे हैं और सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा भी पैदा कर रहे हैं। हम राजस्थान के माननीय मुख्यमंत्री जी से आग्रह करते हैं कि हाथियों की सवारी को तुरंत पर्यावरण के अनुकूल मोटराइज्ड वाहनों से बदलने के लिए कदम उठाएं, जैसा कि भारत के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की प्रोजेक्ट एलीफेंट डिवीजन द्वारा गठित समिति की रिपोर्ट में भी सिफारिश की गई थी।
आमेर के किले में सवारी के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले हाथियों के कई निरीक्षणों में पशु- सुरक्षा कानूनों का उल्लंघन करते हुए व्यापक क्रूरता देखि गई है। निरीक्षकों ने देखा कि आंशिक रूप से अंधे हाथियों को पर्यटकों को सवारी देने के लिए मजबूर किया जाता है, उन पर हथियारों और तेज कांटों वाली जंजीरों का उपयोग किया जाता है, कान और दांतों में छेद किए गए थे, हाथियों को लंबे समय तक जंजीरों में बांध कर रखा जाता है और जब उनका इस्तेमाल हाथी सवारी में नहीं होता तो उन्हें गंभीर कैद में रखा जाता है। इसके अलावा, हाथी तपेदिक (टीबी) के सामान्य वाहक होते हैं, जो मनुष्यों में संक्रमण फैला सकते हैं। PETA इंडिया ने पहले यह भी उजागर किया है कि परीक्षण के दौरान जिन हाथियों में टीबी के सकारात्मक लक्षण मिले थे उनसे अभी भी सवारी कारवाई जा रही है।
भारत की वन्यजीव धरोहर को देखने आने वाले कई पर्यटक इस बात से बेहद आहत और नाराज़ हैं कि आज भी सवारी के लिए हाथियों का शोषण किया जा रहा है। जैसे-जैसे इस क्रूरता के प्रति जागरूकता बढ़ रही है, अनेक ट्रैवल कंपनियाँ ऐसी प्रथाओं से अपना नाता तोड़ रही हैं। 100 से अधिक एजेंसियाँ जिनमें AdventureLink, Costco Travel, Intrepid Travel, Thomas Cook, TUI Group और यहाँ तक कि दुनिया की सबसे बड़ी ट्रैवल वेबसाइट्स में से एक Tripadvisor भी शामिल है, ने अपने यात्रा कार्यक्रमों में हाथी सवारी को शामिल न करने का संकल्प लिया है।
