सरकार, उद्योग जगत और PETA इंडिया के वैज्ञानिकों ने पशुओं पर प्रयोग किए बिना परीक्षण करने के तरीकों को बढ़ावा देने के लिए हाथ मिलाया।

Posted on by Sudhakarrao Karnal

21वीं सदी में हमारे पास पशुओं पर प्रयोग किए बिना परीक्षण करने के कई विश्वसनीय और उपयोगी तरीके उपलब्ध हैं। इन तरीकों से कीटनाशकों की विषाक्तता जाँचने के लिए पशुओं का इस्तेमाल करने से बचा जा सकता है। ऐसे परीक्षणों में अक्सर रसायनों को सीधे पशुओं की आँखों या त्वचा पर लगाया जाता है।

लेकिन इन तरीकों का इस्तेमाल करने के लिए वैज्ञानिकों को इनके बारे में जानकारी होना ज़रूरी है। इसी वजह से, PETA के वैज्ञानिकों ने इंस्टीट्यूट फॉर इन विट्रो साइंसेज़ के विशेषज्ञों के साथ मिलकर एक कार्यशाला आयोजित की। इसमें 40 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। कार्यशाला का उद्देश्य यह समझाना था कि कीटनाशकों को बाज़ार में बेचने से पहले, पशुओं पर प्रयोग किए बिना किए जाने वाले परीक्षणों से यह कैसे पता लगाया जा सकता है कि वे मनुष्यों या पर्यावरण के लिए हानिकारक हैं या नहीं।

हरियाणा के फरीदाबाद में आयोजित इस कार्यशाला में प्रतिभागियों को आधुनिक, पशुओं पर प्रयोग किए बिना किए जाने वाले परीक्षणों के इस्तेमाल पर चर्चा करने का अवसर मिला। व्यावहारिक उदाहरणों और वास्तविक आँकड़ों पर चर्चा के ज़रिए, इस कार्यशाला को इस तरह तैयार किया गया था कि वैज्ञानिक इन तरीकों को बेहतर ढंग से समझ सकें। इन तरीकों से पशुओं का इस्तेमाल किए बिना वैज्ञानिक रूप से विश्वसनीय परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।

पशुओं पर किए जाने वाले परीक्षण अक्सर बुनियादी वैज्ञानिक मानदंडों पर भी खरे नहीं उतरते, जैसे कि एक ही परीक्षण को दोहराने पर समान परिणाम मिलना और उसका मानव शरीर की जैविक प्रक्रियाओं से मेल खाना। वहीं, पशुओं पर प्रयोग किए बिना परीक्षण करने के नए तरीके लगातार विकसित हो रहे हैं। इनसे प्रासंगिक और विश्वसनीय आँकड़े प्राप्त किए जा सकते हैं और पशुओं के इस्तेमाल को भी कम किया जा सकता है। इन तरीकों की बेहतर जानकारी होने से उन वैज्ञानिकों का भरोसा बढ़ता है, जो विषाक्तता से जुड़े आँकड़ों का मूल्यांकन करते हैं और उनका इस्तेमाल करते हैं।

इस कार्यशाला का सहयोगात्मक स्वरूप दर्शाता है कि दुनिया भर में यह समझ बढ़ रही है कि प्रगति के लिए सभी संबंधित पक्षों के बीच संवाद ज़रूरी है। नियामक संस्थाओं, उद्योग जगत के वैज्ञानिकों और वैज्ञानिक संगठनों के विशेषज्ञों के पास अपने-अपने अनुभव और अलग-अलग दृष्टिकोण हैं। इन सभी के बीच होने वाली चर्चाएँ भारत में ऐसे आधुनिक तरीकों के व्यापक इस्तेमाल का रास्ता खोलने में मदद करती हैं, जो पशुओं की जान बचाने के साथ-साथ मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण की रक्षा भी करते हैं।

आप पशुओं पर होने वाले और भी परीक्षणों को रोकने में कैसे मदद कर सकते हैं?

PETA के वैज्ञानिक दुनिया भर में पशुओं पर प्रयोग किए बिना परीक्षण करने के तरीकों के विकास, वैज्ञानिक सत्यापन और स्वीकृति को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इस तरह की कार्यशालाएँ यह सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं कि विज्ञान में होने वाली प्रगति का वास्तविक लाभ मिले। लेकिन इस काम को और आगे बढ़ाने के लिए हमें आपकी मदद की ज़रूरत है!