करीब 50 भारतीय मंदिर मशीनी हाथियों को अपनाकर बदलाव की ओर बढ़ रहे हैं, वहीं माधुरी को कैद में रखने का फैसला पशु कल्याण में पीछे की ओर कदम

Posted on by Erika Goyal

हाथियों और हाथियों के कल्याण का समर्थन करने वाले लोगों की ओर से PETA इंडिया ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा अपनी याचिका खारिज किए जाने पर गहरी निराशा जताई है। इस याचिका में बीमार हथिनी माधुरी (जिन्हें महादेवी के नाम से भी जाना जाता है) को जामनगर स्थित वनतारा के राधे कृष्णा टेंपल एलिफेंट वेलफेयर ट्रस्ट (RKTEWT) में दोबारा भेजकर उनका पुनर्वास करने की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद माधुरी कोल्हापुर के नंदनी मठ के एक उदास और खाली शेड में अकेली ही रहेंगी। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त उच्च-स्तरीय समिति, बॉम्बे हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद उन्हें वहां से हटाया गया था। PETA इंडिया का मानना है कि यह फैसला हाथियों के कल्याण को आगे बढ़ाने का एक खोया हुआ अवसर है। ऐसा उस समय हुआ है, जब भारत के करीब 50 मंदिरों ने असली हाथियों के आकार के मशीनी हाथियों को अपनाया है। इससे साबित होता है कि बुद्धिमान और सामाजिक स्वभाव वाले जंगली पशुओं को जंजीरों में बांधकर या कैद में रखे बिना भी धार्मिक परंपराओं का सम्मान किया जा सकता है।

पटाखों की डरावनी तेज़ आवाज़ों के बीच माधुरी के मठ लौटने का वीडियो

इस फैसले का मतलब है कि माधुरी मठ में ही रहेंगी, जहां उन्होंने 33 साल तक जंजीरों में बंधकर और अकेलेपन में बिताए। सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त उच्च-स्तरीय समिति (HPC) की एक उप-समिति ने भी अपने निरीक्षण में पाया था कि यह जगह लंबे समय तक उनकी देखभाल के लिए उपयुक्त नहीं है। RKTEWT में पुनर्वास के दौरान माधुरी को आखिरकार जंजीरों से आज़ादी मिली थी। वहां उनकी दोस्ती रेस्क्यू कर लाई गई एक अन्य हथिनी शांति से हुई और उन्हें गठिया, हड्डियों में फ्रैक्चर और पैरों की लंबे समय से चली आ रही समस्याओं जैसी गंभीर और दर्दनाक तकलीफों के लिए विशेष पशु चिकित्सा उपचार मिला। 11–12 सितंबर को कोल्हापुर लौटाए जाने के बाद PETA इंडिया ने पाया कि माधुरी को फिर उसी शेड में अकेले बांधकर रखा जा रहा है, जहां से उन्हें पहले हटाया गया था। शेड की दीवारों पर पेड़ों की तस्वीरें बनाई गई हैं, जबकि RKTEWT में उन्हें असली प्राकृतिक वातावरण मिलता था।

हाथी बेहद बुद्धिमान और सामाजिक पशु होते हैं। खास तौर पर मादा हाथी स्वाभाविक रूप से अपने परिवार के करीबी समूहों में रहती हैं और उनके बीच गहरे व लंबे समय तक बने रहने वाले रिश्ते होते हैं। सामाजिक मेलजोल से दूर रखने पर उन्हें गंभीर मानसिक तनाव हो सकता है। वहीं, जंजीरों में बांधकर रखना, कठोर सतह पर लंबे समय तक खड़ा रखना और पर्याप्त व्यायाम का अवसर न देना उनके लिए गंभीर शारीरिक समस्याएं पैदा कर सकता है। माधुरी जैसी हथिनी, जो पहले से ही जोड़ों और पैरों की पुरानी समस्याओं से जूझ रही हैं, उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए उचित पशु चिकित्सा देखभाल, स्वतंत्र रूप से घूमने की आज़ादी, प्राकृतिक वातावरण और पानी तक पहुंच तथा अन्य हाथियों के साथ मेलजोल के अवसर बेहद ज़रूरी हैं।

