PETA इंडिया के हस्तक्षेप के बाद भोजपुर में मादा कुत्ते के साथ यौन शोषण के मामले में FIR दर्ज, सभी महिलाओं की सुरक्षा के लिए सख्त कार्रवाई जरूरी

Posted on by Surjeet Singh

भोजपुर के बिछिआंव गांव में एक मादा सामुदायिक कुत्ते के साथ कथित यौन शोषण के संबंध में एक जागरूक नागरिक से मिली सूचना और वीडियो के बाद, PETA इंडिया ने कुत्ते की स्थानीय देखभाल करने वाले मुकेश कुमार के साथ मिलकर संदेश थाना पुलिस स्टेशन में तत्काल प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज कारवाई। उपलब्ध वीडियो साक्ष्यों और स्थानीय देखभालकर्ता की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपी दीपचन राम के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 62 के साथ धारा 325 तथा पशु क्रूरता निवारण अधिनियम (PCA Act), 1960 की धारा 11(1)(a) और 11(1)(i) के तहत FIR दर्ज की। इसके बाद सरकारी पशु चिकित्सक ने कुत्ते की पशु-चिकित्सकीय एवं कानूनी जांच की। फिलहाल कुत्ता स्थानीय देखभालकर्ता की देखरेख में है।

2021 में, फेडरेशन ऑफ इंडियन एनिमल प्रोटेक्शन ऑर्गनाइजेशंस ने एक रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें खुलासा हुआ कि उससे पहले के दशक में गायों और कुत्तों सहित लगभग 5 लाख पशु अपराधों के शिकार हुए थे और उनमें से कई के साथ यौन हिंसा की गई थी। इससे पहले, वॉइस ऑफ स्ट्रे डॉग्स की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि पशुओं के साथ यौन शोषण के मामले अक्सर दर्ज नहीं हो पाते, लेकिन आशंका है कि ऐसी घटनाएं लगभग उसी दर से होती हैं, जिस दर से इंसानों के साथ बलात्कार के मामले सामने आते हैं।

PETA इंडिया बताता है कि कई हिंसक अपराधियों का पशुओं पर क्रूरता का दर्ज इतिहास रहा है। Journal of Emotional Abuse में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, हिंसा से बचने के लिए सुरक्षित आश्रय में शरण लेने वाली पालतू पशुओं की देखभाल करने वाली 71% महिलाओं ने बताया कि उनके साथी ने पशुओं को धमकी दी थी, उन्हें घायल किया था या मार डाला था। Forensic Research and Criminology International Journal में प्रकाशित एक शोधपत्र चेतावनी देता है, “पशुओं के साथ क्रूरता करने वाले लोगों के अन्य अपराधों में शामिल होने की आशंका तीन गुना अधिक थी। इनमें हत्या, बलात्कार, लूटपाट, हमला, उत्पीड़न, धमकी देना और नशीले पदार्थों का दुरुपयोग शामिल हैं। पशुओं के प्रति क्रूरता करने के प्रमुख कारणों में गुस्सा, मनोरंजन, नियंत्रण की भावना, डर, नापसंदगी, बदला, दूसरों की नकल करना और यौन सुख शामिल हैं।” भारत में, केरल की कानून की छात्रा जीशा के बलात्कार और हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए अमीरुल इस्लाम का भी कुत्तों और बकरियों के साथ बलात्कार करने और उन्हें मारने का इतिहास रहा था।

PETA इंडिया ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भारतीय न्याय संहिता (BNS) में संशोधन करने का अनुरोध किया है, ताकि पशुओं के साथ यौन शोषण को स्पष्ट रूप से दंडनीय अपराध बनाया जा सके। भारतीय दंड संहिता (IPC), 1860 की धारा 377 के तहत पशुओं के साथ यौन हिंसा को दंडित किया जाता था, लेकिन BNS में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जो पशुओं को समान कानूनी सुरक्षा प्रदान करता हो। IPC की धारा 377 के तहत किसी पशु के साथ बलात्कार को गैर-जमानती अपराध माना जाता था। इसके लिए “[आजीवन कारावास], या किसी भी प्रकार के कारावास की सजा, जिसकी अवधि दस वर्ष तक हो सकती है, और जुर्माना” का प्रावधान था।

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