अभिनेत्री रुक्मिणी वसंत ने PETA इंडिया और CUPA के साथ मिलकर कर्नाटक के श्री उज्जैनी पीठ को असली हाथी के आकार का मैकेनिकल (यांत्रिक) हाथी ‘महानंदी’ उपहार स्वरूप दिया
प्रसिद्ध अभिनेत्री और SIIMA पुरस्कार विजेता रुक्मिणी वसंत, PETA इंडिया और कम्पैशनेट अनलिमिटेड प्लस एक्शन (CUPA) ने कर्नाटक के श्रीमद उज्जैनी जगद्गुरु सद्धर्म सिंहासन महासंस्थान पीठ, जिसे उज्जैनी पीठ के नाम से भी जाना जाता है, को असली हाथी के आकार का का मैकेनिकल (यांत्रिक) हाथी ‘महानंदी’ दान में दिया है। यह दान मंदिर द्वारा कभी भी जीवित हाथियों को न रखने या किराए पर न लेने के निर्णय के सम्मान में किया गया है।
यह नया मैकेनिकल (यांत्रिक) हाथी ‘महानंदी’ दक्षिण भारत में PETA India द्वारा मंदिरों को दान किए गए सत्रहवें मैकेनिकल (यांत्रिक) हाथी के रूप में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इन मैकेनिकल (यांत्रिक) हाथियों में से, PETA India ने कर्नाटक में सात हाथी दान किए हैं, जिनमें से छह हाथियों का निर्माण CUPA के सहयोग से किया गया था, जिसमें मुजरे विभाग द्वारा शासित यदियुर श्री सिद्धलिंगेश्वर स्वामी मंदिर भी शामिल है।
बल्लारी के सांसद श्री ई. तुकाराम; शिकारीपुरा के विधायक (MLA) श्री बी. वाई. विजेंद्र; रॉन के विधायक श्री गुरुपदगौड़ा पाटिल; कुदलगी के विधायक डॉ. एन. टी. श्रीनिवास; गंगावती के विधायक श्री जी. जनार्दन रेड्डी; बिल्गी के विधायक श्री जे. टी. पाटिल; तथा श्री श्री श्री 1008 जगद्गुरु वीरसिंहासन डॉ. प्रसन्नरेणुका वीरसोमेश्वर राजदेशिकेंद्र शिवाचार्य भगवद्पाद महास्वामीजी, श्री श्री श्री 1008 जगद्गुरु सिद्धलिंग राजदेशिकेंद्र शिवाचार्य भगवद्पाद महास्वामीजी सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों और मठ के भक्तों ने ‘महानंदी’ के अनावरण समारोह में भाग लिया। यह मैकेनिकल (यांत्रिक) हाथी मठ में विभिन्न अनुष्ठानों को सुरक्षित और क्रूरता-मुक्त तरीके से पूरा करने के लिए उपयोग किया जाएगा, जिससे असली हाथी जंगल में अपने परिवारों के साथ रह सकें। उद्घाटन समारोह के बाद एक शोभायात्रा भी निकाली गई।
PETA इंडिया ने 2023 की शुरुआत में धार्मिक संस्थानों द्वारा जीवित हाथियों के उपयोग को बंद करने के लिए सहानुभूतिपूर्ण आंदोलन की शुरुआत की थी। अब, भारत भर के मंदिरों में कम से कम बीस यांत्रिक हाथियों का उपयोग किया जा रहा है।
“PETA India और CUPA के साथ मिलकर प्रतिष्ठित उज्जैनी पीठ को ‘महानंदी’ भेंट करते हुए मुझे अत्यंत खुशी हो रही है। मैकेनिकल (यांत्रिक) हाथी ‘महानंदी’ इस लिए बनाया गया है ताकि भक्ति इस तरह व्यक्त की जा सके कि पशुओं के जीवन में शांति और सम्मान बना रहे। मैं एक ऐसे भविष्य की कल्पना करती हूँ जिसमें हाथी अपने परिवारों के साथ जंगलों में स्वतंत्र रूप से विचरण करें और बिना हाथियों के हमलों के किसी भी जोखिम के मंदिरों के सभी अनुष्ठान, समारोह और उत्सव सुरक्षित रूप से संपन्न हों।”- “रुक्मिणी वसंत
कर्नाटक के मंदिरों को मैकेनिकल (यांत्रिक) हाथियों से सुसज्जित करने के लिए PETA India और CUPA की दूरदर्शी पहल की सराहना करते हुए उज्जैनी पीठ के प्रमुख स्वामीजी, श्री श्री श्री 1008 जगद्गुरु सिद्धलिंग राजदेशिकेंद्र शिवाचार्य भगवद्पाद महास्वामीजी ने कहा–
“हम अत्यंत हर्षित हैं कि हमारे मठ में नया मैकेनिकल (यांत्रिक) हाथी ‘महानंदी’ आया है। यह हमें हमारे पवित्र अनुष्ठानों को इस तरह निभाने की सुविधा देता है जो न केवल भक्तों के लिए सुरक्षित है, बल्कि दया और करुणा पर आधारित भी है। यह कदम भक्ति और करुणा का एक सुंदर मिलन है, जिसमें कोई पशु हमारी पूजा के लिए पीड़ित नहीं होता। मैं अन्य मंदिरों को भी सच्ची भक्ति और करुणा के मार्ग पर चलने के लिए प्रोत्साहित करता हूँ और उन्हें मैकेनिकल (यांत्रिक) हाथियों को अपनाने का सुझाव देता हूँ।”
