अहिल्यानगर: PETA इंडिया की शिकायत के बाद बैलगाड़ी और घोड़ों की अवैध दौड़ पर रोक लगाई गई
4 मई 2025 को होने वाली एक अवैध बैलगाड़ी और घोड़ा दौड़ की जानकारी एक जागरूक व्यक्ति से मिलने पर, पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (PETA) इंडिया ने तुरंत अहिल्यानगर पुलिस को इसकी सूचना दी। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आयोजकों को सख्त चेतावनी दी, जिसके बाद यह दौड़ रद्द कर दी गई। इस कार्रवाई के चलते कई बैल और घोड़े अनावश्यक दर्द और शोषण से बच गए। पुलिस की चेतावनी के बाद आयोजकों ने न केवल कार्यक्रम रद्द किया, बल्कि इस फैसले की सूचना पंजीकृत प्रतिभागियों को भी भेज दी।
बैलगाड़ी और घोड़ा दौड़ जैसे आयोजन पशुओं को गंभीर शारीरिक और मानसिक कष्ट पहुँचाते हैं। इनमें भाग लेने वाले लोग अक्सर पशुओं को जबरन दौड़ाने के लिए उन पर वार करते हैं और हथियारों का इस्तेमाल करते हैं, जिससे उन्हें चोटें लगती हैं और मानसिक आघात होता है। ये पशु पहले से ही कठिन परिस्थितियों में काम करने को मजबूर होते हैं, और इन्हें थकावट की हद पार कर जबरन दौड़ाना और पीटना पूरी तरह अस्वीकार्य है। हम अहिल्यानगर पुलिस, विशेष रूप से श्रीरामपुर के उप-विभागीय पुलिस अधिकारी डॉ. बसवराज शिवपुंजे की सराहना करते हैं, जिन्होंने कानून का पालन करते हुए पशुओं को इस अत्याचार से बचाया।
PETA इंडिया द्वारा की गई जांच में यह दिल दहला देने वाला सच सामने आया है कि बैलगाड़ी दौड़ों के दौरान पशुओं को तेज़ दौड़ाने के लिए नुकीली कीलों वाले लकड़ी के डंडों से बेरहमी से पीटा जाता है। तपती गर्मी में जब ये थककर लड़खड़ाने लगते हैं, तो उनकी पूंछ को इतनी जोर से मरोड़ा और तोड़ा जाता है कि वे दर्द से कराह उठते हैं, और उनके शरीर पर गहरे ज़ख्मों से खून बहता रहता है।
घुड़दौड़ में इस्तेमाल किए जाने वाले घोड़ों को अक्सर तेज़ी से दौड़ने के लिए मजबूर किया जाता है, और ऐसा करने के लिए उन पर कोड़े बरसाए जाते हैं, यहां तक कि अवैध बिजली के झटके देने वाले उपकरणों का भी इस्तेमाल किया जाता है। इतनी तेज़ दौड़ के दबाव में कई बार घोड़ों को गंभीर चोटें लगती हैं और उनके फेफड़ों से रक्तस्राव तक हो जाता है। 2016 में, राजस्थान हाईकोर्ट ने जीव-जन्तु कल्याण बोर्ड की रिपोर्ट की समीक्षा के बाद राज्य में टोंगा दौड़ों पर रोक लगा दी थी। इस रिपोर्ट में बताया गया था कि जब घोड़ों को शोरगुल वाले वाहनों और भीड़-भाड़ वाले माहौल में जबरन दौड़ाया जाता है, तो वे डर और तनाव से गुजरते हैं और उनके साथ क्रूरता होती है।
