‘पिंक’ हाथी चंचल की मौत की खबर के बाद PETA इंडिया की मांग: रूसी कलाकार या तो चंचल की तस्वीर हटाएं या तस्वीर से होने वाली पूरी कमाई हाथियों की सुरक्षा में दें
राजस्थान में एक फोटोशूट के दौरान कैद में रखी गई हाथी चंचल को चटक गुलाबी रंग में रंगे जाने की तस्वीरों पर पहले ही विवाद हो चुका था। अब उसकी मौत की खबर सामने आने के बाद इस मुद्दे पर फिर से आक्रोश बढ़ गया है। इसके बाद PETA इंडिया ने रूसी कलाकार जूलिया बुरुलेवा को पत्र लिखकर मांग की है कि वे कमर्शियल प्रिन्ट वाली इस तस्वीर को तुरंत अपनी वेबसाइट से हटा लें या फिर इससे होने वाली पूरी कमाई भारत में हाथियों के संरक्षण और सुरक्षा कार्यों में दान करें। उनकी वेबसाइट पर इस बात के सबूत हैं कि प्रति तस्वीर को तीन लाख रुपये से अधिक कीमत में बेचा जा रहा है।
PETA इंडिया ने अपने पत्र में लिखा है, इस ‘पिंक’ हाथी वाले प्रिंट से होने वाली पूरी आय भारत में हाथियों को उनके प्राकृतिक जंगलों में सुरक्षित रखने के प्रयासों में दान करें। आप चाहें तो यह राशि PETA इंडिया के मैकेनिकल हाथी प्रोजेक्ट या किसी विश्वसनीय हाथी अभयारण्य जैसे वाइल्डलाइफ SOS या वाइल्डलाइफ रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर को दे सकती हैं, जहां बचाए गए हाथियों को बिना जंजीरों के रखा जाता है, हथियारों से नियंत्रित नहीं किया जाता और उन्हें अन्य हाथियों का साथ मिलता है। यदि आप दान का विकल्प चुनती हैं, तो कृपया इस प्रिंट के साथ एक स्पष्ट संदेश भी जोड़ें कि सवारी या अन्य उद्देश्यों के लिए कैद में रखे गए हाथियों का उपयोग न किया जाए, और इसे अपनी वेबसाइट पर भी साझा करें।”
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चंचल की उम्र लगभग 70 वर्ष थी। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के “प्रोजेक्ट एलीफेंट के दिशा-निर्देशों” के अनुसार, कैद में रखे गए हाथियों को 65 वर्ष की उम्र के बाद सेवानिवृत्त कर देना चाहिए। कलाकार द्वारा यह दावा किए जाने पर कि इस्तेमाल किया गया रंग चंचल की मौत का कारण नहीं हो सकता, पत्र में कहा गया है कि “रंग के स्वास्थ्य पर प्रभाव को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता”। “रंग हाथी की आंखों, कानों, सूंड, मुंह और जननांगों के आसपास लगाया गया था। खासकर संवेदनशील हिस्सों पर त्वचा को ढकने से जोखिम हो सकता है जैसे जलन, खाने या खुद को साफ करते समय रंग का शरीर में जाना, तनाव और पहले से मौजूद बीमारियों का बढ़ना भले ही उस रंग को ‘सुरक्षित’ बताया गया हो।”
पत्र में आमेर किले में सवारी के लिए इस्तेमाल होने वाले हाथियों के साथ होने वाली अन्य क्रूरताओं का भी जिक्र किया गया है जैसे चंचल भी सह रही थी। इसमें कहा गया है कि “जब इनका इस्तेमाल नहीं होता, तो इन्हें जंजीरों में बांधकर कंक्रीट पर खड़ा रखा जाता है, जैसे किसी गैरेज में गाड़ियां खड़ी होती हैं। इन्हें नियंत्रित करने के लिए हथियारों का इस्तेमाल किया जाता है, जिन्हें अक्सर सजावट और कपड़ों के नीचे छिपा दिया जाता है।“ पत्र में यह भी चेतावनी दी गई है कि चंचल का मालिक साद्दिक खान वही व्यक्ति प्रतीत होता है जिसके पास पहले मालती नामक हथिनी थी। मालती को PETA इंडिया के अभियान के बाद बचाया गया था, क्योंकि उसे कई बार बुरी तरह पीटा गया था, एक बार तो आठ लोगों ने लाठियों से उसकी पिटाई की थी।
पत्र में आगे लिखा है- “आपको यह भी बताया जाना चाहिए था कि जयपुर में परेशान और तनावग्रस्त हाथी इंसानों पर और एक-दूसरे पर हमला कर चुके हैं। 2024 में ‘गौरी’ नाम की एक हथिनी, जिसका उपयोग सवारी के लिए किया जा रहा था, ने एक रूसी पर्यटक को जमीन पर पटक दिया, जिससे उसकी टांग टूट गई और उसे अस्पताल में भर्ती करना पड़ा थ। हाथियों का सवारी और जबरन संपर्क के लिए उपयोग इंसानों के लिए भी खतरनाक है।”
PETA इंडिया का मैकेनिकल हाथी अभियान मंदिरों और जुलूसों के लिए मैकेनिकल हाथी उपलब्ध कराता है, जिससे असली हाथी अपने परिवार के साथ जंगलों में रह सकें और परंपराएं भी जारी रह सकें। इस पहल से प्रेरित होकर अब भारत में मैकेनिकल हाथियों का उपयोग सवारी, शादियों और यहां तक कि राजनीतिक रैलियों में भी बढ़ रहा है। इससे कारीगरों और इंजीनियरों को रोजगार के अवसर मिलते हैं, और महावतों को भी बचाए गए हाथियों की देखभाल के लिए पुनः प्रशिक्षित किया जाता है।
आमेर के किले पर शोषण का शिकार हाथियों की मदद करें
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