अभिनेत्री ऋचा चड्ढा और PETA इंडिया ने केरल के गुरुपुरम श्री महा विष्णु मंदिर को असली हाथी के आकार का मशीनी हाथी भेंट किया

Posted on by Surjeet Singh

मशहूर अभिनेत्री ऋचा चड्ढा और PETA इंडिया ने केरल के गुरुपुरम श्री महा विष्णु मंदिर को ‘गुरुपुरम अर्जुनन’ नामक असली हाथी के आकार का मशीनी हाथी भेंट किया है। इसके साथ ही कासरगोड का यह पहला मंदिर बन गया है, जिसने मशीनी हाथी को अपनाया है। आज अभिनेत्री ऋचा चड्ढा और तंथरी श्री इरविल कृष्ण दास वझुन्नवर ने मंदिर अध्यक्ष कुन्हीरामन अय्यंगव, महासचिव के.के. राम, कोषाध्यक्ष राजीवन और मंदिर के श्रद्धालुओं की मौजूदगी में ‘गुरुपुरम अर्जुनन’ का अनावरण किया। इनमें 2026 केरल राज्य कृषि पुरस्कार से सम्मानित करषकथिलकम की विजेता के. सावित्री भी शामिल थीं।

यह मशीनी हाथी मंदिर को धार्मिक समारोह सुरक्षित और बिना किसी क्रूरता के आयोजित करने में मदद करेगा। साथ ही, इससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि असली हाथी अपने परिवारों के साथ जंगल में स्वतंत्र रूप से रह सकें।

यह पहल PETA इंडिया द्वारा मंदिर के उस संवेदनशील फैसले के सम्मान में की गई है, जिसके तहत मंदिर ने कभी भी जीवित हाथी रखने या किराए पर लेने से इनकार किया है। ‘गुरुपुरम अर्जुनन’ केरल में PETA इंडिया की मदद से भेंट किया गया 15वां मशीनी हाथी है। इसके साथ ही PETA इंडिया अब देशभर में 30 मशीनी हाथी भेंट कर चुका है। मशीनी हाथी का स्वागत एक उद्घाटन समारोह के साथ किया गया, जिसके बाद पारंपरिक चेंडा मेलम और तिरुवातिरा नृत्य प्रस्तुत किए गए।

“आज यहां आकर ‘गुरुपुरम अर्जुनन’ का अनावरण करने और समुदाय को इस शानदार मशीनी हाथी को अपनाते हुए देखना मेरे लिए बेहद खुशी की बात है। यह देखकर अच्छा लगता है कि किस तरह नई तकनीक जीवित हाथियों को जीवनभर की पीड़ा और शोषण से बचाते हुए हमारी प्रिय परंपराओं को बनाए रखने में मदद कर सकती है। इस सार्थक पहल के लिए PETA इंडिया के साथ जुड़कर मुझे गर्व है। असली हाथी जैसा दिखने वाले ‘गुरुपुरम अर्जुनन’ के सामने खड़े होकर यह एहसास होता है कि करुणा और संस्कृति साथ-साथ चल सकते हैं।”

– अभिनेत्री ऋचा चड्ढा

“हम अभिनेत्री ऋचा चड्ढा और PETA इंडिया के आभारी हैं कि उन्होंने हमारे मंदिर को आदमकद मशीनी हाथी ‘गुरुपुरम अर्जुनन’ भेंट किया। यह मशीनी हाथी हमें सभी जीवित प्राणियों के प्रति करुणा रखते हुए अपनी परंपराओं को निभाने में मदद करेगा। हमें उम्मीद है कि यह पहल अधिक मंदिरों और समुदायों को हाथियों के कल्याण और श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए ऐसे संवेदनशील विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित करेगी।”

– मंदिर अध्यक्ष कुन्हीरामन अय्यंगव

हाथी बुद्धिमान, सक्रिय और सामाजिक स्वभाव वाले जंगली पशु हैं। कैद में उन्हें जुलूसों में इस्तेमाल करने के लिए पीटकर, हथियारों का इस्तेमाल करके और जबरन प्रशिक्षित किया जाता है। मंदिरों और अन्य स्थानों पर कैद रखे गए अधिकांश हाथियों को घंटों तक कंक्रीट पर जंजीरों से बांधकर रखने के कारण पैरों में बेहद दर्दनाक समस्याएं और घाव हो जाते हैं। अधिकांश हाथियों को पर्याप्त भोजन, पानी और पशु चिकित्सकीय देखभाल नहीं मिलती और उन्हें प्राकृतिक जीवन जीने का अवसर भी नहीं दिया जाता। इन अमानवीय परिस्थितियों में कई हाथी बेहद परेशान और आक्रामक हो जाते हैं तथा कभी-कभी महावतों या अन्य इंसानों और पशुओं पर हमला कर देते हैं, जिससे उनकी मौत भी हो सकती है।

मशीनी हाथी 3 मीटर ऊंचे होते हैं और उनका वजन 500 किलोग्राम होता है। इन्हें रबर, फाइबर, धातु, जाली, फोम और स्टील से बनाया जाता है तथा ये पांच मोटरों से चलते हैं। मशीनी हाथी को इस तरह बनाया गया है कि वह असली हाथी के रूप और उसकी गतिविधियों की काफी हद तक नकल कर सके। इससे मंदिर इन्हें पारंपरिक समारोहों और जुलूसों में शामिल कर सकते हैं। यह अपना सिर हिला सकता है, कान और आंखें हिला सकता है, पूंछ घुमा सकता है, सूंड उठा सकता है और यहां तक कि पानी भी छिड़क सकता है। इस पर चढ़ा भी जा सकता है और इसकी पीठ पर बैठने के लिए आसन लगाया जा सकता है। इसे बिजली से जोड़कर आसानी से चलाया जा सकता है। इसे सड़कों पर ले जाया जा सकता है और पहियों के आधार पर रखा गया है, जिससे धार्मिक अनुष्ठानों और जुलूसों के दौरान इसे आसानी से खींचकर या धकेलकर ले जाया जा सकता है।

कासरगोड के सुंदर प्राकृतिक परिवेश के बीच स्थित गुरुपुरम श्री महा विष्णु मंदिर भगवान महा विष्णु को समर्पित एक प्रतिष्ठित धार्मिक स्थल है, जहां शांति, सुरक्षा और ईश्वर का आशीर्वाद पाने के लिए श्रद्धालु आते हैं। प्राकृतिक सुंदरता से घिरा यह मंदिर शांत आध्यात्मिक वातावरण प्रदान करता है और उत्तरी केरल की समृद्ध सांस्कृतिक एवं धार्मिक विरासत को दर्शाता है। मंदिर अपने वार्षिक उत्सवों और विशेष पूजाओं के दौरान विशेष रूप से श्रद्धालुओं के बीच लोकप्रिय रहता है। इन अवसरों पर पारंपरिक अनुष्ठान, उत्सव और स्थानीय समुदाय की भागीदारी गहरी आस्था और एकता का माहौल बनाते हैं, जिससे यह क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल बन जाता है।

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