HPC की उप-समिति ने मठ का निरीक्षण किया था। इस समिति में HPC, केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण और महाराष्ट्र के मुख्य वन्यजीव संरक्षक के प्रतिनिधि शामिल थे। निरीक्षण में पाया गया कि माधुरी को व्यायाम और अन्य हाथियों के साथ मेलजोल के पर्याप्त अवसर नहीं मिलते। वहां इंसानों का हस्तक्षेप बहुत अधिक है, माधुरी के प्रस्तावित चलने के रास्ते में तारकोल की सड़कें हैं और साल भर पानी उपलब्ध रहने वाले स्रोत तक पहुंचने में कठिनाई होती है। पानी के दूषित होने का खतरा भी है और विशेष पशु चिकित्सा सुविधाएं भी पर्याप्त नहीं हैं। रिपोर्ट में यह भी दर्ज किया गया कि मठ के अधिकारियों ने खुद इस जगह को “पूरी तरह धार्मिक उद्देश्यों के लिए” बताया था और यह स्वीकार किया था कि “मठ में माधुरी के पुनर्वास की ज़रूरतों को पूरा नहीं किया जा रहा है।”

में RKTEWT में हुई संयुक्त चिकित्सकीय जांच में माधुरी को ऑस्टियोआर्थराइटिस, हड्डियों के ऊतकों के क्षरण और तनाव के कारण हड्डियों में कई जगह फ्रैक्चर होने की पुष्टि हुई। जांच में शांति के साथ उनके गहरे सामाजिक जुड़ाव का भी पता चला। दिसंबर में HPC ने खुद कहा था कि चिकित्सकीय राय “देखभाल को लगातार जारी रखने पर ज़ोर देती है।” समिति ने यह चेतावनी भी दी थी कि माधुरी को दूसरी जगह ले जाने से उनकी हालत फिर बिगड़ सकती है या उनका शारीरिक स्वास्थ्य खराब हो सकता है। HPC ने 3 जून 2025 को माधुरी के स्थायी पुनर्वास का आदेश दिया था, जिसके तहत उन्हें RKTEWT में रखा जाना था। इस फैसले को बाद में 16 जुलाई 2025 को बॉम्बे हाई कोर्ट और 28 जुलाई 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा था।

भारत भर में मंदिर खुद करुणा पर आधारित बदलाव की अगुवाई कर रहे हैं। वे जीवित हाथियों का शोषण किए बिना अपनी प्रिय धार्मिक परंपराओं को बनाए रखने के लिए आधुनिक तकनीक अपना रहे हैं। करीब 50 मंदिरों ने असली हाथी के आकार के मशीनी हाथियों को अपनाया है। ये हाथी कैद, जंजीरों, शोर-शराबे वाले जुलूसों और दूसरे हाथियों से अलग किए जाने के कारण होने वाली तकलीफ के बिना धार्मिक समारोहों में हिस्सा ले सकते हैं।

PETA इंडिया माधुरी के स्थायी पुनर्वास के लिए अपना प्रयास जारी रखने का संकल्प लेता है। PETA चाहता है कि माधुरी को ऐसे उपयुक्त हाथी आश्रयस्थल में रखा जाए, जहां उन्हें विशेष पशु चिकित्सा उपचार, जंजीरों से आज़ादी, पर्याप्त व्यायाम, प्राकृतिक वातावरण और पानी तक पहुंच तथा दूसरे हाथियों के साथ रहने और मेलजोल के सार्थक अवसर मिल सकें।

हथिनी माधुरी को उसके अभयारण्य वाले घर में वापस लाने में मदद करें।