अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा और PETA इंडिया ने केरल के पल्लिपुरम में स्थित श्रीकृष्ण मंदिर को असली हाथी के आकार का मैकेनिकल हाथी भेंट किया

Posted on by Surjeet Singh

प्रसिद्ध अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा और PETA इंडिया ने केरल के त्रिस्सूर जिले में स्थित पल्लिपुरम श्रीकृष्ण मंदिर को “पल्लिपुरम उनिकृष्णन” नामक असली हाथी के आकार का एक मैकेनिकल हाथी भेंट किया है। आज, ब्लॉक पंचायत सदस्य श्रीमती संध्या मेनन और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने मंदिर के तंत्री श्री अन्निमंगलम नारायणन नम्बूदिरी, मुख्य पुजारी श्री राजीव परमेश्वरन नम्बूदिरी, योगक्षेम सभा की सचिव श्रीमति आर्या अंतर्जनम तथा मंदिर के भक्तों की उपस्थिति में पल्लिपुरम उनिकृष्णन का अनावरण किया। यह मंदिर के समारोहों को सुरक्षित और क्रूरता मुक्त तरीकों से आयोजित करने के लिए उपयोग किया जाएगा, जिससे असली हाथी अपने परिवारों के साथ जंगल में रह सकें।

यह पहल PETA इंडिया द्वारा सुगम बनाई गई, जो पल्लिपुरम श्रीकृष्ण मंदिर के जीवित हाथियों को कभी खरीदने या किराए पर न लेने के करुणामय निर्णय की सराहना के बदले में दिया गया उपहार है। 2024 तक, मंदिर वार्षिक पूरम उत्सवों के लिए तीन से पाँच हाथियों का उपयोग करता था। हालांकि, पशुओं के कल्याण और भक्तों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए, मंदिर ने एक उल्लेखनीय परिवर्तन के रूप में पूरम उत्सवों के दौरान मैकेनिकल हाथी इडियाणापिल्ली रमन का इस्तेमाल किया और अब वह फिर से मंदिर के धार्मिक अनुष्ठानों के लिए वास्तविक हाथियों के इस्तेमाल की ओर लौटना नहीं चाहता। यह नया मैकेनिकल  हाथी, पल्लिपुरम उनिकृष्णन, भारत के मंदिरों को PETA इंडिया द्वारा दान किया गया 19वाँ मैकेनिकल हाथी है और केरल का 10वाँ यांत्रिक हाथी है। मैकेनिकल हाथी का स्वागत उद्घाटन समारोह और पंचारी मेलम वादन के साथ किया गया।

 

“यह पहल मेरे हृदय के बहुत करीब है। भगवान की हर रचना का सम्मान होना चाहिए और पल्लिपुरम श्रीकृष्ण मंदिर में मैकेनिकल हाथी ‘पल्लिपुरम उनिकृष्णन’ का आगमन हाथियों के लिए स्वतंत्रता को सच बनाता है। पल्लिपुरम उनिकृष्णन इस बात का सुंदर उदाहरण है कि परंपरा और तकनीक मिलकर कैसे अच्छा काम कर सकती हैं।
– सोनाक्षी सिन्हा

“लगभग दो वर्ष पूर्व, हमने अपने भक्तों को मैकेनिकल हाथी इडियाणापिल्ली रमन से परिचित कराया था। भक्तों को यह अद्भुत यांत्रिक चमत्कार बहुत पसंद आया और इसने हमारे उत्सवों को सुरक्षित भी बना दिया। हम मैकेनिकल हाथी पल्लिपुरम उनिकृष्णन का स्वागत करके बेहद खुश हैं  जो अब हमारे साथ रहेगा और भविष्य के उत्सवों का हिस्सा बनेगा।

– मंदिर के तन्त्री श्री अन्निमंगलम नारायणन नम्बूदिरी जी 

 

“हमें अपने मंदिर में यांत्रिक हाथी पल्लिपुरम उनिकृष्णन का स्वागत करने पर अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। भगवान के बनाए सभी प्राणी, हमारी तरह स्वतंत्र रहना चाहते हैं और अपने परिवारों के साथ सुरक्षित जीवन जीना चाहते हैं। मैकेनिकल हाथी सुनिश्चित करेगा कि मंदिर के सभी अनुष्ठान सुरक्षित और करुणामय तरीके से आयोजित हो सके।
– ब्लॉक पंचायत सदस्य श्रीमती संध्या मेनन

हाथी अत्यंत बुद्धिमान, सक्रिय और सामाजिक वन्य पशु होते हैं। लेकिन बंदी बनाए जाने पर उन्हें जुलूसों व अन्य गतिविधियों में इस्तेमाल करने के लिए पीटा जाता है और हथियारों के डर और मारपीट से प्रशिक्षित किया जाता है। मंदिरों और अन्य स्थानों पर कैद में रखे गए कई हाथी कंक्रीट पर घंटों जंजीर में बंधे रहने के कारण दर्दनाक पाँव और पैर की बीमारियों से ग्रस्त रहते हैं। अधिकांश को पर्याप्त भोजन, पानी, पशु-चिकित्सीय देखभाल और प्राकृतिक जीवन का कोई अनुभव नहीं मिल पाता। इन अमानवीय परिस्थितियों में, कई हाथी बेहद तनावग्रस्त हो जाते हैं और कभी-कभी अपने महावत या अन्य इंसानों पर हमला कर देते हैं। टास्क फोहेरिटेज एनिमलर्स द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार, केरल में 15 वर्षों की अवधि में कैद में रखे गए हाथियों ने 526 लोगों की जान ली। लगभग 40 वर्षों से बंदी बनाए गए हाथी थिचिकोट्टुकावु रामचंद्रन, जो केरल के त्योहारों में सबसे अधिक इस्तेमाल किए जाने वाले हाथियों में से एक है, के द्वारा 13 व्यक्तियों की मौत की रिपोर्ट है जिनमें छह महावत, चार महिलाएं और तीन अन्य हाथी शामिल हैं। 2025 में, केरल में कम से कम बीस बंदी हाथी तनाव और मानसिक पीड़ा से परेशान हो गए और विभिन्न मौकों पर छह लोगों की जान ले ली, कई अन्य को घायल कर दिया, या संपत्ति को नुकसान पहुँचाया।

यांत्रिक हाथी 3 मीटर ऊँचे होते हैं और उनका वजन 500 किलोग्राम होता है। इन्हें रबर, फाइबर, धातु, जाली, फोम और स्टील से बनाया जाता है और ये पाँच मोटरों पर चलते हैं। एक यांत्रिक हाथी दिखने, महसूस करने तथा उपयोग में वास्तविक हाथी जैसा होता है। यह अपना सिर हिला सकता है, कान और आँखें चला सकता है, पूँछ हिला सकता है, सूंड उठा सकता है और यहाँ तक कि पानी भी छिड़क सकता है। इन पर चढ़ा जा सकता है और पीठ पर सीट भी लगाई जा सकती है। इन्हें बिजली से आसानी से प्लग-इन करके चलाया जा सकता है। इन्हें सड़कों पर ले जाया जा सकता है। और इन्हें पहियों वाले आधार पर लगाया गया है, जिससे इन्हें अनुष्ठानों और जुलूसों के लिए आसानी से चलाया और धकेला जा सकता है।

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