शिकारीपुरा के विधायक, श्री बी. वाई. विजेंद्र ने कहा– “मैं प्रतिष्ठित उज्जैनी पीठ में ‘महानंदी’ का स्वागत करते हुए अत्यंत खुश हूँ। यह एक महत्वपूर्ण क्षण है जो भक्ति और करुणा का सुंदर मिश्रण प्रस्तुत करता है। मैं पीठ, PETA इंडिया और CUPA को बधाई देता हूँ कि उन्होंने करुणा और दया का अनोखा उदाहरण प्रस्तुत किया और पूरे देश को दिखाया कि हमारे अनुष्ठान ऐसे सुंदर मैकेनिकल (यांत्रिक) हाथी के माध्यम से हमेशा समयोत्तर रह सकते हैं।”
रॉन के विधायक, श्री गुरुपादगौड़ा पाटिल ने कहा– “यह मैकेनिकल (यांत्रिक) हाथी एक बहुत अच्छा उदाहरण है कि कैसे तकनीकी नवाचार हमें हमारी गहरी सांस्कृतिक परंपराओं और विरासत को संरक्षित करने में सक्षम बनाता है। मुझे खुशी है कि उज्जैनी पीठ इस मैकेनिकल (यांत्रिक) हाथी का उपयोग करेगा, जिससे भक्त सुरक्षित वातावरण में त्योहारों में भाग ले सकेंगे। यह हमारे बच्चों में दया और करुणा को बढ़ावा देने का एक बहुत अच्छा तरीका है। मैं PETA India और CUPA को इस पहल के लिए बधाई देता हूँ।”
हाथी अत्यंत बुद्धिमान, सक्रिय और सामाजिक वन्य पशु होते हैं। लेकिन बंदी बनाए जाने पर उन्हें जुलूसों व अन्य गतिविधियों में इस्तेमाल करने के लिए पीटा जाता है और हथियारों के डर और मारपीट से प्रशिक्षित किया जाता है। मंदिरों और अन्य स्थानों पर कैद में रखे गए कई हाथी कंक्रीट पर घंटों जंजीर में बंधे रहने के कारण दर्दनाक पाँव और पैर की बीमारियों से ग्रस्त रहते हैं। अधिकांश को पर्याप्त भोजन, पानी, पशु-चिकित्सीय देखभाल और प्राकृतिक जीवन का कोई अनुभव नहीं मिल पाता। इन अमानवीय परिस्थितियों में, कई हाथी बेहद तनावग्रस्त हो जाते हैं और कभी-कभी अपने महावत या अन्य इंसानों पर हमला कर देते हैं।
हेरिटेज एनिमल टास्क फोर्स द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार, केरल में 15 वर्षों की अवधि में कैद में रखे गए हाथियों ने 526 लोगों की जान ली। लगभग 40 वर्षों से बंदी बनाए गए हाथी थिचिकोट्टुकावु रामचंद्रन, जो केरल के त्योहारों में सबसे अधिक इस्तेमाल किए जाने वाले हाथियों में से एक है, के द्वारा 13 व्यक्तियों की मौत की रिपोर्ट है जिनमें छह महावत, चार महिलाएं और तीन अन्य हाथी शामिल हैं। 2025 में, केरल में कम से कम बीस बंदी हाथी तनाव और मानसिक पीड़ा से परेशान हो गए और विभिन्न मौकों पर छह लोगों की जान ले ली, कई अन्य को घायल कर दिया, या संपत्ति को नुकसान पहुँचाया।
मैकेनिकल (यांत्रिक) हाथियों की ऊँचाई 3 मीटर होती है और वजन 800 किलो ग्राम होता है। इन्हें रबर, फाइबर, धातु, जाली, फोम और स्टील से बनाया गया है और ये पाँच मोटरों पर चलते हैं। एक मैकेनिकल (यांत्रिक) हाथी दिखने और महसूस करने में असली हाथी जैसा होता है और इसका उपयोग भी वैसा ही किया जा सकता है। यह अपना सिर हिला सकता है, कान और आंखें हिला सकता है, अपनी पूंछ हिला सकता है, सूंड उठा सकता है और यहाँ तक कि पानी भी छिड़क सकता है। इसके ऊपर चढ़ा जा सकता है और इसकी पीठ पर सीट लगाई जा सकती है। इसे बस बिजली में प्लग लगाकर चलाया जा सकता है। इसे सड़कों पर ले जाया जा सकता है और यह व्हीलबेस पर माउंटेड होता है, जिससे इसे अनुष्ठानों और जुलूसों के लिए आसानी से घुमाया और धकेला जा सकता है।
उज्जैनी पीठ पंचपीठों में से एक है, जिसमें बालेहोनूर, काशी, केदार और श्रीशैल शामिल हैं, और इसका विशाल परिसर श्री मरुलसद मंदिर और भव्य मठ सहित फैला हुआ है। इसमें गौरम्मा, बांगारदा बसवन्ना, नंदी मंदिर और श्री सिद्धलिंग जगद्गुरु समाधि जैसे स्मारक भवन भी हैं। उज्जैनी पीठ प्रतिष्ठित जगद्गुरु का निवास स्थान है और यह एक सांस्कृतिक केंद्र भी है। यहाँ जगद्गुरु शिव पूजा मंदिर, उनका छात्रावास, दारुका मंदिर, गोशाले पंचाचार्य और सभाभवन स्थित हैं। यहाँ की कलात्मक भव्यता कर्नाटक के वास्तु शिल्प कला के इतिहास में अद्वितीय है।
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