PETA इंडिया और SAFI के हस्तक्षेप के बाद सिद्दिपेट, तेलंगाना में सामुदायिक कुत्तों की कथित हत्या के मामले में FIR दर्ज

Posted on by Surjeet Singh

एक चिंतित नागरिक से मिली जानकारी के अनुसार, तेलंगाना के सिद्दिपेट जिले के बसवापुर गांव के सरपंच ने कथित तौर पर 20 सितंबर की रात कुछ लोगों को सामुदायिक कुत्तों को जानलेवा पदार्थ का इंजेक्शन लगाने के लिए काम पर रखा था। बताया गया है कि इसके कारण कई कुत्तों की दर्दनाक मौत हो गई। इस मामले में PETA इंडिया और Stray Animal Foundation India (SAFI) के प्रयासों के बाद कोहेड़ा पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई।

यह FIR SAFI Foundation के क्रूरता रोकथाम प्रबंधक श्री अदुलापुरम गौतम की शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 325 और पशु क्रूरता निवारण (PCA) अधिनियम, 1960 की धारा 11(1) के तहत दर्ज की गई है। जांच के तहत मुथन्नापेट गांव में एक दफन स्थल से 3 कुत्तों के अवशेष निकाले गए और उनका पोस्टमॉर्टम कराया गया। फिलहाल यह पता नहीं है कि कुल कितने कुत्तों की मौत हुई है। अधिकारी मामले की जांच जारी रखे हुए हैं।

पशु जन्म नियंत्रण (ABC) नियम, 2023 के नियम 11(19) के तहत सामुदायिक कुत्तों को केवल नसबंदी के उद्देश्य से पकड़ा जा सकता है। सामुदायिक पशुओं को किसी दूसरी जगह ले जाना या उनकी हत्या करना गैरकानूनी है। नियम में कहा गया है कि नसबंदी के बाद कुत्तों को उसी स्थान या इलाके में वापस छोड़ा जाना चाहिए, जहां से उन्हें पकड़ा गया था। माननीय सुप्रीम कोर्ट ने 19 मई 2026 के अपने हालिया फैसले में ABC नियमों को बरकरार रखते हुए दोहराया कि आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद कुत्तों को उनके मूल क्षेत्र में वापस छोड़ा जाना चाहिए।

सामुदायिक कुत्तों को अक्सर क्रूरता का सामना करना पड़ता है। कई कुत्ते वाहनों की चपेट में आ जाते हैं और भूख, बीमारी या चोट से पीड़ित होते हैं। हर साल कई सामुदायिक कुत्ते पशु आश्रय गृहों में पहुंच जाते हैं, जहां पर्याप्त अच्छे घर नहीं मिलने के कारण उन्हें लंबे समय तक पिंजरों या केनेल में रहना पड़ता है। इसका एक सरल और प्रभावी समाधान नसबंदी है। एक मादा कुत्ते की नसबंदी छह वर्षों में 67,000 पिल्लों के जन्म को रोक सकती है, जबकि एक मादा बिल्ली की नसबंदी सात वर्षों में 4,20,000 बच्चों के जन्म को रोक सकती है।

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