पक्षियों को आज़ाद उड़ने देने की अपील के लिए अभिनेत्री प्रांतिका दास ने PETA इंडिया के प्रदर्शन में पिंजरे में कैद होकर उठाई आवाज़
कलकत्ता हाई कोर्ट द्वारा गैलिफ स्ट्रीट बाज़ार में अनधिकृत पशुओं के व्यापार पर रोक लगाने के निर्देश के बाद, अभिनेत्री और PETA इंडिया की समर्थक प्रांतिका दास ने सभी पक्षियों की आज़ादी के लिए आवाज़ उठाई। सफेद कपड़े और बड़े पंख पहनकर वह विक्टोरिया मेमोरियल के सामने एक पिंजरे में कैद हुईं। उनके पास लगे एक बोर्ड पर लिखा था, “पक्षी पिंजरों में रहने के लिए नहीं हैं। उन्हें आज़ाद उड़ने दें।” इस प्रदर्शन का उद्देश्य लोगों को यह समझाना था कि पक्षियों का असली घर खुला आसमान है, पिंजरे नहीं, और उन्हें कभी खरीदना नहीं चाहिए।
“पक्षियों के पंख हवा को महसूस करने और आसमान में उड़ने के लिए हैं, न कि पिंजरों में कैद होकर तड़पने के लिए। PETA इंडिया और मैं कोलकाता के लोगों से अपील करते हैं कि पक्षियों को कैद करने के बजाय दूरबीन खरीदें और उन्हें उनके प्राकृतिक आवास में उड़ते हुए देखें।”
— प्रांतिका दास, अभिनेत्री
प्रकृति में अलग-अलग प्रजातियों के पक्षी कई तरह की सामाजिक गतिविधियाँ करते हैं। वे रेत में नहाते हैं, लुका-छिपी खेलते हैं, नाचते हैं, अपने साथी के साथ घोंसले बनाते हैं और अपने बच्चों की देखभाल करते हैं। लेकिन जब उन्हें छोटे-छोटे पिंजरों में कैद कर दिया जाता है और उनके प्राकृतिक व्यवहार से जुड़ी गतिविधियों के अवसर छीन लिए जाते हैं, तो ये जीव तनाव में आ जाते हैं और उदास रहने लगते हैं। कई पक्षी बार-बार अपने पंख सँवारने और उन्हें नोचने लगते हैं, यहाँ तक कि खुद को घायल कर लेते हैं। कुछ लोग पक्षियों को उड़ने से रोकने के लिए उनके पंख काट देते हैं, जबकि उड़ना पक्षियों के लिए उतना ही स्वाभाविक और ज़रूरी है, जितना इंसानों के लिए चलना। पक्षियों के व्यापार में उन्हें उनके प्राकृतिक आवास से पकड़कर छोटे डिब्बों में भर दिया जाता है और कैद में बेचने के लिए भेजा जाता है। इस दौरान कई पक्षियों को चोट लगती है, पानी और भोजन की कमी होती है या वे गंभीर तनाव के कारण दम तोड़ देते हैं। जो पक्षी बच जाते हैं, उन्हें भी अक्सर पिंजरों में उपेक्षा, कुपोषण, अकेलेपन, अवसाद और तनाव भरी ज़िंदगी बितानी पड़ती है।
वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत संरक्षित स्थानीय जंगली पक्षियों को पकड़ना और उनका शिकार करना प्रतिबंधित है। उनके कब्ज़े और व्यापार पर भी पाबंदियाँ हैं। इस कानून का उल्लंघन करने पर जेल, जुर्माना या दोनों की सज़ा हो सकती है। संकटग्रस्त प्रजातियों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार को वन्य जीवों और वनस्पतियों की संकटग्रस्त प्रजातियों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर कन्वेंशन (CITES) के तहत भी नियंत्रित किया जाता है। भारत ने 2022 के संशोधन के ज़रिए CITES के प्रावधानों को वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम में शामिल किया है। पक्षियों को कैद में रखने और उन्हें उड़ने से रोकने के लिए उनके पंख काटना उन्हें अपंग करने और क्षति पहुँचाने के समान है। यह पशुओं के प्रति क्रूरता का निवारण अधिनियम, 1960 और भारतीय न्याय संहिता, 2023 के तहत संज्ञेय अपराध है।
प्रांटतिका दास हिंदी और बंगाली सिनेमा में काम कर चुकी हैं। उन्होंने हॉरर-कॉमेडी फिल्म भूल भुलैया 3 में नूर और 2026 की हॉरर-कॉमेडी फिल्म Zorr में सरस्वती की भूमिका निभाई है। वह Bharga और Tilottoma जैसी बंगाली फिल्मों के साथ-साथ 2026 की वेब सीरीज़ Office Days में भी नज़र आई हैं। वह जल्द ही बंगाली फिल्म Rahu, हिंदी फिल्म The Legend of Abujhmaad और ओड़िया फिल्म Bibah.com में दिखाई देंगी।
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