PETA इंडिया ने बीमार हथिनी माधुरी के वनतारा में पुनर्वास बहाल करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया

Posted on by Sudhakarrao Karnal

PETA इंडिया ने सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है, ताकि हथिनी माधुरी (जिन्हें महादेवी के नाम से भी जाना जाता है) को जामनगर स्थित वनतारा के राधे कृष्णा टेंपल एलिफेंट वेलफेयर ट्रस्ट (RKTEWT) में पहले दिए गए पुनर्वास के आदेश के अनुसार वापस भेजा जा सके। इसी माह 11–12 सितंबर को माधुरी को शांत और सुरक्षित आश्रय से जबरन हटाकर कोल्हापुर के नांदिनी मठ- स्वस्तिश्री जिनसेन भट्टारक पट्टाचार्य महास्वामी संस्था (करवीर) (“मठ”) में वापस भेज दिया गया। कोल्हापुर पहुंचते ही उन्हें भारी शोरगुल, पटाखों, चिल्लाती भीड़ और तेज़ हॉर्नों की बौछार सहनी पड़ी। हैरान करने वाली बात यह है कि उसे एक कैद की तरह जंजीरों से बांधकर और पैरों में बेड़ियां लगाकार ले जाया गया। RKTEWT को रिलायंस का समर्थन प्राप्त है।

PETA इंडिया की याचिका में बताया गया है कि मठ में 33 वर्षों तक अकेले और जंजीरों में बंधे रहने के बाद, माधुरी को आखिरकार वनतारा में अन्य बचाए गए हाथियों के साथ सामाजिक संबंध बनाने, जंजीरों से मुक्त होकर चलने और हाथियों के लिए विशेष रूप से बनाई गई अत्याधुनिक पशु चिकित्सा सुविधाओं में अपने दर्द का उचित इलाज पाने का अवसर मिला। माधुरी जब वनतारा पहुंची थीं, तब उनके पैरों में लंबे समय से स्वास्थ्य समस्याएं थीं, लैमिनाइटिस के लक्षण थे, एक पुराना फोड़ा था और दोनों घुटनों में दर्दनाक सूजन थी। जुलूसों के दौरान तारकोल से बनी पक्की सड़कों पर चलने और लंबे समय तक मठ में कठोर फर्श पर एक ही जगह खड़े रहने के कारण उन्हें फ्रैक्चर और गठिया की समस्या भी हो गई थी।

याचिका में कहा गया है कि माधुरी को वापस मठ भेजना 16 जुलाई 2025 के बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश और 28 जुलाई 2025 के सुप्रीम कोर्ट के पहले के आदेश का उल्लंघन था। इन आदेशों में माधुरी को लंबे समय तक पुनर्वास और उसकी प्रजाति के अनुरूप विशेष देखभाल के लिए जामनगर स्थित RKTEWT में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया गया था।

यह याचिका सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त हाई-पावर्ड कमेटी (HPC) द्वारा 9 सितंबर को माधुरी को वापस मठ भेजने की अनुमति दिए जाने के बाद दायर की गई है। यह फैसला तब लिया गया, जब HPC की अपनी तीन सदस्यीय उप-समिति ने निरीक्षण के बाद निष्कर्ष निकाला था कि मठ की स्थितियां माधुरी की “लंबे समय तक देखभाल” के लिए उपयुक्त नहीं है। उप-समिति ने पाया कि वहां व्यायाम और सामाजिक मेलजोल के पर्याप्त अवसर नहीं हैं, इंसानों का हस्तक्षेप बहुत अधिक है और माधुरी के लिए प्रस्तावित चलने के रास्ते में तारकोल की सड़कें हैं। इसके अलावा, सालभर उपलब्ध रहने वाले पानी के स्रोत तक पहुंचना मुश्किल है, पानी के दूषित होने का खतरा है और लगातार विशेष पशु चिकित्सा देखभाल और आवश्यक सुविधाओं का अभाव है। महत्वपूर्ण रूप से, रिपोर्ट में मठ के अधिकारियों के अपने बयान दर्ज हैं, जिसमें उन्होंने कहा कि यह जगह “पूरी तरह धार्मिक उद्देश्यों के लिए” है और “मठ में पुनर्वास की जरूरतें पूरी नहीं की जा रही हैं।”

PETA इंडिया ने सुप्रीम कोर्ट में ऐसे सबूत भी पेश किए हैं, जिनसे पता चलता है कि माधुरी को अब उसी शेड में अकेले बांधकर रखा जा रहा है, जहां से उसे पहले ले जाया गया था। इस शेड की दीवारों पर पेड़ों की पेंटिंग बनाई गई हैं, जबकि RKTEWT में माधुरी को प्राकृतिक वातावरण मिला था।

HPC की एक उप-समिति और PETA इंडिया के प्रतिनिधियों ने RKTEWT में माधुरी की संयुक्त चिकित्सा जांच की। जांच में पता चला कि माधुरी को ऑस्टियोआर्थराइटिस (हड्डियों और जोड़ों की घिसावट), ऑस्टियोलाइसिस (हड्डियों का घुलना या कमजोर होना) कई हड्डियों में फ्रैक्चर जैसी समस्याएं थीं। जांच में यह भी दर्ज किया गया कि माधुरी का उसकी हथिनी दोस्त शांति के साथ गहरा सामाजिक संबंध है। दिसंबर में HPC ने खुद कहा कि चिकित्सकीय राय “लगातार देखभाल पर जोर देती है” और चेतावनी दी कि माधुरी को दूसरी जगह ले जाने से उसकी स्थिति में “गिरावट या शारीरिक स्वास्थ्य बिगड़ने” का खतरा हो सकता है।

HPC माधुरी के RKTEWT में स्थायी पुनर्वास का आदेश दिया था। यह फैसला इस निष्कर्ष के बाद लिया गया था कि मठ में माधुरी की जटिल चिकित्सीय और व्यवहार संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाएं और विशेषज्ञता नहीं थी। बॉम्बे हाई कोर्ट ने 16 जुलाई 2025 को इस फैसले को बरकरार रखा और सुप्रीम कोर्ट ने 28 जुलाई 2025 को हाई कोर्ट के निर्देशों को बरकरार रखा। हालांकि, माधुरी को वापस लाने के लिए चलाए गए एक राजनीतिक रूप से प्रेरित अभियान और रिलायंस के उत्पादों के बहिष्कार के बाद, वनतारा ने उसके मठ में वापस भेजे जाने का समर्थन किया।

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